बारिश से पहले की तैयारियां अधूरीं, सीवेज और अमृत मिशन में खुदी सैकड़ों सड़कें फिर रुलाएंगी

Bilaspur News - नौतपा के बाद मानसून दस्तक देने लगता है। शहर में जून के आसपास बारिश होने के संकेत है लेकिन इस बार अापदा प्रबंधन की...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 06:30 AM IST
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नौतपा के बाद मानसून दस्तक देने लगता है। शहर में जून के आसपास बारिश होने के संकेत है लेकिन इस बार अापदा प्रबंधन की बैठक अब तक नहीं हुई है। यह बैठक हर साल मई माह के अंतिम दिनों या जून महीने में हो जाती थी। लेकिन जिला प्रशासन ने बारिश के दौरान आने वाली आपदा से निपटने के लिए इंतजाम नहीं किए हैं। इस कारण आने वाले दिनों में परेशानी बढ़ सकती है। इस बैठक में बाढ़ अापदा से निपटने सहित बाढ़ के दौरान सुरक्षा की अग्रिम योजनाओं पर संबंधित विभागोें के अधिकारियों से तैयारियों की जानकारी के साथ निर्देश दिए जाते हैं। मानसून के दौरान लगातार बारिश के दौरान आधा शहर जल मग्न हो जाता है। बारिश के दिनों में बाढ़ व अन्य घटनाओं से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा तैयारी की जाती है, लेकिन जिले में अभी न तो तैयारी हुई है और न ही विभागों को निर्देश दिए गए हैं। जबकि हर साल पहले से ही आपदा प्रबंधन के लिए प्रशासन तैयारी पूरी कर लेता है। शहर के आधा दर्जन नालों की सफाई नहीं हो रही हैं। इनसे ही बाढ़ जैसी स्थिति कई वार्डों में बनती है। कई जगह पर नालों की सफाई सिर्फ कागजों तक सीमित है। बरसात होने के साथ ही सबसे ज्यादा नुकसान सरकंडा, विद्यानगर, जरहाभाठा सहित आसपास बनी कॉलोनियों में होती है। यहां हर साल पानी जमा होता है। इसका विकल्प फिलहाल अफसरों के पास नहीं है।

नगर निगम के अधिकारी नहीं दे रहे हैं ध्यान, इसके चलते हजारों लोग परेशान

महाराणा प्रताप चौक पर नाला निर्माण जारी है। इससे कई तरह की परेशानी हो रही है। लोग परेशान हो रहे हैं।

11 साल से सीवेज और अब इससे दिक्कत

शहर में 11 साल से चल रहे 422 करोड़ के सीवेज प्रोजेक्ट के अंतर्गत सड़कों की खुदाई बार-बार की गई, जो अब तक चल रही है। इस दौरान शहरवासी गड्‌ढे, धूल और ट्रैफिक की परेशानियां झेलने लाचार रहे। अब बारिश के दिनों में उन्हें खासी दिक्कत झेलनी होगी। यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ और अब खूंटाघाट से शहर को पानी सप्लाई के लिए 301 करोड़ की लागतवाली अमृत मिशन योजना के अंतर्गत फिर नए सिरे से सड़कों की खुदाई पाइप लाइन बिछाने के लिए शुरू कर दिया गया है। लोग शहर के हालात को बखूबी समझ सकते हैं। जगह-जगह गड्‌ढे हैं। कहीं पाइप लाइन यूं ही सड़क किनारे छोड़ दी गई है तो कहीं कोई दिक्कत है। इससे आने वाले दिनों लाखों लोगों की दिक्कत बढ़ेगी। इसके बावजूद अभी तक अफसरों ने कोई प्लानिंग नहीं की है।

जानिए, किन विभागों को किस बात की तैयारी रखना जरूरी

स्वास्थ्य विभाग: डॉक्टरों व पर्याप्त दवाइयों की व्यवस्था करना। राजस्व विभाग : अरपा नदी व अन्य नदियों के किनारे के डूब में आने वाले गांव की सूची बनाना और उन पर नजर रखना। नगर निगम जल भराव से प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एवं राहत के लिए इंतजाम करना। वन विभाग: मोटरबोट, नाव, लाइफ जैकेट आदि सामग्री को तैयार रखना। पुलिस विभाग: थाना क्षेत्रों में नजर रखना कि कहां पर बाढ़ जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। अभी फिलहाल ऐसी कोई तैयारी होती दिख नहीं रही है।

अधूरा नाला बना अशोक नगर की मुसीबत

अशोक नगर, मुरम खदान और आस-पास के लोग हर बारिश में खासे परेशान होते हैं। यहां का मुख्य नाला अधूरा है और बस्ती के हिसाब से इसे घुमा दिया गया है। िनगम ने इसे सीधा करने की पहल ही नहीं की। नतीजा, बिरकोना की ओर से आने वाला पानी नाले के बजाय बस्ती में घुस गया और लोगों के घरों में घुटनों तक पानी भर गया। हालत यह कि घरों में सांप-बिच्छू घुसने लगे। यहां के लोगों की परेशानी पर न तो नगर निगम ध्यान दे रहा, न ही बिरकोना ग्राम पंचायत। यहंा आसपास भी बड़ी कॉलोनियां बस चुकी हैं। पर नाला निर्माण अधूरा है। इसकी वजह से ही लोगों को दिक्कत होती है। बारिश का पानी उनके घरों में घुसता है।

यहां सबसे ज्यादा परेशानी

बारिश होते ही पहले शहर के निचले इलाकों में रहने वाले लोग परेशान होते हैं। जरा सी बारिश हुई और सड़कों में पानी भर जाता है। पुराना बस स्टैंड, अग्रसेन चौक जाने वाली सड़क, व्यापार विहार रोड, इमलीपारा, पत्रकार कालोनी, पारिजात एक्सटेंशन, ओमनगर जरहाभाठा, वेयर हाउस रोड, सिटी कोतवाली के सामने, करबला, टिकरापारा, तालापारा, निराला नगर, कश्यप कालोनी, दयालबंद प्रायमरी स्कूल सहित अनेक हिस्से इससे प्रभावित होते हैं। पुराना बस स्टैंड से अग्रसेन चौक और तारबाहर रेलवे फाटक चौक से दीनदयाल मोड़ तक व्यापार विहार वाली सड़क पर नालियां जाम होने से पानी का जमना बड़ी परेशानी है।

बाढ़ नियंत्रण कक्ष दूसरी व्यवस्था भी नहीं

निगम के बाढ़ नियंत्रण कक्ष और सफाई विभाग की ओर से पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। परेशान लोग खुद ही घरों में घुसे पानी की निकासी के लिए जद्दोजहद करते नजर आते हैं। जरहाभाठा में पिछले हफ्ते हल्की सी बारिश में कई गलियां लबालब हो गई थीं, इसके बावजूद नालियों की सफाई नहीं हुई। आज वहां फिर पानी भर गया। वहीं मिट्टी तेल गली में बेजा कब्जा तोड़ने के बाद भी यहां की तकलीफें कम नहीं हुई हैं। थोड़ी सी बारिश से लोगों को दिक्कत झेलते देखा जा सकता है।

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