• Hindi News
  • Chhattisgarh
  • Bilaspur
  • Bilaspur News chhattisgarh news husband does not kill this woman by concealing identity from fear officers call the case number 641

पति मार ना डाले इस भय से पहचान छुपाकर जी रही महिला, अफसर पुकारते हैं केस नंबर- 641

Bilaspur News - आशीष दुबे | बिलासपुर 9907901010 वो एक मां है। उम्र 32 साल। बच्चा पास नहीं है। पति के डर से घर भी नहीं जा सकती। और ससुराल और...

Bhaskar News Network

Feb 14, 2019, 03:20 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news husband does not kill this woman by concealing identity from fear officers call the case number 641
आशीष दुबे | बिलासपुर 9907901010

वो एक मां है। उम्र 32 साल। बच्चा पास नहीं है। पति के डर से घर भी नहीं जा सकती। और ससुराल और मायके वाले उसकी जान का खतरा बताकर रखने को तैयार नहीं। पुलिस और अफसर उसे केस नंबर 641 के नाम से पुकारते हैं। ये स्थिति पिछले डेढ़ साल से बनी हुई है। महिला बाल विकास अधिकारियों ने फिलहाल उसे बतौर पुनर्वास एक डॉक्टर के यहां काम पर रखा है। यहां वह एक पेशेंट की देखभाल कर अपना गुजारा चला रही है। अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने महिला को घर भेजने के कई प्रयास किए हैं, पर पति के डर से वह जाना नहीं चाहती। कुछ घटनाएं भी हुई हैं, जिसके कारण उसे अब रखने को कोई तैयार नहीं है।

बिलासपुर में पेंड्रा का एक गांव उसका मूल घर है। गलती सिर्फ इतनी ही है कि उसने सबसे पहले इंटरकास्ट मैरिज कर ली। उसे पता नहीं था कि जिस लड़के वह प्रेम करती है शराबी निकलेगा। शादी के बाद घरवालों ने पहले मुंह मोड़ लिया। शादी के कुछ ही दिन पति की प्रताड़ना शुरू हुई। कहां जाऊंगी सोचकर पांच बरस गुजर गए। दो साल का एक बच्चा भी है। पांच साल बाद जब पति की प्रताड़ना अधिक हो चला तब उसने अलग रहने की ठान ली। उसे एक दोस्त ने सहारा दिया। वह सब छोड़कर दोस्त के पास बिलासपुर आ गई। डेढ़ महीने बाद पति को पता चल गया कि उसे किसी ने पनाह दे रखी है। गुस्से में वह उस शख्स के घर पहुंचा और दोनों पर बिना कुछ पूछे कुल्हाड़ी चला दी। दोनों को शरीर पर गहरी चोट लगी। मामले की जानकारी पुलिस को दे दी। शहर के एक थाने में पति के खिलाफ जुर्म कर लिया गया। इसके बाद दोस्त ने भी महिला को रखने से हाथ खींच लिया। नतीजा वह उज्जवला होम पहुंच गई। यहां साढ़े दस महीने रहने के बाद उसका पुनर्वास किया गया है।

दो साल के बच्चे को देखने को तरस रही, डर में पहुंची थी उज्जवला होम, दस महीने बाद पुनर्वास किया

अब उसकी पहचान सिर्फ केस नंबर के तौर पर

उज्जवला होम के अधिकारी बताते हैं कि उन्होंने महिला के घरवालों से उसे रखने को लेकर बातचीत की। भाई उपसरपंच है। कुछ दिन लेकर भी गया। पर पति वहां भी हंगामा करना शुरू कर दिया तो वह फिर से उज्जवला होम आ गई। घर में तनाव की स्थिति निर्मित नहंी हो यही कहकर वह फिर से यहां आ गई। कोई साढ़े दस महीने बाद उसका पुनर्वास किया गया है।

एक चिकित्सक के यहां पेशेंट की कर रही है देखभाल

उज्जवला के अधिकारियों ने उसकी ड्यूटी एक चिकित्सक के यहां लगवा दी है। वहां रहकर वह एक पेशेंट की देखभाल कर रही है। खाने-पीने के अलावा उसे कुछ पैसे मिलते हैं। जिसे उसके ही खाते में डलवाया जा रहा है। यूं कहें कि अब वह पति के डर से कहीं आने-जाने को तैयार नहीं है। चुपचाप के एक गुमनाम की सी जिंदगी गुजारने को लाचार है।

हमने घर बसाने का पूरा प्रयास किया, पर सफल नहीं हुए


मुझे फाइल देखनी होगी


X
Bilaspur News - chhattisgarh news husband does not kill this woman by concealing identity from fear officers call the case number 641
COMMENT