किरारी में शिक्षा की ज्योति: गहने बेचे, कर्ज लिया और जर्जर सरकारी स्कूल को बनाया स्मार्ट
गांव के गरीब बच्चों का सरकारी स्कूल, जर्जर भवन, बैठने के लिए टाटपट्टी तक नहीं। किसी बच्चे ने शिक्षिका से पूछ लिया- मैडम हम कब टेबल कुर्सी पर बैठेंगे। शिक्षिका ने उस वक्त कुछ नहीं कहा पर उनकी आंखें भर आईं। ठान लिया कि वे इन बच्चों के ख्वाब को हकीकत में बदलेगी। इसके लिए उन्होंने अपने जेवर बेचे, कर्ज लिया और स्कूल की मरम्मत शुरू कराई। इसे अपने हाथों से सजाया। टेबल- कुर्सी मंगवाई। निजी स्कूल के मुकाबले खड़े करने के लिए खूब मेहनत की। आज यह जिले का सबसे सुंदर और स्मार्ट स्कूल बन गया है। बिलासपुर शिवरीनारायण मार्ग पर जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर मस्तूरी किरारी गांव है। यहां पर प्राइमरी स्कूल है। 2014 में शिक्षिका ज्योति पांडेय आई। तब भवन पूरा जर्जर था। 1975 से संचालित प्राइमरी स्कूल दुर्दशा से जूझ रहा था। बच्चे बरामदे में जमीन पर बैठते थे। छत भी जर्जर थी। हमेशा गिरने का भय रहता था। दीवारों पर दरारें थीं। दरवाजे, खिड़कियां सब टूटे। बिजली भी नहीं थी। स्कूल के आसपास इतनी गंदगी थी कि दिन में बिच्छू निकलते। 2019 में ज्योति पांडेय को स्कूल का प्रभार मिला। उन्होंने सबसे पहले बिजली कनेक्शन सुधरवाया। बच्चों को अंधेरे से राहत दिलवाई। इसके बाद मरम्मत शुरू करवाया। इस बीच उन्होंने विभाग व जन प्रतिनिधियों से मदद मांगी पर किसी ने सहयोग नहीं किया। एक दिन एक बच्चे ने आकर पूछा-मैडम हम लोग जमीन पर बैठ रहे हैं। हमें टेबल-कुर्सी कब मिलेगी। मैडम के मन में यह बात बैठ गई। उन्होंने बच्चे के ख्वाब को पूरा करने की ठान ली। उन्होंने जेवर बेचकर जर्जर स्कूल को सुधरवाया। सोने के दो हार, कंगन,अंगूठी, चेन और बाली बेच दी। इसके बाद कमरों की छत की ढलाई व दीवारों में प्लास्टर करवाए। दरवाजे, पंखे और खिड़कियां लगवाईं। कच्ची जमीन पर फर्श करवाया। बरगद के पेड़ पर चबूतरा बनवाया। एक कक्षा को स्मार्ट बनवाया। उसमें प्रोजेक्टर, साउंड सिस्टम, पर्दा, फर्नीचर और टेबल-कुर्सी की व्यवस्था कराई। बच्चों के लिए टेबल-कुर्सी लगवाई। उधार में पैसे लेकर पेटिंग कराई और स्कूल को निजी स्कूलों से भी सुंदर बना दिया।
ममता मेरे स्वभाव में, अभी कुछ काम बचा है जिसे पूरा करना है- ज्योति
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ज्योति पांडेय ने बताया कि जब स्कूल में काम चलता था तो रात आठ बजे वह घर जाती थीं। हर कक्षा के बच्चों को एक घंटे स्मार्ट क्लास में पढ़ा रहे हैं। बच्चों के बैठने के लिए टेबल-कुर्सी की व्यवस्था कर दी गई है। ज्योति ने कहा ममता मेरा स्वभाव है। गरीब बच्चे निजी स्कूल देखकर पूछते थे मैंडम हम टेबल-कुर्सी पर बैठकर कब पढ़ाई करेंगे? मैं उस रात सोई नहीं। बस संकल्प लिया और काम में जुट गई। मेरे पति शंभू प्रसाद पांडेय हेड कांस्टेबल हैं। उन्होंने मेरी हिम्मत टूटने नहीं दी। हमेशा साथ दिया।