दूसरी जाति के युवक से ब्याह रचाया तो दस साल बाद समाज ने दी बहिष्कार की सजा
सिरगिट्टी के नगपुरा में रहने वाले एक परिवार को पिछले एक साल से सामाजिक बहिष्कार का दंश झेलना पड़ रहा है। उनकी गलती सिर्फ इतनी है कि परिवार की एक बेटी ने दूसरी जाति के लड़के से प्रेम विवाह कर लिया। और यह भी दस साल पहले की बात बताई है। फिर भी समाज वालों ने इस परिवार को यह कहकर उन्हें ठुकरा दिया है कि वे उनकी सोसाइटी में रहने योग्य नहीं है। यही वजह है कि पीड़िता की बहन ने अपनी दर्द भरी कहानी बताकर मानवाधिकार आयोग को चिट्ठी लिखी है। मामले में मानवाधिकार आयोग ने अफसरों से जवाब-तलब किया है। अभी आयोग को जवाब नहीं भेजा गया है।
10 मई 2019 को आयोग के अधिकारियों को चिट्ठी लिखकर पीड़िता की बहन ने बताया है कि जब विवाह हुआ तब किसी को कोई आपत्ति नहीं थी। सभी अपने-अपने काम में व्यस्त रहे। उस समय किसी ने इसे कोई मुद्दा नहीं बनाया। और अब जब सबकुछ ठीक चल रहा था। तब अचानक समाज के लोगों ने इस बात पर आपत्ति उठानी शुरू कर दी। बहन ने जो किया है उसकी सजा पूरे परिवार को झेलनी पड़ रही है। पीड़िता ने परिवार की पूरी सूची के साथ आयोग के समक्ष अपनी बात रखी है। उसने यह भी बताया कि स्थानीय अधिकारियों ने उसकी बातों पर सुनवाई नहीं की। जिसके कारण उन्हें आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा। और आज उसी का नतीजा है कि वे पिछले कोई सालभर से सामाजिक बहिष्कार की पीड़ा को झेल रहे हैं। परिवार को यह समझ नहीं आ रहा कि वे कहां जाएं और क्या करें? इसलिए ही उन्होेंने अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। आयोग की ओर से कलेक्टर को पत्राचार कर दिया गया है। मामले में कार्रवाई की सूचना देने की बात लिखी गई है। अभी अफसरों ने इस मामले में कितनी तस्दीक की है। इसकी जानकारी से कलेक्टर को अवगत नहीं करवाया गया है। किसी को मामले को पता भी नहीं है।
मानवाधिकार की प्रशासन को पहुंची चिट्ठी।
23 नवंबर को प्रशासन को पहुंचा पत्र, पूछा- मामले में क्या किया? जवाब नहीं भेजा
मानवाधिकार आयोग ने स्थानीय प्रशासन को इस मामले में दो बार नोटिस भेजा है। पहला नोटिस 4 जून 2019 को भेजा गया है। और दूसरा नोटिस 23 नवंबर 2019 को। फिर भी अभी तक मामले में क्या कार्रवाई हुई है। इससे अधिकारियों ने आयोग के अफसरों को जवाब नहीं भेजा है। आयोग के अधिकारियों ने विशेष रूप से कलेक्टर को मामले में ध्यान देने की बात लिखते हुए उन्हें या उनके सक्षम अधिकारियों को दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने की बात लिखी गई है। अभी यहां से कोई भी आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले की जानकारी तक से जिम्मेदार अधिकारी इनकार कर रहे हैँ। यही कारण है कि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल पाया है।
मेरे पास ऐसा कोई मामला नहीं आया है
अखिलेश साहू, एसडीएम, बिल्हा
प्रशासनिक अफसर सुलझाते हैं प्रकरण
शांता कुमार, टीआई सिरगिट्टी थाना