यात्री मांगते रह गए लेकिन उत्कल एक्सप्रेस की पेंट्रीकार के मैनेजर ने नहीं दिया खाने का बिल
रेल मंत्री की घोषणा के बाद रेलवे बोर्ड ने बिलासपुर रेलवे स्टेशन सहित देशभर के स्टेशनों के स्टाॅलों में बड़े-बड़े अक्षरों में चस्पा करवाया है कि बिल नहीं तो खाने-पीने का सामान मुफ्त। पेंट्रीकार सहित ट्रेनों के सभी डिब्बों में यह चस्पा है लेकिन इसका पालन कहीं नहीं हो रहा है। हरिद्वार-पुरी उत्कल एक्सप्रेस में सफर कर रहे यात्री पेंट्रीकार के मैनेजर से भोजन का बिल मांगते रहे लेकिन रास्ते भर वह टालता रहा। अंत तक किसी को बिल दिया ही नहीं। रेलवे में बिना बिल के कोई भी भोजन या नाश्ता फ्री होगा यह फरमान रेल मंत्री का है। रेलवे बोर्ड ने बाकायदा इसके लिए आदेश भी जारी किया लेकिन इसका कहीं भी पालन नहीं किया जा रहा है। न ही अफसर इसका सख्ती से पालन कराना चाहते हैं। हरिद्वार से पुरी जाने वाली उत्कल एक्सप्रेस 11 मार्च को दिन में दिल्ली से रवाना हुई। यात्रियों ने दोपहर में पेंट्रीकार से भोजन मंगवाया। सभी ने भोजन कर लिया। उसके बाद जब पेंट्रीकार का वेंडर भोजन का पैसा लेने आया तो कुछ यात्रियों ने उससे बिल मांगा तो वह लाकर देता हूं कहकर चला गया। उसके बाद वह लौटकर नहीं आया। इसके बाद जब दोबारा नाश्ता या फिर चाय ली गई तब भी उसने बिल नहीं दिया जबकि सभी का बिल देना अनिवार्य किया गया है। आईआरसीटीसी ने पेंट्रीकार का ठेका देते समय ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वेट मशीन व बिल देने की मशीनें रखना अनिवार्य है। ये मशीनें तो पेंट्रीकार में होती है लेकिन ने किसी सामान को तौला जाता है न ही किसी को बिल दिया जाता है। यात्रियों ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन उनकी कोई सुना ही नहीं।
सिर्फ बोर्ड देखकर
तसल्ली कर लेते हैं
रेलवे के अफसर या रेलवे बोर्ड यात्री सुविधा समिति का कोई सदस्य जब भी प्लेटफार्म पर स्टाॅलों की जांच करने आता है तो सबसे पहले स्टाॅल के बाहर देखता है कि बिल नहीं तो भोजन फ्री का बोर्ड या स्टीकर लगा है या नहीं। इसके बाद न तो कभी मशीन चेक करते हैं और न ही बिल बुक ही देखते हैं। बोर्ड देखकर ही उन्हें तसल्ली हो जाती है कि स्टाॅल संचालक बिक्री करने वाले हर सामान का बिल दे रहा है।