भारत की मेधा शक्ति को शासन तंत्र ने कुचला मेरी शक्ति शासन से प्रदत्त नहीं है: निश्चलानंद

Bilaspur News - सेंट जेवियर्स उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भरनी में मंगलवार को आध्यात्मिक संगोष्ठी शिक्षा अध्यात्म एवं विज्ञान...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 06:36 AM IST
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सेंट जेवियर्स उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भरनी में मंगलवार को आध्यात्मिक संगोष्ठी शिक्षा अध्यात्म एवं विज्ञान आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। स्कूल के बच्चों को गोवर्धन मठ पूरी के शंकराचार्य जगतगुरु निश्चलानंद सरस्वती ने संबोधित किया। संगोष्ठी में उन्होंने विद्यार्थियों की जिज्ञासा शांत किया और उनके सवालों के जवाब भी दिए। इस दौरान स्वामी निश्चलानंद महाराज से 12वीं की छात्रा ने पूछा कि धर्म, ज्ञान के अलावा आपने गणित की किताबें भी लिखी हैं। गणित के बारे में जीवन का क्या संबंध है? स्वामी ने कहा कि गणित खाना खाने, बोलने, सुनने, चलने, सोने हमारे जीवन के हर एक पग पर गणित का संबंध है। उन्होंने कहा कि स्वस्तिक गणित पुस्तक की रचना की, जिसके वैदिक गणितीय सिद्धांतों को वर्तमान में 200 देश मान रहे हैं। वहां कंप्यूटर से लेकर मोबाइल फोन ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए आधुनिक आविष्कारों में भी इन्हीं सिद्धांतों का प्रयोग किया जा रहा है।

स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि सबको मालूम है कि भारत का शासन तंत्र किस धर्म का है, लेकिन मैं किसी धर्म का नहीं हूं, इसलिए मेरे ज्ञान-विज्ञान का लोक इनको नहीं है। भारत की मेधा शक्ति शासन तंत्र द्वारा कुचल दी गई है। मेरी मेधा शक्ति किसी शासन द्वारा प्रदत्त नहीं है। इसलिए मेरी मेघा शक्ति नहीं जा सकती है। भारत में वो क्षमता नहीं है कि वे अपनी मेधाशक्ति, रक्षाशक्ति, वाणीशाक्ति सभी शक्ति का राष्ट्रहित के उत्कर्ष में उपयोग कर सकते हैं। हां एक इशारा जरूर करुंगा कि आरएसएस द्वारा संचालित सरस्वती विद्या मंदिर के पूरे देश के गणित के शिक्षक तीन दिनों तक हमारे मंदिर में आकर गणित का प्रशिक्षण लिए। इस अवसर पर पीठ परिषद के उपाध्यक्ष पंडित झम्मन शास्त्री, बिलासपुर विधायक शैलेश पांडे ,आनंद वाहिनी की राष्ट्रीय महामंत्री सीमा तिवारी, राष्ट्र उत्कर्ष समिति के संयोजक डॉ. प्रफुल्ल शर्मा, डॉ. विवेक बाजपेई, कार्यक्रम प्रभारी संदीप पांडे, आदित्य वाहिनी के संभागीय प्रभारी चंद्रचूड़ त्रिपाठी, पीठ परिषद के संभागीय प्रभारी चेतन धर दीवान, आदित्य वाहिनी के जिला अध्यक्ष अभिषेक पांडे, आनंद वाहिनी की गीता तिवारी, पूर्णिमा दुबे, अंजू मिश्रा, प्रभा दुबे, इंदिरा शर्मा, कुंती पाण्डेय, लक्ष्मी पाण्डेय, सेंट जेवियर्स विद्यालय के चेयरमैन जीएस पटनायक, प्राचार्य प्रवीण कुमार चतुर्वेदी, सी मुकेश सराफ, असिस्टेंट डायरेक्टर अच्युतानंद सामंतराय, पीवी मिस्त्री सहित स्कूल के छात्र उपस्थित रहे।

निश्चलानंद महाराज ने छात्रों को शिक्षा, अध्यात्म व विज्ञान के बारे में बताया

सेंट जेवियर्स उच्चतर माध्यमिक स्कूल में व्याख्यान देते हुए जगतगुरु निश्चलानंद सरस्वती, कार्यक्रम के दौरान उपस्थित बच्चे व परिजन।

वेदों में ज्ञान और विज्ञान का भंडार: शंकराचार्य

शंकराचार्य ने कहा कि वेद शब्द का अर्थ, ज्ञान विज्ञान का भंडार होता है। ज्ञान के दो भेद हैं, पहला विद्या और दूसरा कला। वाणी के द्वारा जिसकी सिद्धि होती है वह विद्या कहलाती है। इसी तरह कोई व्यक्ति शरीर से कर्म करता है तो वह कला कहलाती है। 32 विद्याओं और 64 कलाओं का समावेश ही संपूर्ण ज्ञान विज्ञान का समावेश होता है। यज्ञ यज्ञ,दान ,तप, सेवा, उपकार, माता पिता का आदर ,गुरु का सम्मान करना यही आज के समय में व्यवहारिक धरातल पर धर्म हैं। इसलिए विद्यार्थियों को यह कार्य जरूर करना चाहिए। शास्त्रों में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि व्यक्ति को दूसरे से वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा, कि वह स्वयं अपेक्षा करता है।

सिटी रिपोर्टर | बिलासपुर

सेंट जेवियर्स उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भरनी में मंगलवार को आध्यात्मिक संगोष्ठी शिक्षा अध्यात्म एवं विज्ञान आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। स्कूल के बच्चों को गोवर्धन मठ पूरी के शंकराचार्य जगतगुरु निश्चलानंद सरस्वती ने संबोधित किया। संगोष्ठी में उन्होंने विद्यार्थियों की जिज्ञासा शांत किया और उनके सवालों के जवाब भी दिए। इस दौरान स्वामी निश्चलानंद महाराज से 12वीं की छात्रा ने पूछा कि धर्म, ज्ञान के अलावा आपने गणित की किताबें भी लिखी हैं। गणित के बारे में जीवन का क्या संबंध है? स्वामी ने कहा कि गणित खाना खाने, बोलने, सुनने, चलने, सोने हमारे जीवन के हर एक पग पर गणित का संबंध है। उन्होंने कहा कि स्वस्तिक गणित पुस्तक की रचना की, जिसके वैदिक गणितीय सिद्धांतों को वर्तमान में 200 देश मान रहे हैं। वहां कंप्यूटर से लेकर मोबाइल फोन ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए आधुनिक आविष्कारों में भी इन्हीं सिद्धांतों का प्रयोग किया जा रहा है।

स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि सबको मालूम है कि भारत का शासन तंत्र किस धर्म का है, लेकिन मैं किसी धर्म का नहीं हूं, इसलिए मेरे ज्ञान-विज्ञान का लोक इनको नहीं है। भारत की मेधा शक्ति शासन तंत्र द्वारा कुचल दी गई है। मेरी मेधा शक्ति किसी शासन द्वारा प्रदत्त नहीं है। इसलिए मेरी मेघा शक्ति नहीं जा सकती है। भारत में वो क्षमता नहीं है कि वे अपनी मेधाशक्ति, रक्षाशक्ति, वाणीशाक्ति सभी शक्ति का राष्ट्रहित के उत्कर्ष में उपयोग कर सकते हैं। हां एक इशारा जरूर करुंगा कि आरएसएस द्वारा संचालित सरस्वती विद्या मंदिर के पूरे देश के गणित के शिक्षक तीन दिनों तक हमारे मंदिर में आकर गणित का प्रशिक्षण लिए। इस अवसर पर पीठ परिषद के उपाध्यक्ष पंडित झम्मन शास्त्री, बिलासपुर विधायक शैलेश पांडे ,आनंद वाहिनी की राष्ट्रीय महामंत्री सीमा तिवारी, राष्ट्र उत्कर्ष समिति के संयोजक डॉ. प्रफुल्ल शर्मा, डॉ. विवेक बाजपेई, कार्यक्रम प्रभारी संदीप पांडे, आदित्य वाहिनी के संभागीय प्रभारी चंद्रचूड़ त्रिपाठी, पीठ परिषद के संभागीय प्रभारी चेतन धर दीवान, आदित्य वाहिनी के जिला अध्यक्ष अभिषेक पांडे, आनंद वाहिनी की गीता तिवारी, पूर्णिमा दुबे, अंजू मिश्रा, प्रभा दुबे, इंदिरा शर्मा, कुंती पाण्डेय, लक्ष्मी पाण्डेय, सेंट जेवियर्स विद्यालय के चेयरमैन जीएस पटनायक, प्राचार्य प्रवीण कुमार चतुर्वेदी, सी मुकेश सराफ, असिस्टेंट डायरेक्टर अच्युतानंद सामंतराय, पीवी मिस्त्री सहित स्कूल के छात्र उपस्थित रहे।

ईष्ट देव की आराधना 24 घंटे में 5 बार 15-15 मिनट करें

छात्र के प्रश्न आज के वातावरण में ईश्वर आराधना कैसे की जाए? शंकराचार्य ने कहा कि ईश्वर संसार के हर कण-कण में हैं। मानव कभी भी और कहीं भी किसी भी रूप में उनकी आराधना कर सकता है। संसार में जितने भी विज्ञान हैं वह वेदों के द्वारा ही प्राप्त हुए हैं। अर्थ शास्त्र, मोक्ष शास्त्र, चिकित्सा विज्ञान ,धर्मशास्त्र ,काम शास्त्र राजनीति विज्ञान, नीति शास्त्र, वास्तु विज्ञान, दशमलव सहित अनेक शास्त्र और विज्ञान वेदों की ही देन है। उन्होंने विद्यार्थियों को गुरु मंत्र देते हुए कहा कि विद्यार्थी जिसे अपना इष्ट देव मानते हैं उनकी आराधना के लिए 24 घंटे में 15-15 मिनट 5 बार उनका स्मरण करें। इससे विद्यार्थियों की मेधा शक्ति और तेज होती है। विद्यार्थी सरस्वती व भगवान गणेश को हमेशा पूजते रहे।

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