सिव जी त्रिपुरारी कइसे कहाईस

Bilaspur News - एक घंव त्रिपुर नाव के दैत्य ह परयाग म एक लाख बछर तक तप करत रहीस। ओकर तप ले परसन्न होके ब्रम्हा जी ओला बरदान मांगे बर...

Nov 11, 2019, 08:01 AM IST
एक घंव त्रिपुर नाव के दैत्य ह परयाग म एक लाख बछर तक तप करत रहीस। ओकर तप ले परसन्न होके ब्रम्हा जी ओला बरदान मांगे बर कहिस त त्रिपुर दैत्य ह कहिस न मय देवता से मरव, न मइनखे से, न स्त्री से, न निसाचर से मरव ब्रम्हा जी एवमस्त कहिके चल दिहिस। बस फेर का हे त्रिपुरासुर के जम्मो डहर राज चले लगीस सब्बो देवता मन ल ओकर आग्या के पालन करे बर परत रहिस। अब ओहर सूर्य देवता ल कहिस कि तय मोर दुवारी म पहरा दे त सूर्य देव भी ओकर दुवारी म जा के खड़े होगे। उनकर गति रुक गिस अउ जम्मो डहर अन्धकार छा गे त्रिलोकी म हाहाकार मच गे त त्रिपुरासुर सूर्य देव ल कहिस त जइसे चलथस ओइसनहे चलत रह। घुमत-घुमत एक घंव नारद मुनि त्रिपुरासुर लगन गइन त्रिपुरासुर कहिथे देखा महाराज जम्मो डहर मोरे राज चलत हे। नारद जी कथे तय जउन-जउन डहर अपन दैत्य मन ल भेजे हस ओती बर ओही मन मालिक बन के बइठ गे हे। अतका ल सुनिच त त्रिपुरासुर ह बिस्करमा ल बला के ओकर लगन तीन ठन पुर बनवाइस जउन ह जिहाज कस जिन्हा मन परय तिन्हा जाय म सक्छम रहय। एक ठन पाताल म, एक ठन सरग म, अउ एक ठन भूमि म बिचरन करय ए परकार ले त्रिपुरासुर जम्मो लोक म सासन करे लगिस अउ देवता मन के सारा परभाव छीन होगे। सब देवता मन मिलके ब्रम्हा जी लगन गइन त ब्रन्हा जी कहिस महि ह बरदान देहे हंव मय कुछ नई कर सकव। तब सब देवता मन बिस्नु भगवान लगन गइन, भगवान बिस्नु कहिन मोर लगन कउनो उपाय नई हे फिर सब देवता मन सिवजी लगन गइन। सिवजी कहिथे ए ह मोर भगत आय अउ ओला मय कइसे मारिहंव अउ बिना कारन मोला काबर क्रोध आही। नारद जी कहिथे ए त्रिपुरासुर ल मारे बर कुछु न कुछु उपाय जरुर करे बर परही अइसे बिचार करके त्रिपुरासुर लगन फेर गइन त्रिपुरासुर नारद जी ल देख कहिथे देखा महाराज मोर एस्वर्य ल एकर कोनो मुकाबला कर सकत हे। नारद जी कहिथे ठीक हे फेर जउन सम्पदा कैलासपति लगन हे ओ सम्पदा के आगू तोर सम्पदा कुछु नई हे अब त्रिपुरासुर सोचथे जब मय अजेय हंव तव सिवजी ह मोर ले जादा वैभववान कइसे हो सकत हे। अइसे कहिके दैत्य सेना लेके कैलास परबत म धावा बोल देथे तीन दिन तक युद्ध चलथे फेर सिव जी एकेच बान ले तीनो पुर अउ त्रिपुरासुर के बध कर देथे तब ले सिव जी के नाव त्रिपुरारी पड़ीस। ओ दिन “कातिक पुन्नी” के दिन रहिस ओ दिन सब देवता मन सिव जी के प्रसन्नता बर दिया जलाय रहिन।

भावना श्रीवास तखतपुर

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