पंचायत राज अधिनियम: कलेक्टर के आदेश के विरुद्ध याचिका या कमिश्नर के पास पुनरीक्षण?

Bilaspur News - पंचायत राज अधिनियम के नियम 4 के तहत कलेक्टर के आदेश काे अंतिम मानते हुए सीधे हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की जा...

Bhaskar News Network

Aug 15, 2019, 09:30 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news panchayat raj act petition against order of collector or revision with commissioner
पंचायत राज अधिनियम के नियम 4 के तहत कलेक्टर के आदेश काे अंतिम मानते हुए सीधे हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की जा सकती है या कमिश्नर के पास अपील करनी होगी? रिट पिटीशन सिविल पर इस बिंदु पर सुनवाई करने के बाद चीफ जस्टिस सहित तीन जजों की फुल बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा है। गांव की सरपंच ने अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उसे पद से हटाने के खिलाफ कलेक्टर के समक्ष अपील की थी। कलेक्टर ने इसे निरस्त कर दिया, इसके बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। सिंगल बेंच ने पंचायत राज अधिनियम के तहत इस बिंदु पर निर्णय के लिए याचिका को फुल बेंच में रेफर कर दिया था। महासमुंद जिले के बागबाहरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बिराजपाली की महिला सरपंच हेमलता साहू के विरुद्ध वहां के पंचों ने अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। कलेक्टर ने 8 फरवरी 2019 को जारी आदेश के तहत नायब तहसीलदार गगन शर्मा को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया, लेकिन 18 फरवरी 2019 को अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शर्मा की जगह राम खिलावन वर्मा ने पूरी कराई। कार्रवाई के खिलाफ हेमलता साहू ने कलेक्टर महासमुंद के समक्ष अपील की, लेकिन यह निरस्त कर दी गई। इसके बाद उन्होंने एडवोकेट सरफराज खान के जरिए हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की। मामले पर 17 जुलाई 2019 को सिंगल बेंच में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि सुखनंदन पटेल विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन के मामले में दिए गए फैसले के अनुसार कलेक्टर का आदेश अंतिम होता है, इसके खिलाफ हाईकोर्ट में रिट पिटीशन ही अंतिम विकल्प है। वहीं, राज्य शासन की तरफ से सदन कुमार विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन के मामले का हवाला देेते हुए कहा गया कि कलेक्टर के आदेश के खिलाफ कमिश्नर के पास पुनरीक्षण के लिए मामला प्रस्तुत किया जाना चाहिए, क्योंकि पंचायत राज अधिनियम के तहत कमिश्नर को पुनरीक्षण का अधिकार दिया गया है। याचिका में किसका आदेश अंतिम माना जाएगा यह सवाल उपस्थित होने पर सिंगल बेंच ने मामले को फुल कोर्ट के लिए रेफर कर दिया था। वहीं, फुल कोर्ट में सुनवाई तक याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देते हुए 30 मई 2019 को महासमुंद कलेक्टर द्वारा जारी आदेश पर रोक लगा दी थी। इस मामले पर मंगलवार को चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन, जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की फुल बेंच ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा है।

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