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रेत की डेढ़ गुना कीमत चुकानीपड़ रही निर्माण कराने वालों को

एक वर्ष पहले
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रेत की कीमत घटाने खनिज विभाग बैकफुट पर है। हालांकि 6 माह में रेत के अवैध परिवहन के 198 वाहनों को खनिज विभाग ने पकड़कर वाहन मालिकों पर 12 लाख 88 हजार रुपए जुर्माना भी किया पर यह भी बेअसर साबित हुआ है। रेत माफिया के आगे बिलासपुर खनिज अमला ही नहीं पूरे विभाग ने ही जैसे घुटने टेक दिए हैं तभी तो स्थानीय अधिकारियों के सवालों का जवाब भी आला अधिकारियों के पास नहीं है। रेत की डेढ़ गुना कीमत ने मकान बनाने वालों की रातों की नींद उड़ा दी है।

मकान बनाने में अगर सबसे सस्ता कुछ था तो वह थी रेत। पर अब ऐसा नहीं है सीमेंट, सरिया, ईंट ही नहीं रेत की कीमत भी बढ़ गई है। हजार वर्गफीट का मकान बनाने में 50 ट्रैक्टर रेत की जरूरत पड़ती है। पहले यह 1000 रुपए ट्रैक्टर में मिल जाती थी लेकिन अब 1500 रुपए में मिलने से डेढ़ गुना कीमत चुकानी पड़ रही है। यानी अब 50 हजार की जगह 75 हजार रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। हर वर्गफीट में 25 हजार का बोझ। दरअसल ऐसा रेत घाटों के निजीकरण के बाद हुआ है। रेत घाटों का ठेका दो कारणों से दिया गया। पहला समय पर रायल्टी की वसूली हो और दूसरा रेत की कीमत न बढ़े। पर दोनों ही मकसद पूरा नहीं हो पा रहा है। विभाग को न रायल्टी समय पर मिल रही है और न ही रेत की कीमत पर ही नियंत्रण है। रेत घाट ठेकेदाराें ने सिंडीकेट बनाकर कीमत तय कर ली है और वे लोग बाजार को नियंत्रित कर रहे हैं। इतना ही नहीं वे तो रायल्टी पर्ची भी नहीं काट रहे हैं। भास्कर ने रेत घाट में जाकर स्टिंग कर मामले का खुलासा किया था। इसके बाद खनिज विभाग ने 9 घाट ठेकेदारों को नोटिस देकर जवाब मांगा था लेकिन उनके पास 60 दिन तक जवाब देने का समय है, इसलिए उन्होंने जवाब नहीं दिया है। इससे विभाग भी कुछ नहीं कर पा रहा है।

ये हैं जिम्मेदार, आप भी इनसे पूछिए


क्या करना था- रेत की कीमत बढ़ने की आशंका थी पर इस ओर शुरुआत में ध्यान नहीं दिया। बाद में सिंडीकेट हावी हो गया। इसे तोड़ नहीं पाए।

क्या किया- रेत का अवैध परिवहन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते रहे। इससे जनता का नुकसान ज्यादा हुआ। कीमत और बढ़ गई।

क्या कहना है- ज्यादा कीमत पर रेत बेचने की शिकायतें दूसरे जिलों में भी है पर नौ घाट संचालकों को नोटिस और 6 माह में 198 गाड़ियां पकड़ी। 12 लाख 88 हजार रुपए जुर्माना किया। ऐसा प्रदेश में कहीं और नहीं हुआ। घाट संचालकों के जवाब नहीं आने पर उनकी जमा राशि काट लेंगे। विभाग से भी दिशा-निर्देश मांगा गया है।

उप संचालक
खनिज विभाग

डॉ.दिनेश मिश्रा**
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