• Hindi News
  • Chhattisgarh
  • Bilaspur
  • Bilaspur News chhattisgarh news not a judge in the state industrial court for a month this situation was created for the first time in the state

माहभर से राज्य औद्योगिक न्यायालय में जज नहीं, प्रदेश में पहली बार बनी ऐसी स्थिति

Bilaspur News - मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के न्यायिक इतिहास में पहली बार ऐसी संवैधानिक स्थिति आयी है। प्रदेश के राज्य औद्योगिक...

Bhaskar News Network

Aug 15, 2019, 09:30 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news not a judge in the state industrial court for a month this situation was created for the first time in the state
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के न्यायिक इतिहास में पहली बार ऐसी संवैधानिक स्थिति आयी है। प्रदेश के राज्य औद्योगिक न्यायालय में न तो अध्यक्ष है और न ही सदस्य जज। यानी राज्य में औद्योगिक न्यायालय में 14 जुलाई से कोई भी जज नहीं है। इस वजह से लेबर कोर्ट में फैसलों के पश्चात औद्योगिक न्यायालय से स्टे लेने व अपील करने का अवसर लोगों को नहीं मिल रहा है।

मालूम हो कि श्रम न्यायालयों में सजा के बाद राज्य औद्योगिक न्यायालय में ही सुनवाई हो सकती है। औद्योगिक न्यायालय के अध्यक्ष टीके चक्रवर्ती इसी 14 जुलाई को सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद से किसी चेयरमेन जज की नियुक्ति नहीं हो सकी है। इसमें दो सदस्य जजों का भी प्रावधान है। ये दोनों पद भी पहले से ही रिक्त हैं। सदस्य जज अशोक शर्मा 31 जनवरी 2019 को रिटायर हो चुके हैं। जबकि दूसरे सदस्य जज की प्रारंभ से नियुक्ति ही नहीं की गई। छत्तीसगढ़ श्रम न्यायिक सेवा भरती तथा सेवा की शर्तें नियम 2015 के अनुसार राज्य औद्योगिक न्यायालय के अध्यक्ष की नियुक्ति शासन द्वारा उच्च न्यायालय की अनुशंसा पर की जाती है।

राज्य में राज्य औद्योगिक न्यायालय की मुख्य पीठ रायपुर में है। यहां अध्यक्ष व एक सदस्य जज का पद है। जबकि बिलासपुर में औद्योगिक न्यायालय की खंडपीठ है। यहां एक सदस्य जज का पद है। सदस्य जज शर्मा रायपुर से बिलासपुर आकर मामलों की सुनवाई करते थे। यहां भी मामले अटके हैं। मालूम हो कि किसी भी तरह की हड़ताल की संवैधानिकता को जानने के लिए शासन औद्योगिक न्यायालय से ही राय लेता है।

शासन ने भेजा है प्रस्ताव

मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार राज्य शासन ने औद्योगिक न्यायालय में जजों की नियुक्त का प्रस्ताव हाईकोर्ट को भेजा है। बताते हैं कि इस पर जल्द अनुशंसा होते ही अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति होने की संभावना है। अध्यक्ष की नियुक्ति हाईकोर्ट की अनुशंसा पर राज्य सरकार करती है। जबकि सदस्यों की नियुक्ति हाईकोर्ट ही करता है।

अजीब सी स्थिति - व्यास

छत्तीसगढ़ राज्य बार कौंसिल के सदस्य व श्रम मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता रामनारायण व्यास के अनुसार यह एक अजीब सी व आश्चर्यजनक स्थिति है। नियम 2015 बनाकर श्रम न्यायपालिका को श्रम मंत्रालय से हटाकर उच्च न्यायालय के अधीन करने पश्चात श्रम और औद्योगिक न्यायालयों में सभी जजों की नियुक्ति, पदस्थापना व स्थानांतरण उच्च न्यायालय द्वारा ही किया जाता है।

ये बन सकते हैं अध्यक्ष व सदस्य

एडीजे स्तर के जज या उच्च न्यायिक सेवा से जुड़े किसी व्यक्ति की नियुक्त की जा सकती है। अगर श्रम न्यायालय के किसी किसी जज को योग्य समझा जाता है तो उसे प्रमोशन देकर उसके नाम की अनुशंसा की जा सकती है। पीएस स्तर के न्यायिक सेवा से जुड़े भी जज बन सकते हैं।

14 जुलाई से न जज हैं न सदस्य स्टे व अपील के मामले अटके

X
Bilaspur News - chhattisgarh news not a judge in the state industrial court for a month this situation was created for the first time in the state
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना