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हाईकोर्ट ऑडिटोरियम में शार्ट फिल्म फेस्टिवल 21 को

एक वर्ष पहले
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समाज तक संदेश पहुंचाने के लिए सिनेमा सशक्त माध्यम है। इससे लोगों को बातें समझाने में सरलता होती है। आजादी के इतने साल बाद भी लोगों को कानूनी प्रावधानों और अधिकारों की जानकारी नहीं है। ऐसे ही कानून की जानकारी देने विधिक जागरूकता पर शार्ट फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस प्रशांत मिश्रा के मार्गदर्शन में पहली बार में बिलासपुर में 21 व 22 मार्च को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के ऑडिटोरियम में आयोजित होगी। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में इस फेस्टिवल में भारत सहित 55 देशों की 637 एंट्री मिल चुकी है। 05 से 10 मिनट की फिल्मों के लिए चार विषय निर्धारित किए गए हैं। जूरी के निर्णय के मुताबिक 22 श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे।

5 लाख से अधिक के 22 पुरस्कार

भारतीय प्रतियोगियों को 22 पुरस्कार दिये जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के लिए 2 सम्मान होंगे। छत्तीसगढ़ी में बेस्ट शार्ट फिल्म को 1 लाख और दूसरी को 51 हजार रुपए दिये जाएंगे। इसी तरह हिन्दी, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं में बेस्ट शार्ट फिल्म को 1 लाख रुपए और दूसरी को 51 हजार रुपए के एक-एक पुरस्कार दिये जाएंगे। बेस्ट सुपर शार्ट्स को 21 हजार, रनर अप को 11 हजार और सेकेंड रनर अप को 5100 रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे।

अमेरिका, ईरान व पाकिस्तान से फेस्टिवल के लिए फिल्में आईं

शार्ट फिल्म फेस्टिवल सीजन-3 के लिए ईरान, अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, आस्ट्रिया, फिलीपींस, इंडोनेशिया, चिली, कोलंबिया, चेक रिपब्लिक, डेनमार्क, इजिप्ट, फ्रांस, जर्मनी व पाकिस्तान सहित 54 देशों की फिल्में आई हैं। राज्य के फिल्मकारों ने भी बड़ी संख्या में फिल्में भेजी हैं।

चार विषयों के लिए 6 केटेगरी

चार विषयों पर 6 केटेगरी में शार्ट फिल्में मंगाई गई थी, इसमें छत्तीसगढ़ी, अंग्रेजी व अन्य भारतीय भाषाएं, सुपर शाट्स, इन हाउस, गैर प्रतिस्पर्धी श्रेणी और नो वाॅर्डर्स केटेगरी शामिल है। इन हाउस में राज्य और जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की एंट्री शामिल है।

चार विषयों पर फिल्में मंगाई गई हैं

देश की पहली शार्ट फिल्म प्रतियोगिता जो कानूनी जागरूकता पर आधारित है। इसका नाम शूट फाॅर लीगल अवेयरनेस 2020 दिया गया है। इसमें चार विषय तय किए गए हैं। इसमें मानव तस्करी, बाल अधिकार बाल श्रम निषेध और शिक्षा का अधिकार, नशा मुक्ति और पीड़ितों का पुनर्वास और साइबर क्राइम में फिल्में प्रस्तुत की जा रही हैं।
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