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रपटा बचाने बैराज की ऊंचाई घटाई तो अरपा लबालब नहीं होगी, स्वच्छ पानी के लिए गंदे पानी की निकासी बंद करें
अरपा नदी को संरक्षित करने और उसके बहाव को अविरल रखने के लिए अरविंद शुक्ला सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पत्र याचिका प्रस्तुत की है। इसको जनहित याचिका के रूप में लेकर हाईकोर्ट सुनवाई कर रही है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान राज्य शासन की तरफ से कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए कोर्ट को 6 और नाम सुझाए। इस तरह अब कमेटी में 12 सदस्य हो गए हैं। ये कमेटी अरपा उद्गम और उसके अविरल प्रवाह के लिए कार्य योजना बनाकर हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होगी। अरपा उद्गम पेंड्रा के अमरपुर में है, इसलिए गौरेला, पेंड्रा, मरवाही के कलेक्टर को इस जनहित याचिका में पक्षकार बनाने का निर्देश हाईकोर्ट ने दिया है। इस दौरान 18 फरवरी 2020 को कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए राज्य शासन की तरफ से सुनवाई के दौरान बताया गया कि 6 सदस्यीय कमेटी और बनाई गई है। इसमें भूगर्भ शास्त्र, इतिहासकार, पर्यावरणविद, केंद्रीय भू गर्भ जल के वैज्ञानिक, वन विभाग के अधिकारी और पारिस्थितिकी को समिति का सदस्य बनाए जाने की जानकारी दी। इस पर कोर्ट ने कहा कि अरपा उद्गम को संरक्षण करने, पुनर्जीवित करने, नदी कैसे अविरल बहेगी इस पर कमेटी कार्य योजना बनाएगी।
एक्सपर्ट व्यू
- अमिताभ कुमार झा, रिटायर्ड एसई जल संसाधन
अरपा को संरक्षित करने कोर्ट के आदेश पर 12 सदस्यों की समिति बनी
सूर्यकान्त चतुर्वेदी | बिलासपुर
दशकों से राजनीति का मुद्दा रही अरपा में बारहों महीने पानी रखने की योजना पर पहली बार काम होने वाला है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा पर अमल करने जल संसाधन विभाग दो बैराज बनाने सर्वे करा रहा है। पचरीघाट और इंदिरा सेतु के पास 39 करोड़ की लागत से बैराज बनेगा। वहीं नगर निगम गटर बन चुकी अरपा में गंदे पानी की निकासी रोकने नदी के समानांतर नाला निर्माण के लिए 123 करोड़ और एनटीपीसी को सीवेज वॉटर बेचने के लिए पीपीपी मॉडल पर 377 करोड़ की योजना बना चुका है। स्मार्ट सिटी के अंतर्गत रिवर व्यू की तर्ज पर पुराने पुल से इंदिरा सेतु तक 750 मीटर लंबे और 80 फुट चौड़े रिवर व्यू -2 के निर्माण के लिए 30.99 करोड़ का वर्क आर्डर कल्याण ट्रोल इंदौर को अगले हफ्ते जारी होने की सूचना है।
ऊंचाई इतनी हो कि नदी में दो फुट पानी तो रहे: तीनों योजनाओं पर गौर करें तो इनके बीच आपसी समन्वय का अभाव देखा जा रहा है। खबर है कि जल संसाधन विभाग जो बैराज बनाने वाला है, उसकी ऊंचाई देवरीखुर्द चेक डेम की तुलना में 2 मीटर कम रखी गई। एेसा करने के पीछे शनिचरी रपटा और तटवर्ती स्वीपर मोहल्ला, जबड़ापारा जैसे निचले क्षेत्रों को डूब से बचाने का तर्क दिया जा रहा है। ‘दैनिक भास्कर’ ने इस संबंध में एक्सपर्ट की राय ली। ऊंचाई कम करने से बैराज के छोर पर एकाध फुट ही पानी रुकने का अनुमान है। अरपा पर गौर करें तो जल स्तर नीचे जाने पर बहाव का आंकलन गलत साबित हो सकता है। ऊंचाई का आंकलन कुछ इस प्रकार हो कि नदी में वर्ष भर कम से कम दो ढाई फुट पानी तो रहे।
समिति में शामिल सदस्य
अधिवक्ता वायसी शर्मा, आशुतोष कछवाहा, एनके व्यास, यूएनएस देव, सीएमडी कॉलेज के भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पीएल चंद्राकर को पूर्व में सदस्य बनाया गया था। इस पर कोर्ट ने भू विज्ञान, इतिहास, पर्यावरणविद, केंद्रीय भूजल बोर्ड, वन और पारिस्थितिकी के विशेषज्ञ को समिति में शामिल करने आदेश दिया था। इस पर राज्य सरकार ने एनआईटी रायपुर के सहायक प्राध्यापक भूगर्भ शास्त्री डॉ. भारगव आयंगर, शासकीय महाविद्यालय पेंड्रा के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रमोद अहिरवार, पर्यावरणविद अमलेंदू मिश्रा, केंद्रीय भूगर्भ जल मंडल के वैज्ञानिक डी जनकराम वर्मा, वन मंडलाधिकारी मरवाही आरके मिश्रा, राज्य एबीसी जैव विविधता समिति के सदस्य पारिस्थितिकी नीरज तिवारी को समिति का सदस्य बनाया है। इसके अलावा सालसा के अधिवक्ता सुनील ओटवानी को सदस्य के रूप में कोर्ट ने एप्रूव किया।
बैक वाटर देख कर डिजाइन करें
नदी किनारे जमीन पाट कर बनाई जाएगी सड़क
नगर निगम के कार्यपालन अभियंता पीके पंचायती के मुताबिक रिवर व्यू -2 नदी किनारे की जमीन पाट कर बनाई जाएगी। इसके लिए नदी की शिल्ट निकाल कर नदी किनारे पाटने के लिए माइनिंग विभाग की अनुमति मांगी गई है।
6 मीटर ऊंची रोड के लिए वर्क आर्डर शीघ्र
नगर निगम नदी किनारे 6 मीटर ऊंचे रोड के निर्माण की योजना पर काम कर रहा है, तब तटवर्ती क्षेत्रों के डूब में आने का आकलन कितना सही होगा? बड़ा सवाल यह है कि बैराज बनाने से पहले गंदे पानी की निकासी रोकने की योजना पर अमल हो, ताकि अरपा में गंदा पानी जमा करने वाले देवरीखुर्द चेक डेम की पुनरावृत्ति न हो। पहले में नदी में गंदे पानी की निकासी बंद कराई जाए फिर बैराज बनाएं तो रुकने वाला पानी स्वच्छ होगा और तभी अरपा अपने पुराने वैभव को प्राप्त कर सकेगी।
शनिचरी रपटा :30 अप्रैल 1988 को 81 लाख रुपए में निर्मित। 3 मीटर की ऊंचाई का बैराज बनाने पर रपटा के दो फुट नीचे तक ही रहेगा पानी का लेवल।
जानिए अरपा की योजना फाइलों से किस स्तर पर पहुंची
योजना का नाम सर्वे, शासन से स्वीकृति इनके मुताबिक
दो बैराज प्रारंभिक सर्वे एके सोमावार सीई जल संसाधन
नाला निर्माण शासन से स्वीकृति प्रतीक्षित प्रभाकर पांडेय आयुक्त नगर निगम
सीवेज वाटर बेचने की योजना एनटीपीसी से एमओयू प्रतीक्षित सुरेश बरुआ ईई नगर निगम