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पौधों की कमी है इसलिए आम खाएं पर गुठलियां नहीं फेंकें, कृषि वैज्ञानिक घर आएंगे या कंटेनर देकर इन्हें कलेक्ट कराएंगे

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 06:35 AM IST

Bilaspur News - कृषि कॉलेज एवं अनुसंधान केंद्र के अधिकारियों ने आम के घटते पौधों पर चिंता जताते हुए एक अनूठी योजना तैयार की है।...

Bilaspur News - chhattisgarh news there is a shortage of plants so do not throw the granules on common food agricultural scientists will come home or collect them by giving a container
कृषि कॉलेज एवं अनुसंधान केंद्र के अधिकारियों ने आम के घटते पौधों पर चिंता जताते हुए एक अनूठी योजना तैयार की है। उन्होंने शहरभर के लोगों से कहा है कि वे आम खाएं पर गुठलियां फेंकें नहीं। इसे वे सहेजकर रख लें। वैज्ञानिक उनके घर आएंगे या कंटेनर भिजवाएंगे। ताकि इन गुठलियों से फिर से आम के पौधे तैयार करवाए जा सकें। इसके लिए उन्होंने कंटेनर भी खरीद लिया है। कृषि विज्ञान केंद्र के डीन आर तिवारी के मुताबिक आज से यह स्कीम शुरू हो जाएगाी।

एग्रीकल्चर कॉलेज का कहना है कि पहले की अपेक्षा में अब आम के पौधे उतने तैयार नहीं हाे रहे जितनी अपेक्षा की जा रही है। इसकी वजह लोगों के द्वारा आम को खाकर इनकी गुठलियों को यूं ही कचरे में फेंक दिया जाता है। यह कचरे के तौर पर ट्रंचिंग ग्रांउड पर पहुंच जाता है और अंतिम में नष्ट हो जाता है। इसके चलते ही गुठलियों का उपयोग लगभग बंद हो चुका है। इससे ना तो आम के ज्यादा पौधे मिल रहे और ना ही वे किसानों को बांट रहे हैं। शेष|पेज 7

किसान आम के पौधों को गांव में लगाने के लिए लगातार मांग रहे हैं। इसकी खेती भी करना चाह रहे हैं। पर अपेक्षाकृत आम के पौधे नहीं होने से कृषि कॉलेज उन्हें यह उपलब्ध कराने में नाकाम है। यही वजह है कि उन्होंने अब इसके लिए एक नई तरकीब ढूंढी है। उन्हांेने नगर निगम से कंटेनर मंगवाया है और खरीदा भी है। इसे ही शहर में ठेले, गुमटियां और दुकानों के पास रखने की बात कही गई है। आज से कृषि कॉलेज के अधिकारी इसे शहर के कई जगहों पर रखेंगे। और लोगों से अपील करेंगे कि वे गुठलियों को इसमें ही जमा करें।

आम के पेड़ों को सहेजने यह किया गया है उपाय

कृषि विज्ञान केंद्र ने बूढ़े पेड़ों को जवान बनाने के लिए नया प्रयोग किया है। आम के पौधों को क्रॉफ्ट कर इनमें बोडोपेस्ट किया गया है। ऐसा आम के एक-दो नहीं, पूरे डेढ़ सौ बूढ़े पेड़ों पर पौधों सी रवानी छा गई है। नए तने, पत्ते और आने वाले दिनों में इन पर फिर से फल लदे-फदे नजर आ रहे हैं। तोतापरी, चौसा समेत छह प्रचलित प्रजाति के इन पेड़ों की उम्र 40 से 50 साल है। वैज्ञानिकों का दावा है कि नए जीवन में आम के ये पेड़ पहले से ज्यादा फल देंगे। पुनर्जीवित करने कटाई कर केमिकल का लेप लगाया गया है। इनमें लंगड़ा, बादामी, चौसा, दशहरी, तोतापरी और सुंदरजा आम की प्रजातियों पर प्रयोग किया है।

आम की गुठलियां सहेजने के लिए इन नंबरों पर करें फोन

कृषि कॉलेज ने लोगों से अपील की है कि वे आम को खाकर गुठलियां इकट्‌ठी करने के लिए दो नंबरों पर फोन कर सकते हैं। इनमें 98271-60450 और 07752-354379 का हेल्पलाइन जारी किया गया है। इस नंबर पर फोन मिलाने पर कर्मचारी घर आएंगे या गुठलियां संग्रहित करने वाली जगह से इसे उठाकर एग्रीकल्चर कॉलेज तक लाएंगे। यहां से इनके पौधे बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

चौराहों पर कंटेनर बांटेंगे कर्मचारी घर भी भेजेंगे


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