होरी के आगी म अपन बुरई ल बारव
आवा जुरमिल के मनावव होरी**
फिरतू अपन संगी मंगलू करा गोठियावत-गोठियावत फिरतू ह कइथे यार मंगलू देख तो बरातू कका ह अपन कोठार म नवा-नवा राचर लगाए हवय फिरतु के मुंह के भाखा ह मुंहे म रई गय मंगलू ह कइथे त होरी के रात ओला होरी म बारना हे ना और दुनो झन दांत ल निपोर हासे लगीन, दुनो संगी के गोठ बात ह चलते रहय के फलाना के दुकान के पलानी ल होरी म बारना है ढेकाना के बैलागाड़ी के चक्का ल त कुसवा बबा के बमहरी के पेड़ ह बने मोटहा होगे हे तेला डारना हे। मंगलू कहत हे नई यार फिरतू ऐ दारी होली के दिन बर का बेवस्था हे त फिरतू कथे का बेवस्था बे मोर घर एक ठन देसी कुकरा हवय अउ तै दु ठन चेपटी के जुगाड़ कर लेबे, हमर होरी के तिहार निपट जाही अपन गोठ बात म दुनो अतका बिधुन रहय के उखर पिछु-पिछु साहू गुरुजी आवत रहीस तेला उमन गम नई पाइन, गुरुजी ल उखर गोठ सुन के अड़बड़ रंज लगीस फेर ओतका बेर कुछू नई कहिस। तीसर दिन गुरुजी ह इसकुल के लईका मन ल धर के गांव के चउपाल म आइस अउ ओहि फिरतु अउ मंगलू ल बला के कहिस के जावा सबो गांव के मनखे मन ल चउपाल म बला लावा, दुनु संगी हव गुरुजी कइके अउहा -झउहा गेइन अउ उत्ताधुर्रा गांव म किजर आइन। अब सबो मनखे टकटकी लगाय देखत रहय के गुरुजी काबर बलाय हवे गांव के सबो मनखे गुरुजी के बड़ आदर करय कोनो कुछू पूछ नई पात रहय, एक झन झंगलू नाव के मनखे ह पूछिस काय होही गुरुजी, पूछिस कम गुटका भरे मुंह ले थूक ल छिटकारिस जादा, गुरुजी ह ताना मारिस कहिस ये मेर गुटका कइसे पगुराना हे तेखर बिधि बताय जाही, त झंगलू अपन थोथना ल ओरमा के बइठ गय। सबो गांव के मनखे सकला गिन तहा गुरुजी कहिस के आज हमर इसकुली लईकन मन नाटक करहि त धियान देके देखव अउ समझव। लईकन मन नाटक शुरू करिन एकझन लईका हिरणकश्यप बने रहय तेन ह बने उचहा भाखा म कहत रहय - “मोला बरदान मिले हे के मय न दिनमान मरव न रात कुन, न धरती म मरव न अकास म, मोला न कोनो देवता मार सकय, न राक्छस, मय न बाहिर मरव न भीतर म, मय अमर होगे हव, मेहा तुहर भगवान आव अब ले जेन ह बिस्नु के पूजा करही तेला मार डारहु,” लेकिन बिधि के विधान ल कोनो नई जान सकय, ओखरे घर म ओखर बाई के कोख ले भगवान के भगत के जनम पहलाद के रूप म होगे, हिरणकशयप ह गंज अकन समझाइस के बेटा तै हमर बैरी बिस्नु के नाव जपे बर छोड़ दे ,फेर लईका ह नई मानिस त हिरणकशयप ह अपन बहिनी ‘होलिका’ ल बलाइस होलिका ल बरदान मिले रहय के आगी वोला नई जला सकय, होलिका के कोरा म पहलाद ल बइठार के आगी लगवा देइस झिन भर म आगी भमके लग गय। करम के लिखा ल कोनो मेट नई सकय होलिका आगी म जर के राख होगे, अउ पहलाद उपर एकठन फोरा तको नई परीस ।
मदन कुमार साहू मुंगेली**