मीटर शिफ्टिंग घोटाले में फंसे अधिकारियों को पदोन्नति व ग्रेच्युटी देने शुरू हुई जांच

Bilaspur News - बिजली विभाग के बहुचर्चित मीटर शिफ्टिंग घोटाले की जांच अचानक पांच साल बाद फिर शुरू हो गई है। वैसे तो विधानसभा के...

Dec 09, 2019, 07:52 AM IST
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बिजली विभाग के बहुचर्चित मीटर शिफ्टिंग घोटाले की जांच अचानक पांच साल बाद फिर शुरू हो गई है। वैसे तो विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इसका मुद्दा उठने के बाद जांच होना बताया जा रहा है। पर बड़ी वजह इस मामले में फंसे बिलासपुर क्षेत्र के 19 तो राज्य के 64 अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति व इनमें से ही कुछ रिटायर हो चुके अधिकारियों की ग्रेच्यूटी सहित अन्य भुगतान अटकना है। 2014-15 में 98,915 कनेक्शनों के मीटर शिफ्ट किए गए। इसमें बड़ा घोटाला सामने आया। आठ कंपनियों के साथ ही अधिकारियों-कर्मचारियों पर 8 करोड़ रुपए भुगतान करने के आराेप लगे। 8 फर्मों के खिलाफ एफआईआर और कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया था। क्षेत्रीय कार्यालय तिफरा के बंद कमरे में उनसे पूछताछ की जा रही है। इस जांच बारे में एक अफसर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अधिकारियों से बिल ज्यादा बनाए जाने का कारण पूछा जा रहा है। यह उनकी पदोन्नति के लिए रास्ता साफ करने के क्रम की प्रक्रिया है। इस मामले में फंसे कुछ अधिकारी निलंबन के दौरान ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी ग्रेच्युटी, लीव इन कैश और जीपीएफ अटका है। कार्यपालक निदेशक भीम सिंह कंवर ने बताया कि पुराने मीटर शिफ्टिंग मामले की व्यक्तिगत जांच की जा रही है। उस मामले में वे नहीं हैं, दूसरे अधिकारी की नियुक्ति की गई है।

इसी कमरे के अंदर चल रही जांच

जानिए कैसे हुआ मीटर शिफ्टिंग घोटाला

एस्टीमेट बना, वर्क ऑर्डर हुआ, मीटर शिफ्टिंग का काम करते हुए ठेकेदारों ने पहले विश्वास जीता। इसमें कम काम करके ज्यादा का भुगतान ले लिया। जांच में ठेकेदारों ने गलती मानी और आगे सुधार करने की बात कही। मीटर शिफ्ट जिन जगहों पर हुआ, उसकी जांच करने पर पता चला कि घरों के बाहर मीटर लगाया ही नहीं गया। कई जगहों पर काम 50 प्रतिशत किया पर पूरा भुगतान करवा लिया गया। ठेकेदारों ने अधिकारियों के आईडी का उपयोग करके फर्जी बिल पास करवा लिए।

ऐसे हुआ था घोटाले का खुलासा : अधीक्षण यंत्री राम अवतार पाठक ने ठेकेदारों को जेल भिजवाने की बात कही थी। उनके ऊपर 25 अगस्त 2014 को रेलवे स्टेशन में हमला हुआ। आरोपियों ने ठेका कंपनी मेसर्स विधानी का नाम लिया। ठेका कंपनी द्वारा किए गए राज्य भर में कामों की जांच हुई तो मीटर शिफ्टिंग घोटाले का खुलासा हुआ।

इन ठेकेदारों के खिलाफ हुई थी एफआईआर

मीटर शिफ्टिंग घोटाले में 14 ठेका कंपनी का नाम सामने आया। जांच के बाद आठ ठेका फर्म मेसर्स विधानी इंफ्राटेक, मेसर्स विजय कुमार अचंतानी, मेसर्स राघवेंद्र जायसवाल, पंकज कुमार केला, अमित कुमार जायसवाल, संजय नायडू, मेसर्स सुनील खड़से, मेसर्स सहारा दास के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराया गया है। साथ ही बिजली विभाग के विभिन्न विभागों को पत्र लिखकर इनके सभी बिल का भुगतान रोकने कहा गया है।

ये कर रहे मामले की जांच, बोलने से बच रहे

क्षेत्रीय कार्यालय में पदस्थ एसीई एपी सिंह मुंगेली, एके अंबष्ट चांपा, एके श्रीवास्तव बिलासपुर ओएंडएम व बिलासपुर सिटी, कोरबा डिवीजन के मामले की जांच पीएल सिदार, रंजीत कुमार अधीक्षण यंत्री कोरबा कर रहे हैं। ये इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

बिजली चोरी रोकना था खुद किया चोरों जैसा काम

बिजली चोरी और समय पर बिलिंग नहीं होने के कारण घर के भीतर लगे मीटरों को घर से बाहर किया जाना था पर ठेकेदारों ने मीटर को बिना घर से बाहर किए ही भुगतान प्राप्त कर लिया।

इन पर तब कार्रवाई हुई

फर्जी बिल पास करने पर सीनियर अकाउंटेंट केसी खांडे व अकाउंटेंट महेश श्रीवास को निलंबित किया गया। प्रभात कुमार शर्मा से वसूली और उनका दो इंक्रीमेंट रोका गया था। जेएल यादव को सस्पेंड करके उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। जेई रामपुरी का इंक्रीमेंट रोका गया।

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