इन तीन फोटो से समझिए कैसे हुआ हादसा और कहां हो गई थी चूक

Bilaspur News - चुचुहियापारा अंडरब्रिज के लिए कांक्रीट बाॅक्स रखने के समय गंभीर लापरवाही बरती गई। गड्ढे धंस रहे थे यह अफसरों को...

Nov 14, 2019, 06:51 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news from these three photos understand how the accident happened and where it went wrong
चुचुहियापारा अंडरब्रिज के लिए कांक्रीट बाॅक्स रखने के समय गंभीर लापरवाही बरती गई। गड्ढे धंस रहे थे यह अफसरों को पता था फिर भी सतर्कता नहीं बरती। बाॅक्स रखे जाने के समय ही गड्‌ढे से लगी हुई पटरी से गोंडवाना एक्सप्रेस गुजरी थी। ट्रेन कंपन से धरती हिली और 200 टन वजन उठाने वाली क्रेन गीली मिट्टी में एक तरफ धंसती चली गई। गुरुवार की सुबह तक रूट सामान्य होने की संभावना है।

चुचुहियापारा अंडरब्रिज निर्माण के लिए रेडीमेड तैयार कांक्रीट के बाॅक्स रखने का काम 10 नवंबर से शुरू किया गया। पहले दिन चुचुहियापारा एंड से काम शुरू किया गया। वहां सबसे पहले लाइन नंबर एक बाइपास लाइन को काटकर अलग किया एवं वहां पर 10 बाॅक्स रखे गए। बाॅक्स रखने के लिए जब खुदाई की जा रही थी तब वहां पानी आ गया था। पानी आसपास की नालियों से रिसकर गड्ढे में आ रहा था। मंगलवार को दोपहर 12 बजे जब तीसरे नंबर का बाॅक्स रखा जा रहा था उस समय भी मिट्टी धंसकर गिरी थी। इसकी वजह से काम को दो घंटे रोकना पड़ा था। अफसर इस बात को अच्छी तरह से जान और समझ रहे थे कि गीली मिट्टी से हादसा हो सकता है लेकिन उन्होंने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और बड़ा हादसा हो गया। मिट्टी गीली और धंस रही थी ऐसे में गड़्ढे के करीब से किसी भी ट्रेन को गुजारा नहीं जाना था लेकिन अफसरों ने सामान्य माना जिसका परिणाम एक बड़े हादसे के रूप में सामने आया। मंगलवार को जब मिट्टी धंसी उसी समय अफसर गंभीर हो जाते तो यह हादसा नहीं होता। क्योंकि पहले दिन जब गड्ढा किया गया तब ही मिट्टी गीली हो गई थी।

इन अफसरों को लगी चोट: इस हादसे में सीएसएम बीके विश्वास के अलावा अपर मंडल संरक्षा अधिकारी रवि नेवारे, सीनियर डीईएन कोआर्डिनेशन आरके सिंह, सीनियर डीईएन साइडिंग योगेश सिंह, सेफ्टी काउंसलर राजेश कुमार शर्मा, डीओएम अशोक कुमार, एमसीएम सिग्नल संजय कुमार, एसएसई जेके बरई, कांट्रेक्टर राहुल केडिया एवं मणिपाल घायल हुए हैं। इनमें से से अपर मंडल संरक्षा अधिकारी रवि नेवारे को सिर पर गंभीर चोट लगी है। तीन अफसरों का इलाज अपोलो अस्पताल में चल रहा है। 2 लोगों का रेलवे हास्पिटल में इलाज चल रहा है। तीन को प्राथमिक उपचार के बाद वापस भेज दिया गया।

चुचुहियापारा अंडरब्रिज: कांक्रीट बॉक्स रखने के लिए क्रेन को खोदे गए गड्‌ढे के समीप ही खड़ा किया गया था। क्रेन बॉक्स को उठाकर गड्‌ढे तक पहुंचा ही थी कि गड्‌ढे के अंदर की मिट्‌टी दबाव पड़ते ही ढीली पड़कर ढह गई। इससे क्रेन का एक हिस्सा गड्‌ढे के अंदर चला गया। इससे पूरी क्रेन पलट गई।

चुचुहियापारा रेलवे अंडरब्रिज हादसा
पहले से पता था कि मिट्टी धंस रही है, फिर भी नहीं किए इंतजाम गोंडवाना एक्सप्रेस निकली तो कंपन से िहली धरती, क्रेन पलटी

ओएचई तार तोड़ते हुए गिरी क्रेन, मुख्य स्टेशन प्रबंधक, एसडीएसओ सहित अन्य अफसरों की जान जाते-जाते बची

चुचुहियापारा अंडरब्रिज के लिए खोदे गए गड्‌ढे में पलटकर उलटी पड़ी भारी भरकम क्रेन। इससे डाउन व मिडिल लाइन पूरी तरह से बंद हाे गई। ओएचई तार भी टूटकर बिखर गए।

विभागीय अफसरों में समन्वय की कमी भी हादसे की बड़ी वजह

चुचुहियापारा अंडरब्रिज के लिए बाॅक्स रखने इंजीनियरिंग विभाग ने 7 घंटे का ब्लाॅक मांगा था। इस दौरान लाइन नंबर 2,3,4 व 5 नंबर के नीचे बाॅक्स रखा जाना था। ब्लाॅक का काम ऑपरेटिंग विभाग के ऊपर निर्भर रहता है। इंजीनियरिंग विभाग ने काम को सुचारू रुप से करने के लिए लंबा ब्लाॅक मांगा था लेकिन ऑपरेटिंग विभाग इसके टुकड़ों में 40 मिनट, 50 मिनट, 35 मिनट करके दे रहा था। ऐसे में भारी भरकम क्रेन को बार-बार हटाने और हिलाने की वजह से मिट्टी की पकड़ ढीली होने लगी थी। इससे मैदानी अमले ने बड़े अफसरों को अवगत भी कराया लेकिन ऑपरेटिंग विभाग राजस्व की हानि नहीं होने देना चाह रहा था इसलिए ब्लाॅक को टुकड़ों में बांट दिया था।

हावड़ा रूट की ट्रेनें बाइपास लाइन से चलीं, डाउन लाइन पर 6 घंटे बाद यातायात शुरू

हादसे के बाद से बिलासपुर से हावड़ा जाने वाली डाउन व मिडिल लाइन बंद हो गई थी। क्रेन उन्हीं पटरियों पर गिरी थी। सात नंबर लाइन जिसके नीचे सबसे पहले कांक्रीट बाॅक्स रखे गए थे वहीं लाइन सिर्फ चालू थी। हावड़ा की ओर से पहली ट्रेन रात 7.40 बजे पुरी-बीकानेर एक्सप्रेस को बाइपास लाइन से बिलासपुर लाया गया गया। चूंकि इस लाइन की कनेक्टिविटी किसी प्लेटफार्म पर नहीं है इसलिए ट्रेन को बाइपास में रोका गया। यात्री वहीं से उतरकर प्लेटफार्म होते हुए स्टेशन से बाहर निकले। इसके बाद रात में 8.50 बजे कोरबा-विशाखापट्नम लिंक एक्सप्रेस को उसी लाइन से गुजारा गया। इसके पीछे दूरंतो व अन्य ट्रेनों को लाया गया।

रात 10.30 बजे शुरू हुई डाउन लाइन

डाउन व मिडिल लाइन पर ही क्रेन गिरी थी। इस वजह से हावड़ा की ओर जाने वाला यातायात बंद था। क्रेन के सामने के हिस्से को खोलकर अलग किया गया और बाहर से बुलाई गई क्रेन की मदद से उस हिस्से को रेलवे लाइन से हटाकर खाली जगह पर किया गया। इसके बाद आनन-फानन में ओएचई को जोड़ा गया। इसके बाद प्लेटफार्म नंबर एक पर 4 घंटे से खड़ी पुणे-हावड़ा आजाद हिंद एक्सप्रेस को रात 10.45 बजे डाउन लाइन से हावड़ा के लिए रवाना किया गया। इसके पीछे एक के बाद एक ट्रेनों को आगे रवाना किया।

मची अफरा-तफरी: हादसे के बाद जैसे ही क्रेन पलटी उसके आसपास काम कर रहे अधिकारी-कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर घायल एक अधिकारी को उठाते हुए कर्मचारी एवं मदद के लिए आवाज लगाकर लोगों को बुलाते अन्य अफसर। इस स्थान पर 9 लोग घायल हुए हैं।

देर रात पहुंचे जीएम

रेलवे महाप्रबंधक गौतम बनर्जी दे रात लगभग 10 बजे चुचुहियापारा हादसा स्थल पर पहुंचे और अफसरों से इस पूरे हादसे के बारे में जानकारी ली। इंजीनियरिंग व ऑपरेटिंग विभाग के अफसर भी मौके पर मौजूद थे। लगभग 30 मिनट रुककर जीएम ने कर्मचारियों से चर्चा भी की।

रद्द की जाने वाली गाड़ियां









देरी से रवाना होने वाली गाड़ियां


उच्च स्तरीय टीम गठित

हादसे के बाद दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोनल मुख्यालय ने हादसे की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। इसमें जोन व डिवीजन के सभी वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। उन्हें जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द देने के निर्देश दिए गए हैं।

कूदकर भाग गया क्रेन चालक

हादसे के समय जैसे ही क्रेन एक तरफ झुकने लगी तो उसका ड्राइवर केबिन से बाहर निकला और कूदकर भाग गया। लोगों का ध्यान क्रेन की ओर चला गया इसलिए उसे कोई देख नहीं पाया। उसे रात तक तलाशते रहे लेकिन नहीं मिला। एक अन्य क्रेन को जाे 400 टन वजन उठाने के लिए है उसके चालक से पूछा गया तो वह भी उसका नाम नहीं बता सका। उसने बताया कि हादसे के बाद से उसे किसी ने नहीं देखा है। उसे भी हल्की चोट आई है।

परिवर्तित मार्ग से चली गाड़ियां



गंतव्य से पहले समाप्त की जाने वाली गाड़ियां



300 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी जुटे रहे

डाउन व मिडिल लाइन ब्लॉक: क्रेन पलट जाने से मुंबई हावड़ा जाने वाले रूट की डाउन व मिडिल लाइन पूरी तरह से ब्लॉक हो गई। इतना ही नहीं ओएचई के तार टूटकर पटरी में बिखर गए। इसकी वजह से 6 घंटे तक बिलासपुर से हावड़ा जाने वाली रूट पर यातायात अवरूद्ध रहा।

हादसे के समय मौके पर अफसरों, कर्मचारियों व श्रमिकों को मिलाकर 100 से अधिक लोग काम कर रहे थे। हादसा होने के बाद डीआरएम, एडीआरएम सहित अन्य प्रशासनिक अमलों के साथ-साथ इलेक्ट्रिकल, मेकेनिकल, इंजीनियरिंग सहित अन्य सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों ने मोर्चा संभाल लिया था। मौके पर मौजूद 300 से अधिक लोग अपने-अपने स्तर के काम को युद्धस्तर पर पूरा करने में जुटे। इस वजह से यातायात जल्द ही सुचारू किया जा सका।

मिट्‌टी धंस रही है... भास्कर ने एक दिन पहले ही आगाह किया था

रेलवे की लापरवाही उजागर

शहर विधायक शैलेष पांडेय ने अपोलो पहुंचकर घायलों की कुशलक्षेम पूछी। वे मौके पर भी गए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंगलवार को मिट्टी धंसने की घटना के बावजूद अफसर नहीं चेते। गंभीर हादसे से रेलवे की लापरवाही उजागर हो गई।

परिवर्तित मार्ग से चली ये ट्रेनें







जांच के बाद ही स्पष्ट होगा


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