मिलें और खरीदी नहीं, इसलिए नहीं उगाते बासमती

Bilaspur News - राज्य सरकार किसानों का धान 2500 रुपए क्विंटल के समर्थन मूल्य पर खरीद रही है। यह जानकर आश्चर्य होगा कि छत्तीसगढ़ में...

Oct 13, 2019, 07:15 AM IST
राज्य सरकार किसानों का धान 2500 रुपए क्विंटल के समर्थन मूल्य पर खरीद रही है। यह जानकर आश्चर्य होगा कि छत्तीसगढ़ में ऐसा धान भी होता है जो 4000-4500 रुपए क्विंटल बिकता है। इस धान की वैरायटी 1121 बासमती है। यह प्रदेश के सभी इलाकों में बोया जा सकता है, लेकिन कवर्धा व मुंगेली जिले के कुछ खेतों तक सिमट कर रह गया है। धान की इस किस्म पर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।

यह धान किसान क्यों नहीं लगाते इसे लेकर जब भास्कर ने फील्ड में पड़ताल की तो बेहद चौंकाने वाली बातें सामने आई। बताते हैं कि इसकी न लोकल खरीदी होती है और न ही मिलिंग होती है। कुछ साल पहले तक कवर्धा-बेमेतरा जिलों में में करीब चार हजार एकड़ में लगाया जाता था। इसे क्यों बंद कर दिया पूछने पर किसान बताते हैं कि इस धान को किसान हरियाणा-दिल्ली से यहां आने वाले ट्रकों में कुरुक्षेत्र व दिल्ली की नरेला मंडियों में ले जाते थे। वहां इसे चार से साढ़े हजार रुपए तक प्रति क्विंटल तक बेचते थे। हरियाणा में सरकार बदली तो इसके रेट गिरा दिए गए। इससे किसानों को नुकसान होने लगा। खेती भी बंद हो गई। मुंगेली में संजय वैष्णव कवर्धा के भरेवा पुरन में प्रदीप चंद्राकर व कोठार में राजेंद्र चंद्राकर इस किस्म को जिंदा रखे हुए हैं।

छत्तीसगढ़ में क्यों खरीदी नहीं? : वैरायटी 1121 का दाना लंबा होता है। महंगी वैरायटी की वजह से इसे लागत से भी कम मूल्य पर नहीं बेचा जा सकता। कांग्रेस सरकार आने पर धान की खरीदी 2500 रुपए प्रति क्विंटल पर हो रही है। इस कीमत बेचने पर भी किसानों को लाभ नहीं होगा। इस धान की किस्म को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कृषि कर्मण का राष्ट्रीय पुरस्कार अपनी झोली में डालने वाले प्रभात चंद्राकर का दावा है कि अगर सरकार मदद करे तो पहली खेप में करीब दस हजार एकड़ में इसकी खेती करने को किसान तैयार हैं।

मिल नहीं इसलिए उत्पादन नहीं : इतनी कीमती वैरायटी को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार को ध्यान नहीं है। कृषि विवि ने भी इसे बढ़ावा देने की कोशिश नहीं की। किसान इसे क्यों नहीं उपजाते इसे लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। उनका कहना है कि इस किस्म के धान के लायक छत्तीसगढ़ में एक भी मिल नहीं है। यह लंबी किस्म की वैरायटी है। इसके दाने लंबे होते हैं। वर्तमान मिलों में इसका चावल दो-तीन टुकड़े हो जाता है।

एक विकल्प यह भी

सरकार समर्थन मूल्य पर जितना धान खरीदती है, उससे करीब डेढ़ गुना धान का वे उत्पादन करते हैं। बाकी धान मंडियों में जाकर बेचते हैं। यदि सरकार वैरायटी 1121 की मिलें लगा देती हैं तो वे रेगुलर धान (आईअआर-36, 1110, महामाया) का रकबा कुछ कम कर बचे खेत में धान 1121 लगा देंगे। फिर इसे हम सरकार को बेचें या मंडियों में कीमत अच्छी मिलेगी। कांट्रेक्ट फार्मिंग से शुरुआत की जा सकती है।



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