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सिनेमाघरों के बाहर दोगुने दाम में बिक रहे समोसे पॉपकॉर्न और आइसक्रीम, कार्रवाई आज तक नहीं

एक वर्ष पहले
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शहर के निजी मॉल्स में स्थापित सिनेमाघरों के बाहर दुकानदार खाने-पीने के सामान के अधिक दाम वसूल रहे हैं। दोगुने नहीं, तीन गुने रेट तक। 20 रुपए की आइसक्रीम 80 रुपए में बेची जा रही है। 30 रुपए समोसा भी 80 और 90 रुपए में बिक रहा है। कोल्डड्रिंक और पॉपकॉर्न के अधिक दाम लिए जा रहे हैं। और लोग मजबूरी में इसका पैसा चुका रहे। इसकी खूब शिकायतें हो रही हैं। अफसरों तक। पर सुनवाई नहीं हुई। क्योंकि अफसर यह कहकर बच रहे हैं कि वे पैक्ड सामान के दाम में अधिक पैसे लेने पर कार्रवाई कर सकते हैं। खुले सामान चाहे जितने में बिके इसपर कार्रवाई को लेकर वे खुद को लाचार बता रहे। यही वजह है कि अवैध वसूली का यह दौर सालों से चल रहा है।

अगर आप आम आदमी है और आपसे कोई ओवर चार्ज वसूल रहा है तो आप उसका कुछ नहीं कर सकते। आपके पास सिर्फ एक ही ऑप्शन है कि आप उसे अधिक कीमत दें। अगर आप शिकायत करने की सोच भी रहे हैं तो भूल जाइए. आप कहेंगे यह क्या बात हुई। लेकिन लाचार सिस्टम की सच्चाई तो यही है। ओवर चार्जिग की लगातार शिकायतों पर दैनिक भास्कर ने रियलिटी चेक करवाया तो हर छोटे-छोटे सामान पर मनमानी की वसूली सामने आई। जब शिकायत के लिए सरकारी दफ्तरों के दरवाजे खटखटाए तो सभी ने पल्ला झाड़ लिया। आखिरी में नतीजा यही मिला कि सामान लेना है तो चुपचाप ओवर चार्ज दो। ये ज्यादतर गड़बड़ी मॉल्स के भीतर लगे आइसक्रीम, पॉपकॉर्न, समोसे सहित अन्य जगहों पर होती पाई गई। इसमें 20 रुपए की आइक्रिम के दोगुने दाम और इसी तरह दो समोसे के 80 रुपए तक वसूलने की बात कही गई। बड़ी बात यह कि मॉल्स के सिनेमाघरों में बाहर से कोई सामान नहीं लेकर जाने की पांबदी और लाचारी में भीतर खरीदने की बात। इसके चलते बिलासपुर में हजारों लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ओवर चार्जिग की शिकायतों पर जब हमने शहर के कई इलाकों में रियलिटी चेक किया तो सच्चाई सामने आई। आइसक्रीम से लेकर कोल्डड्रिंक तक सभी पर खुलेआम पब्लिक को लूटा जा रहा है। ये गड़बड़ी कैसे चल रही है समझिए।

ऐसे चलता है ज्यादा पैसे लेने का पूरा खेल

25 की आइसक्रीम 50 रुपए में

{रिपोर्टर - एक आइसक्रीम के कितने पैसे लगेंगे?

दुकानदार- 50 रुपए।

{रिपोर्टर - इसके ऊपर तो प्राइस मिटा हुआ है। क्या यह 50 रुपए का है?

दुकानदार- 50 में बाहर मिलेगा यहां नहीं।

{रिपोर्टर - यह तो 25 रुपए में आता है, अगर 50 का ही है तो क्या आप मुझे बिल देंगे?

दुकानदार- नहीं, बिल नहीं मिलेगा। लेना हो तो लीजिए।

30 का दही समोसा, रेट लगा रहे 80 रुपए

{रिपोर्टर- दही समोसे कितने का मिलेगा?

दुकानदार- 80 रुपए में।

{रिपोर्टर- पर यह बाहर तो 30 का मिलता है।

दुकानदार- आप बाहर लीजिए। यहां तो इतने का ही मिलेगा।

टोल फ्री नंबर नहीं, इसलिए शिकायत
भी नहीं कर पाते लोग


किसी भी पैक्ड प्रोडक्ट को उस पर अंकित मूल्य से ज्यादा में बेचना गलत है। ऐसा करना पैकेज कोमोडिटीज रूल्स अंडर लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 का उल्लंघन है। यह एक केन्द्रीय रूल है, लेकिन इसका अनुपालन राज्य सरकार की ओर से ही किया जाता है। हर राज्य के पास इसके लिए एक टोल फ्री नंबर होना चाहिए. लेकिन बिलासपुर में ऐसा कोई भी नंबर नहीं है। जिसमें फोन करने पर तत्काल कार्रवाई हो सके। इसलिए सब यूं ही चल रहा।

अफसर बोले.. पैक्ड सामान में ओवरचार्जिंग पर हो सकती है कार्रवाई, चलाएंगे अभियान

शहर के निजी माॅल्स... खाने-पीने के सामान में कर रहे अवैध वसूली, हजारों लोग परेशान

पढ़िए, शहर के निजी मॉल्स में किस तरह चल रहा यह अवैध कारोबार

कोल्डड्रिंक, पॉपकॉर्न जैसे आइटम्स पर भी वसूली

बिलासपुर में बड़े होटलों में यह समस्या आम है। लिंक रोड, गांधी चौक, अग्रसेन चौक सहित आसपास की कई दुकानों के अलावा गार्डन के भीतर बने ठेलों में हर जगह ओवर चार्जिग की समस्या है। इनमें भी कोल्ड ड्रिंक्स, पॉपकार्न, आइसक्रीम आदि जैसे आइटम्स में ओवर चार्जिग के सबसे अधिक मामले शामिल हैं। जानकार बताते हैं कि यदि सभी प्रकार की बिक्री के सामानों का रेट चार्ज यदि संबंधित शॉप पर ही डिस्पले कर दिया जाए, तो ऐसा नहीं होगा। क्योंकि ग्राहक देख पाएंगे कि जो कीमत वह जिस सामान का चुका रहे हैं, वह वास्तव में उसी दर पर मिल रहा है. यह नियम है लेकिन शॉप इसे नहीं लगाते है. यहां शॉप्स, मॉल्स आदि में यह रेट चार्ट नहीं लगा है।

हाईकोर्ट कर चुका है टिप्पणी, फिर भी
व्यवस्था नहीं बना रहे अफसर


मुंबई हाई कोर्ट ने शासन को आदेश दिए थे कि वह मल्टीप्लेक्स में रेट कंट्रोल और घर से लाए सामान को प्रवेश दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराए। इस जजमेंट के आधार पर कई प्रदेश में भी यही व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। यह भी कहा कि मप्र सिनेमा रूल्स 1972 में भी यह कहीं नहीं लिखा है कि बाहर का बना खाना अंदर नहीं ले जाया जा सकेगा। सिनेमा देखने डायबिटिज के मरीज भी आते हैं, जिन्हें समय-समय पर खाने की जरूरत होती है। बाहर की खाद्य सामग्री वह नहीं खा सकते। ऐसे में उन्हें घर से लाया सामान ले जाने की राहत मिलनी चाहिए। इसके बावजूद अभी तक इनके नियंत्रण पर अधिकारी फेल हैं। और यही कारण है लोग से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं।

खुले सामान के ज्यादा पैसे लेने पर कोई नियम नहीं

सुरेश देवांगन, संचालक नापतौल विभाग**

{मॉल्स में सिनेमाघरांे के बाहर समोसे, पॉपकॉर्न, कोल्डड्रिंक के अधिक दाम वसूले रहे हैं, कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

- हम होली के बाद अभियान चलाएंगे। वैसे हम पैक्ड सामान के एवज में अधिक पैसे लेने पर कार्रवाई कर सकते हैं। खुले सामान की बिक्री पर नहीं।

{यानी खुला सामान कोई कितने भी दाम में बेच सकता है?

- हां, उस पर हमारा नियंत्रण नहीं है।

{ज्यादातर मॉल्स के बाहर तो खुले सामान ही बिक रहे, इस पर कौन कार्रवाई करेगा?

- इसके लिए कोई नियम नहीं है। यह हमारे अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
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