तंग गलियों से मुक्त होंगे गांव, तो न्यायधानी को मिल पाएगा बी क्लास सिटी का नाम

Bilaspur News - सूर्यकान्त चतुर्वेदी | बिलासपुर राज्य बनने के पहले से छत्तीसगढ़ में रायपुर और बिलासपुर की पहचान बड़े शहर के रूप...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 03:21 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news the village will be free from tight streets then justice will be found in the name of bcity city
सूर्यकान्त चतुर्वेदी | बिलासपुर

राज्य बनने के पहले से छत्तीसगढ़ में रायपुर और बिलासपुर की पहचान बड़े शहर के रूप में होती थी, परंतु स्थापना के 18 वर्षों में अब विकास के मामले में इनके बीच जमीन आसमान का अंतर आ गया है। बिलासपुर लगातार पिछड़ता जा रहा है। इसकी कई वजहों में शहर में बेतरतीब बसाहट के साथ जगह की कमी एक है। 30.42 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले शहर की आबादी 3.71 लाख को पार कर चुकी है। समस्या यह है कि अब सहूलियतों के विस्तार के लिए शहर में जमीन नहीं बची। बड़े प्रोजेक्ट, उद्योग, कार्यालय सबके लिए पास पड़ोस के गांवों का सहारा लेना पड़ा। इन सबके बावजूद शहर से जुड़े अर्धशहरी गांवों की हालत नहीं बदली। बिजौर, परसाही, बहतराई, खमतराई शहर से 5 किलोमीटर के दायरे में हैं, परंतु मुख्य मार्ग को छोड़कर गांव का अधिकांश हिस्सा तंग गलियों के बीच कीचड़ भरी राहों पर जिंदगी बसर करने मजबूर है। यही वजह है कि सीमावृद्धि के लिए 29 गांवों को शामिल करने पहल की जा रही है।

2000 में 16 गांवों को बिलासपुर नगर निगम में शामिल करने लाया गया पहला प्रस्ताव

बहतराई जैसी तंग गलियां और भी कई गांवों में है।

जानिए सेटेलाइट टाउन को क्यों नहीं मिल रहा स्ट्रीट लाइट और पानी

‘दैनिक भास्कर’ ने शहर से जुड़े उस्लापुर, सकरी, बहतराई, बोदरी जैसे गांवों की हालत के बारे में टाउन प्लानर, इंजीनियर तथा एक्सपर्ट से बातचीत की। बुनियादी बात यह है कि ग्राम पंचायत और नगर पंचायत में निगम की तुलना में नक्शे पास कराना ज्यादा आसान है। यही वजह है कि ज्यादातर आवासीय कालोनियां गांवों में विकसित हो गईं। शहर की सीमा पार जैसे ही इन गांवों की ओर पहुंचते हैं स्ट्रीट लाइट की रोशनी नजर नहीं आती। उस्लापुर या चकरभाठा रोड पर चोरी, लूट की घटनाएं इसीलिए होती रही हैं। ग्राम पंचायतों में पीने के पानी के लिए हैंडपंप और ट्यूबवेल का सहारा लिया जाता है। नगर निगम की तरह सेटेलाइट टाउन के पास क्लोरीनयुक्त पानी सप्लाई की कोई व्यवस्था नहीं है।

रायपुर से जुड़े तो 7 गांवों का हुआ विकास

2004 में रायपुर नगर निगम में मोवा, भनपुरी, अमलीडीह सहित 26 गांव जुड़े। 2014 में आमासिवनी, सरना, लाभांडी, जोरा, देवपुरी, तोंडा और सड्‌डू को शामिल किया गया। आबादी 10 लाख के पार हुई और अब यह महानगर बन चुका है। 4 साल पहले जुड़े गांवों में पाइप लाइन से पानी और स्ट्रीट लाइट जैसी सहूलियतों के साथ 2-2 करोड़ के कार्य स्वीकृत किए गए।

हाईकोर्ट, बस स्टैंड, स्टेडियम गांव में

हाईकोर्ट को बोदरी, हाइटेक बस स्टैंड को तिफरा, ट्रांसपोर्ट नगर को सिरगिट्‌टी, साईं कैम्पस को बहतराई, अपोलो अस्पताल को लिंगियाडीह में स्थापित किया गया। चकरभाठा हवाई अड्‌डे को अब आर्मी के बेस कैंप बनाने की तैयारियां चल रही हैं। सीयू के बाद मल्टी स्पेशीलिटी अस्पताल को भी कोनी में ही जगह मिली।

एक्सपर्ट पैनल: प्रमोद दुबे मेयर रायपुर, एससी श्रीवास्तव रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता नगर निगम, श्याम शुक्ला आर्किटेक्ट।

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