10 किमी रेलवे फ्लाईओवर के लिए 13 साल में 3 बार सर्वे, जमीन तक नहीं मिली

Bilaspur News - बिलासपुर चुचुहियापारा ओवरब्रिज के पास से दाधापारा और उसलापुर तक 10.40 किलोमीटर लंबा रेल फ्लाईओवर बनाने की रेलवे की...

Dec 12, 2019, 06:30 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news survey for 10 km railway flyover 3 times in 13 years did not even get land
बिलासपुर चुचुहियापारा ओवरब्रिज के पास से दाधापारा और उसलापुर तक 10.40 किलोमीटर लंबा रेल फ्लाईओवर बनाने की रेलवे की योजना 13 साल बाद भी अधर में लटकी हुई है। अब तक इसके लिए जमीन नहीं मिल पायी है। इतने सालों में 3 बार सर्वे हो चुका है लेकिन कहीं न कहीं जाकर मामला अटक जाता है। जिला प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर यातायात का दबाव हर दिन बढ़ रहा है। इसे कम करने या खत्म करने के लिए रेलवे प्रशासन ने 15 साल पहले 10.40 किलोमीटर लंबा रेल फ्लाईओवर बनाने का निर्णय लिया और प्रस्ताव बनाकर रेलवे बोर्ड से मंजूरी ली थी। इसे 2006-07 के बजट में स्वीकृति मिली थी। तब से लेकर अब तक यानि 13 साल से सिर्फ सर्वे ही चल रहा था। फ्लाईओवर चुचुहियापारा ओवरब्रिज के करीब से शुरू कर बाइपास लाइन के ऊपर से होते हुए दाधापारा रेलवे स्टेशन के पहले तक एवं एक लाइन बाइपास लाइन से सीधे उसलापुर की तरफ जाएगी। वहीं दाधापारा रेलवे स्टेशन से उसलापुर जाने वाली लाइन के ऊपर ही ऊपर बनाया जाना प्रस्तावित किया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट में 21.28 हेक्टेयर जमीन लगनी है। इनमें से 19.52 हेक्टेयर निजी जमीन लगेगी। शुरूआत में जब इसका सर्वे किया गया तो एक स्कूल की जमीन इसके दायरे में आ रही थी। प्रबंधन के विरोध के बाद मामला 3-4 साल तक लंबित रहा। इसके बाद नए सिरे से सर्वे कराया गया। उसका भी परिणाम नहीं निकला। इसलिए तीसरी बार सर्वे कराना पड़ा जो कि इसी वर्ष जून में समाप्त हुआ है। इसके बाद जिला प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

चुचुहियापारा ओवरब्रिज के पास से 10.40 किलोमीटर लंबा रेल फ्लाईओवर बनाया जाना है।

संयुक्त सर्वे के बाद जमीन तय

सिरगिट्‌टी, तिफरा हल्का के पटवारी, जिला प्रशासन के अफसरों और रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के अफसरों ने इस रेल फ्लाईओवर के लिए जमीन की तलाश शुरू की। इस मामले में जिन निजी जमीन मालिक का विरोध था उन्हें समझाने के भी प्रयास किए गए। इसके बाद विवादास्पद निजी जमीनों से अलग हटकर अलाइनमेंट बनाया जा रहा है।

61 करोड़ थी लागत

इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 13 साल पहले 61 करोड़ रुपए थी। अब यह बढ़ जाएगी। इसमें जमीन का मुआवजा ही सबसे ज्यादा है। जिला प्रशासन ने इसका नोटिफिकेशन भी करवाया है। प्रोजेक्ट की लागत नए सिरे से निकाली जा रही है।

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