लाॅयन शावक गुना के पेट में फंसी हड्डी, इलाज से बची जान

Bilaspur News - कानन पेंडारी चिड़ियाघर के लाॅयन वासु और वसुधा के शावक गुना को रायपुर और चेन्नई के डॉक्टरों ने नया जीवन दिया है।...

Dec 09, 2019, 07:52 AM IST
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कानन पेंडारी चिड़ियाघर के लाॅयन वासु और वसुधा के शावक गुना को रायपुर और चेन्नई के डॉक्टरों ने नया जीवन दिया है। पांच डॉक्टरों की टीम के 14 दिनों तक बेहतर इलाज की बदौलत आज गुना जिंदा है। 25 नवंबर को अचानक डेढ़ साल के शावक की तबियत बिगड़ गई। नवा रायपुर के जंगल सफारी के डॉक्टरों ने इलाज करना शुरू किया लेकिन गुना को आराम नहीं मिला। गुना के पेट में हड्डी फंस गई थी। इसके कारण वह खाना नहीं खा पा रहा था।

जंगल सफारी के डॉक्टरों ने काफी कोशिश की लेकिन गुना के मर्ज को पकड़ नहीं पाए। 2, 3 दिन तक डॉक्टरों ने उसका इलाज किया लेकिन आराम नहीं मिला। चेन्नई के डॉक्टर की सलाह के बाद गुना को अंजोरा वेटनरी इंस्टीट्यूट दुर्ग लाया गया। यहां एक्सरे और रेडियोलॉजी कराई गई। एक्सरे में पता चला कि गुना के पेट में हड्डी फंसी है। इसी तकलीफ के कारण उसने खाना पीना छोड़ दिया था। हड्डी निकालने के लिए डॉक्टरों ने सर्जरी करना उचित समझा लेकिन चेन्नई के डॉक्टर मनोहर ने उन्हें बताया कि सर्जरी करने के बाद वह अपने पंजों से शरीर को नोचेगा और उसकी जान भी जा सकती है। डॉक्टर मनोहर ने बताया कि (रेप्टोप्रोक प्लोनो स्कोपी) गुदा द्वार का परीक्षण करे। इसके लिए प्लोनोस्कोपी मशीन की जरूरत होती है। चिड़ियाघर के डॉक्टरों ने रामकृष्ण हॉस्पिटल के डॉक्टर निहाल से संपर्क किया और मशीन मंगाकर जांच की। 14 दिनों की इलाज के बाद गुना जिंदगी की जंग जीत गया। जानकारों ने बताया कि गुना अभी पूरी तरीके से ठीक नहीं है लेकिन खतरे से बाहर है अब वह डेढ़ किलो तक गोश्त खाने लगा है और सूप भी पी रहा है। उसकी देखरेख के लिए 10 लोगों की ड्यूटी लगाई गई है।

लायॅन शावक अब खाना खाने लगा है।

3 जनवरी 2018 को वासु और वसुधा भेजे गए थे जंगल सफारी

बता दें कि लॉयन वासु और वसुधा का जन्म कानन पेंडारी चिड़ियाघर में हुआ था। 18 मार्च 2014 को दोनों पैदा हुए थे। ये पृथ्वी और वसुंधरा की संतान हैं। एनिमल एक्सचेंज के तहत वासु और वसुधा को 3 जनवरी 2018 को नया रायपुर के जंगल सफारी भेजा गया था। इसके बदले में नया रायपुर जंगल सफारी ने कानन पेंडारी को चौसिंगा दिया था। ठीक 6 महीने बाद वसुधा ने जून 2018 को गुना को जन्म दिया था।

इन डॉक्टरों ने किया गुना का इलाज

चेन्नई के डॉ. मनोहरन, रामाकृष्ण हॉस्पिटल के डॉ. निहाल, जंगल सफारी के पूर्व डॉ. पीके चंदन, डॉ. रस्मी लता, डॉ. भूमिका ने 14 दिनों तक गुना का बेहतर इलाज किया और उसे नई जिंदगी दे दी।

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