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सरकारी जमीन हथियाने ऐसे किया खेल खसरा, दस्तावेज, रिकॉर्ड सब में छेड़छाड़

एक वर्ष पहले
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लिंगियाडीह में रामानंद गृह निर्माण समिति के नाम पर जमीनों की गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। जांच रिपोर्ट में यह बात खुली है कि राजस्व अभिलेखों में जिन जमीनों का वजूद तक नहीं था। उसके दस्तावेज तैयार किए गए। कुछ खसरा नंबर में छेड़छाड़ भी की गई। और सरकारी जमीन को दबाने का खेल चलता गया। इस मामले में आठ महीना पहले दोबारा सीमांकर कर जांच रिपोर्ट तैयार करने की बात कही गई थी।

एसडीएम ने नायब तहसीलदार को जो चिट्‌ठी लिखी है। उसमें स्पष्ट तौर पर लिखा गया कि वहां सरकारी जमीनों में गड़बड़ी सामने आ चुकी है। लिंगियाडीह स्थिति रामानंद गृह निर्माण समिति के अध्यक्ष के नाम पर विभिन्न खसरा नंबर के तहत कोई 1.19 हेक्टेयर जमीन राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। आवेदित भूमि वर्ष 1928-29 में खसरा नंबर 9 रकबा 51.00 में दो एकड़ एवं खसरा नंबर 15 रकबा 185.8 एकड़ भूमि घास मद में दर्ज है। इसके अतिरिक्त अधिकार अभिलेख एवं निस्तार पत्रक के अवलोकन से भी जांच अधिकारियों ने पाया है कि भूमि खसरा नंबर 198/30, 162/1, 162/2 को ओवर राइटिंग कर 198/31, 162/3 और 162/4 रकबा क्रमश: 3.50, 4.40, और 4.40 एकड़ कूटरचित कर सुधार किया गया है। जबकि खसरा नंबर 162/3 162/4 राजस्व अभिलेखों में वजूद में ही नहीं है। एसडीएम ने लिखा है कि जांच में मिले सबूतों से परिलक्षित होता है कि शासकीय भूमि खुर्द-बुर्द हुई है। इसलिए इसकी सूक्ष्म जांच जरूरी है। इसके लिए उन्होंने टीम बनाकर दोनों खसरा नंबर की जांच करने ओर दोषियों के नाम सामने लाने की बात कही है। इसमें दो आरआई और तीन पटवारियों की टीम बनाकर जांच प्रतिवेदन देने की बात कही गई है। एसडीएम का कहना है कि उन्हें रिपोर्ट नहीं दी है।

मुझे दोबारा सीमांकन की रिपोर्ट नहीं मिली है

- देवेंद्र पटेल, एसडीएम, बिलासपुर

परिलक्षित होता है कि शासकीय भूमि खुर्द-बुर्द हुई है। इसलिए इसकी सूक्ष्म जांच जरूरी है। इसके लिए उन्होंने टीम बनाकर दोनों खसरा नंबर की जांच करने ओर दोषियों के नाम सामने लाने की बात कही है। इसमें दो आरआई और तीन पटवारियों की टीम बनाकर जांच प्रतिवेदन देने की बात कही गई है। एसडीएम का कहना है कि उन्हें रिपोर्ट नहीं दी है।

दोबारा सीमांकन करने वाली टीम ने की पुराने रिकॉर्डों की मांग


इस पूरे मामले में जमीनों के पुराने रिकॉर्ड की जरूरत पड़ रही है। इसके लिए राजस्व अधिकारियों ने एसडीएम को पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग की है। अभी यह उन्हें नहीं मिला है। इसके कारण ही आगे की जांच अटकी हुई है। प्रकरण में एक दूसरा सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पूर्व में इसकी जांच हो चुकी है। और जांच में गड़बड़ी सामने आ चुकी है। फिर दूसरी जांच की जरूरत क्यों पड़ रही है। कुल मिलाकर अधिकारी मामले को घुमाकर रखना चाह रहे हैं। किसी वक्त में उनके ऊपर यह बात ना जाए इसलिए ही उन्होंने इसमें फिर से जांच की बात लिख दी है। और आरोपियों को बचाने की मकसद से चिट्‌ठीबाजी चल रही है।

एसडीएम की तहसीलदार को चिट्‌ठी।

पटवारी और तहसीलदारों को याद नहीं है मामला

हैरानी की बात यह है कि पटवारी और तहसीलदारों को जमीन की जांच रिपोर्ट क्या आई है। यह याद नहीं है। लिंगियाडीह के वर्तमान पटवारी अमित पंांडेय का कहना है कि उन्होंने जमीन की जांच रिपोर्ट अधिकारियों को सौंप दी है। रिपोर्ट में कौन जिम्मेदार है यह याद नहीं है। जबकि तहसीलदार यह मान रहे हैं कि गड़बड़ी हुई है। पर पूरा मामला क्या है। यह फाइल देखकर ही बता पाएंगे। अधिकारी इस पूरे मामले में गोलमोल जवाब दे रहे हैं।
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