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सीमांकन व नामांतरण के पेंडिंग मामलों का नहीं हो रहा निराकरण

एक वर्ष पहले
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जिला मुख्यालय के नजूल विभाग में सुनवाई होने के बाद भी आदेश करने के लिए जबरिया मामले लटकाए जा रहे हैं। अफसर जहां दो माह में नजूल मामलों के निपटारा करने का दावा करते हैं वहीं पक्षकार लेन देन के लिए ही जबरिया मामले को लटकाने की बात कहते हैं। जिला मुख्यालय के नजूल विभाग में मामलों के निपटारे के लिए जानबूझकर देरी की जाती है। अफसर दो माह में मामलों के निपटारे का दावा तो करते हैं लेकिन जब आंकड़ों का आइना दिखाया जाता है तब वे मामलों में देरी का कारण पक्षकार पर डालते हैं। नजूल विभाग में सामान्य खरीदी बिक्री के मामले भी आसानी से नहीं निपटते बल्कि आवेदन करने के बाद इश्तहार निकालने, राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट मिलने और इसके बाद पूरी होने वाली हर प्रक्रिया के लिए पक्षकार के चक्कर कटवाए जाते हैं ताकि पक्षकार पूरी तरह अफसरों के प्रति समर्पित हो जाएं।

ये हैं बहाने

{साहब अवकाश पर हैं।

{दस्तावेज में अमुक कागजात नहीं है।

{आर आई की रिपोर्ट नहीं
आई है।

{अभी इश्तहार नहीं निकला है।

{सभी लोगों का बयान नहीं हो पाया है।

{साहब की तबीयत सही नहीं है अगली तारीख ले लो।

वादा और प्रक्रिया में लगते है महीनों

1. नामांतरण के लिए आवेदन किया जाता है।

2. आवेदन के बाद इश्तहार किया जाता है।

3. 15 दिन का समय लिया जाता है लेकिन प्रक्रिया में अधिक समय भी लग जाता है।

4. सभी पक्षकार बयान देने आते हैं इसमें भी 15 दिन का समय बताया जाता है।

5. सबसे जटिल प्रक्रिया। अधिकांश मौकों पर पक्षकारों के बयान के लिए महीनों लग जाते हैं।

6. इसके बाद आर आई की रिपोर्ट में 15 दिन का समय लगता है जबकि हकीकत में अधिक समय लगता है।

ये हैं जिम्मेदार, आप भी इनसे पूछिए


पक्षकार ने कहा- गरीब आदमी कहां से लाए पैसे : खपरगंज निवासी श्यामल मैती का मामला नजूल विभाग में लगा है। जमीन की सामान्य खरीदी बिक्री का मामला है। श्यामल मैती का कहना है कि पिछले दो माह से अधिक समय से वह चक्कर काट रहा है लेकिन उसके मामले में आदेश नहीं हो पा रहा है।

{ क्या करना था : मामलों के निपटारे के लिए सुनवाई के बाद जल्द से जल्द निपटारा करना था कई मामलों में ऐसा नहीं हुआ।

{ क्या किया : धीमी गति से केस निपटाते रहे जिससे पक्षकार परेशान होते रहे।

{ क्या कहना है : नजूल के नामांतरण की जानकारी फिलहाल नहीं है। सुनवाई के बाद हमारे पास तीन माह का समय रहता है लेकिन मैं दाे माह में आदेश कर देता हूं। पक्षकार लोग आते नहीं हैं इसलिए हम केस पेंडिंग करते जाते हैं। एक केस वर्ष 2011 का है।

डिप्टी कलेक्टर व नजूल अधिकारी, जिला प्रशासन बिलासपुर

अवधराम टंडन**
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