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जीवदया: मवेशी पकड़ने टीम को एक महीने में 335 कॉल पहुंचे, ज्यादातर पशु मिले जख्मी, कुछ का मौके पर इलाज, 45 घायलों को लाना पड़ा मोपका गौशाला

Bilaspur News - मोपका के गौशाला में गौ मातृ सेवा सोसायटी इन दिनों 75 आवारा मवेशियों की देखभाल कर रही है। एक माह के भीतर 45 घायल गाय,...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 06:46 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news jeevayaaya 335 calls to the cattle catching team in a month most of the animals were found injured treatment on some occasions 45 injured mokka gaushala
मोपका के गौशाला में गौ मातृ सेवा सोसायटी इन दिनों 75 आवारा मवेशियों की देखभाल कर रही है। एक माह के भीतर 45 घायल गाय, बैलों का यहां इलाज कराया जा चुका है। अभी भी 5 का इलाज कराया जा रहा है। इनकी देखरेख के लिए डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं।

चारा पानी की व्यवस्था भी संस्था कर रही है। शहर में आवारा मवेशियों से लोगों से आए दिन कोई न कोई हादसा हो रहा था। इसी तरह सड़क पर होने के कारण वाहनों से दुर्घटनाओं के शिकार भी हो रहे थे। पिछले एक माह से गौ मातृ सेवा सोसायटी ने ऐसे मवेशियों की देखभाल करने का बीड़ा उठाया है। संस्था के सदस्य दिनभर शहर में घूम- घूम कर नगर निगम की गाड़ी में आवारा मवेशियों को पकड़ते हैं और उन्हें भरकर मोपका के गौशाला ले जाते हैं। यहां उन्हें खाने के लिए चारा व खली दी जाती है। घायलों का इलाज पशु चिकित्सक करते हैं। सड़क पर अक्सर आवारा मवेशी गाड़ियों से टकराकर घायल हो जाते हैं। कुछ ऐसे भी होते हैंं जो दूसरों पर हमला भी कर देते हैं। सोसायटी ने इसके लिए अपना हेल्प लाइन नंबर जारी किया है। शहर में यदि कहीं भी आवारा या घायल मवेशी नजर आए तो उनके नंबर पर फोन कर जानकारी दे सकते हैं। सोसायटी की अध्यक्ष ऋचा पांडेय के अनुसार उनकी टीम रोज 8 से 10 दुर्घटनाग्रस्त गौ वंश की रक्षा कर रही है। जारी हेल्पलाइन नंबर 9201311000 में हर रोज 20 से 30 शिकायत आ रही हैं। एक माह में उनके पास 335 काल आ चुके हैं। अध्यक्ष का कहना है कि शहर में कहीं भी गाय या आवारा मवेशी घूम रहे रहे हो उसकी सूचना तत्काल दें जिससे समय पर उनका इलाज व देखभाल कर सकें। समिति ने रात्रि गश्त सेना का गठन किया है।

घायल मवेशी की सेवा।

11 छात्रों का ऐसा समूह जो पढ़ाई के साथ-साथ कर रहे जीव सेवा

बिलासपुर | शहर के 11 छात्रों का एक ऐसा समूह है, जो पढ़ाई के साथ-साथ जीवों की सेवा करने में लगा है। छात्रों ने अपने ग्रुप का नाम भी जीव ही रखा है। ये छात्र अपनी पॉकेटमनी से पैसा बचाकर सड़क पर घायल गाय, कुत्ते सहित अन्य जानवरों का इलाज करा रहे हैं और उनके सुरक्षित रखने व खान-पान का खर्च उठा रहे हैं। जीव संस्था के फाउंडर प्रणव विश्वकर्मा ने बताया कि सड़क पर घायल गाय को देखकर बहुत ही दुख हुआ। इसके बाद हम दोस्तों ने इनके लिए कार्य करने का बीड़ा उठाया। अपनी टीम का नाम जीव रखा। हमें कहीं भी गाय, कुत्ता और कोई भी जीव घायल दिखता है तो उसका इलाज करवाते हैं। हमें कोई फोन भी करता है तो हम वहां तुरंत जाकर मदद करते हैं। अभी तक 2 कुत्तों का इलाज कराया है। वहीं तीन घायल गाय का इलाज कराकर तोरवा कांजी हाउस में रखा है। वहां इन तीन गायों के खान-पान के लिए 15 हजार रुपए महीना देते हैं। इसमें हमारा साथ दीपक अग्रवाल, जैकी गुप्ता, पीयूष गाेयल, तुषार अग्रवाल, किंशुक शर्मा करते हैं। वहीं गर्मी के समय सभी जीवों के लिए पानी के पाट रखवा रहे हैं।

मवेशियों की देखभाल के लिए रात्रि गश्त सेना का भी गठन

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