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स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के लिए पुराने कलेक्टर बंगले की मांग की

एक वर्ष पहले
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वर्तमान में यह हाईकोर्ट पूल के आधिपत्य में है

बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने नेहरू चौक के पास स्थित पुराने कलेक्टर बंगले की मांग की है। अंग्रेजों के जमाने से यहां कलेक्टर का निवास रहा। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की स्थापना के बाद इस बंगले का नवीनीकरण कर उसे जस्टिस के लिए आवंटित किया गया। तब से यह हाईकोर्ट पूल के आधिपत्य में है। हाईकोर्ट के तकरीबन सभी जस्टिस चकरभाठा स्थित नवनिर्मित बंगलों में शिफ्ट हो चुके हैं। पुराने कलेक्टर बंगले की जगह खाली पड़ी है और देखरेख की अभाव में इसकी 80 साल पुरानी बिल्डिंग जर्जर होने लगी है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत आम लोगों को एक ही स्थान पर खेलकूद, योगा तथा शारीरिक अभ्यास वाले क्रियाकलापों के लिए स्पोर्ट्स कांप्लेक्स की स्थापना का प्रावधान है। स्मार्ट सिटी लिमिटेड को इसके लिए ढाई एकड़ भूमि की जरूरत है।

जानिए पुराने बंगले में क्या सहूलियतें जुटाई जा सकेंगी


पुराने कलेक्टर बंगले का क्षेत्रफल 3 एकड़ से अधिक है। स्मार्ट सिटी लिमिटेड को इतनी ही जमीन की जरूरत है। पुरानी बसाहट के 22 वार्डों को लेकर स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत विकास किया जाएगा। एबीडी(एरिया बेस्ड डेवलपमेंट) के अंतर्गत यहां रिट्रोफिटिंग यानी पुरानी बसाहट वाली जगह का नए सिरे से विकास करना है। पुराना कलेक्टर बंगला शहर के हृदय स्थल में है, इसलिए इसका फायदा पूरे शहर के लोग उठा सकेंगे। यहां स्वीमिंग पूल, जिम, बैडमिंटन कोर्ट, बालीबॉल, बास्केट बॉल कोर्ट सहित कई तरह के इनडोर खेलों के लिए व्यवस्थाएं की जा सकेंगी। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के लिए स्मार्ट सिटी लिमिटेड को 80 हजार वर्गफुट जमीन की जरूरत है। जहां तिमंजिली बिल्डिंग बनाई जाएगी।

क्रियान्वयन राज्य की जिम्मेदारी

लोकसभा सांसद अरुण साव ने मुख्यमंत्री के बयान को हास्यास्पद करार दिया है, जिसमें उन्होंने स्मार्ट सिटी योजना के लिए सांसद को जवाबदेह बताया है। कहा-बयान योजना व बिलासपुर के प्रति उपेक्षा के उनके भाव को दर्शाता है। स्मार्ट सिटी भारत सरकार की महत्वाकांक्षी व 4 हजार करोड़ रुपए की योजना है। इसके लिए जारी 112 करोड़ अभी तक खर्च नहीं किया जा सका है। केंद्र की राशि का सही उपयोग हो, यह जिम्मेदारी क्रियान्वयन एजेंसी छत्तीसगढ़ सरकार का मुखिया होने के नाते मुख्यमंत्री की है। योजना का क्रियान्वयन कलेक्टर की देखरेख में गठित राज्य सरकार के अधिकारियों की टीम कर रही है।

योगा क्लास सहित कई सहूलियतें जुटाई जाएंगी, वर्षों से खाली पड़ा है बंगला

जमीन मिलने के बाद होगा टेंडर


खाली पड़ा पुराना कलेक्टर बंगला।

स्मार्ट सिटी लिमिटेड के ईई पीके पंचायती के मुताबिक रिक्रिएशन फेसिलिटी के लिए पुराने कलेक्टर बंगले की जगह की मांग की गई है। यह हाईकोर्ट पूल के आधिपत्य में है। इसके लिए हाईकोर्ट से अनुमति लेकर प्रशासन जनहितैषी सेवाओं के लिए स्मार्ट सिटी लिमिटेड को आवंटित कर सकता है। इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया चल रही है। उक्त जमीन नजूल की है। भूमि मिलते साथ रिक्रिएशन फेसिलिटी के लिए टेंडर कराया जाएगा। पीडब्ल्यूसी ने इसके लिए डीपीआर तैयार किया है।
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