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आधुनिकता का अर्थ यह नहीं है कि हम अपनी मर्यादा, संस्कृति को भूल जाएं: स्वाति

एक वर्ष पहले
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वर्तमान आधुनिक समय में महिलाएं हर क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। 21वीं सदी में भौतिक विकास अपने चरम पर है। विज्ञान के विकास ने हर प्रकार की बाह्य दूरियों को समाप्त कर दिया है, परंतु विकास की इस आंधी में व्यक्तिगत, पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन में तनाव एवं कष्ट बढ़ा दिए हंै। आज सभी आधुनिक होना चाहते हैं। आधुनिक होना अर्थात समय की मांग के अनुसार कदम मिलाकर चलना तो है, परंतु आधुनिकता का अर्थ यह नहीं है कि हम अपनी मर्यादा, संस्कृति को भूल जाएं। उक्त बातें रीयल लाइफ कंपनी द्वारा महिला सशक्तिकरण पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बीके स्वाति दीदी ने कहीं।

दीदी ने कहा कि प्राचीन काल से समाज में महिलाओं को विशेष दर्जा व सम्मान मिलता रहा है। इसलिए जब देवी-देवताओं का भी नाम लेते समय उमा पति महादेव, सिया पति रामचंद्र के नाम से परिचय दिया जाता है। हमेशा माता-पिता ही कहा जाता है, क्योंकि माता ही हमारी पहली गुरु है। भारत की सभी नदियों एवं फूलों के नाम भी नारी के नाम पर ही हैं, क्योंकि नारी में नदी की तरह विशालता और फूलों की तरह सबको सुख देने का गुण होता है। परंतु जिस प्रकार नदी अपनी मर्यादा में बहती है तो सर्व की जीवनदायिनी और पूज्यनीय होती है। पर उस मर्यादा से बाहर जाने पर वह बाढ़ का रूप धारण कर जगत के संहार का कारण भी बन जाती है। उसी प्रकार आधुनिक विकास नारी के विकास और प्रगति में सहयोग करे न की उसे और पूरे समाज को पतन की ओर ले जाएं। वर्तमान भौतिकवादी युग में आध्यात्मिकता का समावेश आवश्यक है। आध्यात्मिकता अर्थात स्वयं के सत्य स्वरूप को पहचानना। हमारे अंदर अनुपम शक्तियां समाई हुई हैं, परंतु हम उस शक्ति से अनभिज्ञ हैं।

पूर्व या भविष्य के बारे में सोचना ही हमें डिस्टर्ब करता है


उन्होंने कहा कि हमारी भागम-भाग की दिनचर्या और वातावरण का प्रभाव हमें व्यर्थ या नेगेटिविटी की तरफ ले जाता है। कोई भी कार्य प्रारंभ करने के पहले ही अनेक व्यर्थ या नकारात्मक विचार आने लगते है कि सफलता मिलेगी या नहीं, यह कार्य होगा या नहीं, ऐसे विचार हमारी सफलता के लिए बैरियर का कार्य करते है। व्यक्ति 80 प्रतिशत पास्ट के बारे में और 15 प्रतिशत भविष्य के बारे में सोचता है। पास्ट या भविष्य के बारे में सोचना दोनों ही ऐसी सोच है, जिसमें हमारा कोई कंट्रोल नहीं है। जिससे और ही मन डिस्टर्ब हो जाता है। जितना महत्व गले में सोने की चेन का है, उससे अधिक महत्व चेन से सोने का है। इसलिए प्रतियोगिता की अंधी दौड़ में हमें अपने सुख, शांति, प्रेम को नहीं गवां देना है।

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