आप किसी से फोन कॉल

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Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 03:20 AM IST
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कॉल ड्राप की परेशानी दूर करने डॉ. राठौर ने तैयार किया एनएस-2 साॅफ्टवेयर इससे 60 प्रतिशत तक समस्या हो रही दूर, पावर व समय कम लगने का दावा


आप किसी से फोन कॉल पर बात कर रहे हों और तकनीकी कारणों से अचानक संपर्क टूट जाए, तो इसे कॉल ड्रॉप कहते हैं। कई बार तो फोन लगने के बावजूद आवाज नहीं आती। ऐसा भी होता है कि आप किसी और फोन लगाते हैं और आवाज अनजान व्यक्ति की आने लगती है। ऐसा खराब नेटवर्क के चलते सिग्नल में व्यवधान से होता है। व्यस्तता के इस दौर में कॉल ड्रॉप से झुंझलाहट होती है। कॉल ड्रॉप की समस्याओं से परेशान होकर मिनोचा कॉलोनी की डॉ. शांति राठौर ने ट्राई को शिकायत किया, लेकिन सुधार नहीं हुआ। आखिरकार उन्होंने इसका कारण ढूंढना शुरू किया। समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए उन्होंने अपने इंजीनियर पति नवनीत सिंह राठौर के साथ रिसर्च शुरू कर दिया। डॉ. शांति ने 2014 में टू डिजाइन ए प्रोटोकॉल फॉर इन-हेंस सिक्योरिटी एंड कंजक्शन कंट्रोल पर डॉ. एमआर खान के निर्देशन में शोध शुरू किया। दो साल के रिसर्च के बाद 2016 में डॉ. राठौर ने एनएस-2 साफ्टवेयर तैयार किया। उनका दावा है कि इस साफ्टवेयर के इस्तेमाल से कॉल ड्राप की समस्या को 40 से 60 प्रतिशत तक कम करने में सफलता मिली है। डॉ. शांति ने अपने साफ्टवेयर को ट्राई को भेजा है। वहीं अब वे इसे चीप में इस्तेमाल करने पर काम रही हैं। डॉ. राठौर सीवीआरयू में शिक्षक हैं।

एनएस-2 साफ्टवेयर का उपयोग करतीं डॉ. शांति राठौर।

50 से 80 यूजर पर टेस्टिंग

कॉल ड्राप की समस्या टॉवर की फ्रिक्वेंसी बढ़ाने पर कम होती है, लेकिन फ्रिक्वेंसी बढ़ाने पर उसका दुष्प्रभाव मानव के शरीर पर पड़ता है। इसलिए फ्रिक्वेंसी नहीं बढ़ाई जाती। एनएस-2 साफ्टवेयर को तैयार करने के बाद डॉ. राठौर ने 50 से 80 यूजर पर इसकी टेस्टिंग की। जिसमें सामने आया कि 60 प्रतिशत तक कॉल ड्राप कम हो रहा है। इसके अलावा इस साफ्टवेयर से बिजली की खपत में कमी आती है। उन्होंने दावा किया कि साफ्टवेयर के चलते कॉल तुरंत कनेक्ट हो रहा है। इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है।

2 प्रतिशत से ज्यादा कॉल ड्राप पर 5 लाख जुर्माना

टेलीकॉम रेग्यूलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सर्किल में सबसे ज्यादा कॉल ड्रॉप की समस्या बताई है। मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में कॉल ड्रॉप का यह प्रतिशत 1 से 2 फीसदी है। ट्राई के मुताबिक 3 महीने में कॉल ड्रॉप रेट 2% से ज्यादा नहीं होना चाहिए, इससे ज्यादा कॉल ड्रॉप पर 5 लाख रुपए तक जुर्माने का नियम है। इस नियम के तहत ट्राई ने कंपनियों पर जुर्माना लगाना शुरू भी कर दिया है।

राष्ट्रीय संगोष्ठी में पेपर प्रस्तुत : अरविंदो कॉलेज ऑफ इंदौर में आई-ईईई ने राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया था। इसमें डॉ. राठौर ने टू डिजाइन ए प्रोटोकॉल फॉर इन-हेंस सिक्योरिटी एंड कंजक्शन कंट्रोल पेपर प्रस्तुत किया। इस पेपर को आई-ईईई ने अवार्ड किया।

आई-ईईई ने रिसर्च पेपर को दिया है अवार्ड

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