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बारिश का पानी जमा करने रेलवे ने बनवाए चार तालाब, दो सूखे और दो में कम पानी

एक वर्ष पहले
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रेलवे प्रशासन बारिश के पानी को स्टोर करके रखने की कवायद में जुटा है। पिछले साल दो नए तालाब परिसर में खुदवाए। बारिश में वे लबालब हो गए थे। लेकिन तीन महीने में ही सूख गए। इससे लग रहा है इस पर किया गया 10 लाख रुपए का खर्च फिजूल में न चले जाएं।

पिछले साल रेलवे कोचिंग डिपो के तीन बोर में से दो बाेर का पानी सूख गया था। इससे प्रशासन को खासी परेशानी उठानी पड़ी थी। इसलिए कोचिंग डिपो के ठीक पीछे एक बड़ा तालाब खुदवा दिया। साथ ही बंद पड़े वाटर ट्रीटमेंट रिसाइकिलिंग प्लांट को चालू कराया। जमकर बारिश होने से तालाब लबालब भर गया। इससे अफसरों की उम्मीद जागी लेकिन दिसंबर जाते-जाते उनकी मायूसी बढ़ने लगी। नए तालाब का पानी सूख गया। कैसे सूखा यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन तालाब की मेढ़ पर ही एक नया बोर कराया गया था। इस बाेर से कोचिंग डिपो में पानी की जरूरत को पूरा किया गया। इसके अलावा एक फायदा यह मिला कि दिसंबर, जनवरी में जिस बोर का पानी कम होने लगता था वे अब तक वे अच्छे से चल रहे हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिकल लोको शेड के पास भी एक तालाब खुदवाया गया था उसमें अभी पानी दिख रहा है लेकिन वह अब भी सूख रहा है। इसी तरह से चुचुहियापारा अंडरब्रिज के पास पुराना तालाब है भी सूख चुका है। हाल ही में हुई बारिश
का कुछ अंश उस पर दिखाई दे रहा है।

बारिश के पानी का फायदा मिल रहा


{पिछले साल तालाब का निर्माण कराया गया था। बारिश में भरा लेकिन अब सूख गया ऐसा क्यों?

-तालाब खुदाई का मुख्य उद्देश्य बारिश के दिनों इधर-उधर बहने वाले पानी को एकत्र करना था। तालाब में पानी भरा और वह धीरे-धीरे जमीन की सतह पर चला गया।

{तालाब में पानी रहता तो सभी के काम आता। पानी रुका क्यों नहीं।

-तालाब में कोई जल रोधक लाइनिंग नहीं दी गई थी।

{उद्देश्य तो फेल होता दिख रहा है?

-ऐसा नहीं है। तालाब सूखा अवश्य दिख रहा है लेकिन उसके जो फायदे है वे मिल रहे हैं आसपास के जितने भी बोर है वे यथावत चल रहे हैं जबकि पिछले साल इस समय दिक्कत आनी शुरू हो गई थी।

पिछले साल रेलवे कोचिंग डिपो के तीन बोर में से दो बाेर का पानी सूख गया था

पुलकित सिंघल, सीनियर डीसीएम बिलासपुर रेल मंडल**

कोचिंग डिपो के पीछे सूख रहा नवनिर्मित तालाब। चुचुहियापारा अंडरब्रिज के पास वर्षों पुरानी डबरी भी सूखने की कगार पर।

पहला साल था इसलिए सूख गया

रेलवे के एक इंजीनियर ने चर्चा करते हुए कहा वे बात करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि नए तालाब की खुदाई के बाद जो निचली सतह होती है वह ढीली पड़ जाती है। साथ ही अंदर नमी होती है। जैसे-जैसे बारिश होती है जमीन अंदर ही अंदर पानी को सोखना शुरू करती है। उसके बाद धीरे-धीरे अंदरूनी सतह आपस में चिपकने लगती है और पानी का रिसाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। नए तालाब में पानी रुकने का प्रोसेस टू से तीन साल में पूरा होता है।
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