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रेलवे के अफसर नहीं चाहते कि यात्रियों को मिले सस्ता पानी

एक वर्ष पहले
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ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को ठंडा पानी नहीं मिल पाए इसलिए आईआरसीटीसी ने ऐसी कंपनी को वाटर वेंडिंग मशीन का ठेका दिया जो लाइसेंस फीस तक जमा नहीं कर पा रही है। 90 दिन में मशीन लगाना था वह 820 दिन में भी नहीं लगा पायी। आधे दिन मशीन खराब रहती है। यह पूरी तरह से पानी घोटाला है जो कि बड़े स्तर पर अधिकारी कर रहे हैं।

आईआरसीटीसी ने देशभर के स्टेशनों में यात्रियों को कम कीमत में ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए वाटर वेंडिंग मशीन लगाने का टेंडर जारी किया। टेंडर व वर्क आर्डर जारी होने के बाद कभी प्लेटफार्म पर जगह को लेकर तो कभी बिजली का कनेक्शन नहीं मिलने की वजह से विलंब होता रहा। बिलासपुर जोन में 51 मशीनें लगाने का निर्णय कंपनी ने लिया था। इसे 90 दिन में लगा देना था लेकिन अब तक सिर्फ 44 मशीनें ही लग पायी हैं।

रेल नीर के साथ भी अफसरों ने ऐसा ही किया : आईआरसीटीसी का प्लांट यहां पर लग चुका था लेकिन दो साल से उसमें उत्पादन शुरू नहीं किया जा रहा है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर क्षेत्रीय प्रबंधक ने लगातार लिखा पढ़ी की लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। फिर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग तरह के दबाव अफसरों पर पड़े तो प्लांट चालू हुआ लेकिन हर साल ऐन गर्मी के वक्त प्लांट में कोई न कोई खराबी बताकर उत्पादन कम कर दिया जाता है। इसके पीछे एक बड़ा संयंत्र निजी पानी बोतल बनाने वाली कंपनियों के साथ मिलीभगत का है। जब रेल नीर की सप्लाई नहीं हो पाती है तो रेलवे का कमर्शियल विभाग प्लेटफार्म के स्टाल व ट्रेनों की पेंट्रीकार में कुछ चिन्हित निजी कंपनियों का पानी बेचने की अनुमति देता है।

जल्द ही शुरू कराएंगे

साकेत चंद श्रीवास्तव,
जीएम, रेल नीर दिल्ली

जानिए कब-कब क्या हुआ

{टेंडर दिसंबर 2016 में ओपन हुआ। एसईसीआर बिलासपुर, एसईआर कोलकाता और एसईआर के स्टेशनों में 96 वाटर वेंडिंग मशीन लगाने का ठेका कोलकाता की अरहम मैनेजमेंट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को मिला।

{ कंपनी को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के बिलासपुर, रायपुर व नागपुर डिवीजन में 68, दक्षिण पूर्व रेलवे कोलकाता के आद्रा डिवीजन में 24 और ईस्टर्न सेंट्रल रेलवे के साेनपुर व माल्दा डिवीजन में 28 वाटर एटीएम मशीन लगाना था।

{ कागजी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद मई 2017 में वर्क आर्डर जारी हुआ। कंपनी ने सबसे पहले एसईआर की सोनपुर व माल्दा में मशीनें लगाना शुरू किया। कंपनी को वहीं से एहसास हो गया था यह घाटे का सौदा था।

{ एक साल बाद भी एसईसीआर में काम शुरू नहीं हुआ। मई 2018 में कंपनी ने बिलासपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 1 पर दो मशीनें लगाई। 15 दिन बाद एक मशीन बिगड़ गई थी। ये मशीन तब लगीं जब गर्मी लगभग खत्म हो चुकी थी। बारिश आ गई तो पूछपरख वैसे भी कम हो गई। अब तक 44 मशीनें ही एसईसीआर में लगीं है जबकि कंपनी को 51 मशीनें लगानी थी।

{ अक्टूबर-नवंबर तक सभी 8 मशीनें लगा दी गईं। वर्ष 2019 में मशीनें साल भर चलीं। गर्मी में 8 में से दो मशीन में दो बार गड़बड़ी आई थी लेकिन उसे दो दिन में ही सुधार लिया गया था। बारिश और ठंड में डिमांड कम होती है।

{ इस बीच टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत दिसंबर 2019 में विजिलेंस से की गई। तब से मामले की जांच चल रही है। ठीक गर्मी से पहले 5 मार्च को एसईसीआर के सभी 44 वाटर एटीएम बूथ बंद करने का आदेश जारी कर सील करा दिए गए। भरी गर्मी में इसे बंद कराकर अफसरों ने स्पष्ट कर दिया कि वे नहीं चाहते हैं कि आम जनता को सस्ते में ठंडा पानी मिले।

{ ये सारा षड़यंत्र आईआरसीटीसी के अफसरों का है। जिस जेजीएम गुप्ता पर आरोप लग रहे हैं उनका पता था कि जिस कंपनी को काम दिया जा रहा है वह लाइसेंस फीस तक जमा नहीं कर पाएगी।

रेलवे स्टेशन पर बिगड़ी हुई वेंडिंग मशीन।

फीस जमा नहीं कर रही कंपनी, अफसर बोले- 15 दिन में चालू करा लेंगे
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