दुनिया को बदलते ये 10 उभरते सितारे

Bilaspur News - टाइम मैग्जीन ने नई पीढ़ी के दस ऐसे दिग्गजों पर रोशनी डाली है जिन्होेंने अपने काम से कम समय में अलग जगह बनाई है। इनमें...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 06:45 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news these 10 rising stars changing the world
टाइम मैग्जीन ने नई पीढ़ी के दस ऐसे दिग्गजों पर रोशनी डाली है जिन्होेंने अपने काम से कम समय में अलग जगह बनाई है। इनमें शामिल हैं- ब्रिटेन के अश्वेत गायक स्टॉर्मजी, महिलाओं के शोषण को उकेरने वाली आर्टिस्ट जैनब फासिकी, बिजनेस मेंं एकाधिकार का विरोध करने वाली लीना खान, व्लादीमीर पुतिन सरकार के भ्रष्टाचार को सामने लाने वाले एलेक्जेंडर गोर्बुनोव और मलेरिया के लक्षणों की पहचान का आसान तरीका खोजने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर ब्रायन गिट्‌टा।

संगीत के राजदूत

Ãस्टॉर्मजी- 26 वर्ष|ब्रिटेन|रैपर

स्टॉर्मजी के नाम से मशहूर रैपर माइकेल ओमारी की गिनती ब्रिटेन के सबसे कामयाब गायकों में होती है। वे विश्व के सबसे बड़े म्यूजिक फेस्टिवल ग्लोस्टनबरी में शामिल होने वाले ब्रिटेन के पहले रैपर हैं। उन्हें म्यूजिक की शैली- ग्राइम का राजदूत कहते हैं। ब्रिटेन मेंं फैलने के साथ ग्राइम डेनमार्क, स्वीडन, आस्ट्रेलिया में लोकप्रिय है। स्टॉर्मजी ने तेजी से शोहरत की बुलंदियों को छुआ है। उनका अलबम चार्ट में नंबर एक पर आ चुका है।

जीवन बचाने की मुहिम

Ãअमांडा-33 वर्ष|आस्ट्रेलिया|एक्टिविस्ट

अमांडा जॉनस्टोन तस्मानिया की हैं। वहां युवाओं में आत्महत्या की दर सबसे अधिक है। उनके तीन मित्रों ने आत्महत्या कर ली थी। इस पर अमांडा ने हर दिन शाम चार बजे परिचितों के ग्रुप को टेक्स्ट मैसेज भेजकर स्वयं की मानसिक स्थिति का हाल एक से दस की रेटिंग पर देने के लिए कहा। रेटिंग से लोगों की स्थिति का पता लगता है। उन्हें मदद मिल सकती है। इस काम के लिए अमांडा ने 2017 में एक मुफ्त एप-बी अ लूपर लान्च किया है।

म्यूजिक की ग्राइम शैली को पॉपुलर किया। पिछले दो वर्ष में उन्हें कई अवॉर्ड मिल चुके हैं।

उन्होंने जिंदगी से हताश लोगों का हौसला बढ़ाने की मुहिम छेड़ी है। उनके एप के 76 देशों में यूजर हैं।

डिजाइन की चैम्पियन

Ãसैली काने- 32 वर्ष|सेनेगल|डिजाइनर

आर्टिस्ट और फैशन डिजाइनर काने की डिजाइनों में इतिहास के प्रति उनके झुकाव की झलक मिलती है। 2012 में सेनेगल की राजधानी डैकर में उनके पहले क्लॉथिंग कलेक्शन में परंपरा के साथ भविष्य के मेल ने लोगों का ध्यान खींचा था। उसमें सैनिक परिधान, शहरी स्ट्रीट फैशन, फैंटेसी कॉस्टयूम शामिल थे। 2017 में काने ने डैकर में शो रूम खोला। अब उनके परिधान यूरोप, अमेरिका और नाइजीरिया में बिकते हैं।

पुतिन की खिलाफत

Ãए गोर्बुनोव- 27 वर्ष|रूस|एक्टिविस्ट

उनके सोशल मीडिया पोस्ट से रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन की सरकार बेहद परेशान है। वे भ्रष्टाचार के लिए सरकार पर प्रहार करते हैं। एलेक्जेंडर गोर्बुनोव के टि्वटर पर दस लाख फॉलोअर हैं। रूसी राजनीति की तीखी आलोचना करने वाले उनके नए यूट्यूब चैनल को 20 लाख से अधिक व्यू मिल चुके हैं। वे बीमारी के कारण व्हील चेयर का उपयोग करते हैं। गोर्बुनोव के माता-पिता के यहां अप्रैल में पुलिस ने छापा मारा था।

उनके परिधानों में परंपरा और आधुनिकता का मेल है। उन्होंने एक छोटी फिल्म भी बनाई है।

उनका कहना है, बहुत लोग मेरे विचारों से सहमत हैं। इससे देश के भविष्य को लेकर उम्मीद बंधती है।

संघर्ष की ताकत

Ãनिशिमुरा- 18 वर्ष|जापान|खिलाड़ी

2017 में लॉस एंजिलिस में स्केटबोर्डिंग करते हुए आओरी निशिमुरा के बाएं घुटने में गंभीर चोट लगी थी। तीन माह पहले ही उन्होंने मिनिआपोलिस में दसवें खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। वे कहती हैं, मुझे डर था कहीं कॅरिअर ही खत्म न हो जाए। उन्होंने सर्जरी के छह माह बाद अभ्यास शुरू कर दिया। निशिमुरा ने इस वर्ष रियो डि जेनेरियो में स्ट्रीट लीग स्केटबोर्डिंग में गोल्ड मैडल जीत लिया। उन्होंने 7 वर्ष की आयु में स्केटिंग की शुरुआत की थी।

कलाकृतियों से बदलाव

Ãजैनब- 25 वर्ष|मोरक्को|कलाकार

जैनब फासिकी के सृजन से प्रतिरोध झांकता है। फ्रेंच और अरबी में प्रकाशित उनका नया ग्राफिक उपन्यास-हशौमा महिलाओं से हिंसा और सेंसरशिप पर रोशनी डालता है। अपने नग्न पोर्ट्रेट में वे कैसाब्लांका शहर की ऊपर से निगरानी कर रही हैं। फासिकी ने चार वर्ष की आयु से पेंटिंग शुरू कर दी थी। उन्होंने महिलाओं के कई नग्न चित्र बनाए हैं। उन्होंने 2018 में महिला कलाकारों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।

इच्छाशक्ति के बूते कॅरिअर को खत्म होने से बचाया। वे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

उन्होंने मोरक्को में महिलाओं के अधिकारों और शोषण को अपनी कलाकृतियों में दिखाया है।

, बिलासपुर, रविवार, 13 अक्टूबर 2019

बड़े बिजनेस से मोर्चा

Ãलीना खान- 29 वर्ष|यूएस|वकील

उनका कहना है कि विराट कार्पोरेट कंपनियां बाजारों को अपनी मर्जी से चला सकती हैं। वे छोटी कंपनियों को कारोबार से बाहर कर देती हैं। येल ला स्कूल की स्टूडेंट लीना खान ने 2017 में येल ला जर्नल में अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों के एकाधिकार के खिलाफ 24000 शब्दों का लेख लिखा था। खान अब बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर नजर रखने वाली अमेरिकी संसद की एंटी ट्रस्ट सबकमेटी की वकील हैं।

अलबेली आवाज

Ãडावोन टाइन्स-32 वर्ष|यूएस|गायक

स्कूल में शिक्षक उनकी आवाज के असाधारण उतार-चढ़ाव से हतप्रभ रह जाते थे। वे आज अमेरिका के सबसे उत्कृष्ट शास्त्रीय गायक माने जाते हैं। छह फुट दो इंच लंबे अश्वेत गायक डावोन को उच्च कोटि की क्लासिकल क्रिश्चियन धुन बनाने में आनंद आता है। वे साधारण ऑपेरा स्टार नहीं हैं। उन्होंने अभी हाल में लैंगस्टन ह्यूज की कविता पर 70 मिनट का संगीत और अभिनय पर आधारित ऑपेरा-द ब्लैक क्लाउन पेश किया था।

उन्होंने बड़ी कंपनियों को चुनौती दी है। वे कारोबार में एकाधिकार का विरोध करती हैं।

उन्होंने शास्त्रीय संगीत को नए अंदाज में पेश किया है। वे यूएस के सबसे लोकप्रिय गायक हैं।

अधिकारों को स्वर

Ãविटार- 24 वर्ष|ब्राजील|पॉप स्टार

ब्राजील की ड्रेग क्वीन और पॉप स्टार ने अपने संगीत और तीखे राजनीतिक तेवरों को एक स्वर में पिरोया है। वे समलैंगिकों की आवाज हैं। पाब्लो विटार के 50 करोड़ स्पोटीफाई स्ट्रीम और एक अरब यूट्यूब व्यू हैं। वे ब्राजील की धुनों को अमेरिकी पॉप म्यूजिक के साथ पेश करती हैं। उनके इंस्टाग्राम पर 90 लाख फॉलोअर हैं। राष्ट्रपति बोलसोनारो के बारे में विटार कहती हैं, ऐसे राष्ट्रपति के कारण मुझे ब्राजीलियन होने पर शर्म आती है।

आसान इनोवेशन

Ãगिट्‌टा- 27 वर्ष|युगांडा|इंजीनियर

ब्रायन गिट्‌टा ने खून की जांच के बिना मलेरिया का पता लगाने का तरीका खोज निकाला है। उनके नए आविष्कार के लिए केवल जूते के डिब्बे के आकार का डिवाइस-मेटियोस्कोप और एक स्मार्ट फोन की जरूरत पड़ी है। डिवाइस के क्रेडल पर मलेरिया के लक्षणों से पीड़ित व्यक्ति की उंगली रखते हैं। यह एक चुंबक और लाल रोशनी की बीम के जरिये शरीर में मलेरिया परजीवी के कारण रक्त कोशिकाओं में हुए परिवर्तन को खोज लेता है।

ब्राजील के संगीत को विश्व में पॉपुलर करने वाली विटार तीखे बयानों के लिए भी विख्यात हैं।

उनके आविष्कार ने मलेरिया का पता लगाने के लिए खून की जांच का विकल्प पेश किया है।

अमेरिका में बच्चों की देखभाल पर आय का एक तिहाई तक खर्च

उत्पादकता में कमी से अर्थव्यवस्था को हर साल 57 अरब डॉलर की हानि

केटी रीली, बेलिंडा लुस्कॉम्ब

वर्तमान अमेरिकी जनजीवन का सबसे मुश्किल काम बच्चों की अच्छे तरह से देखभाल करना हो गया है। कुछ अमीर लोगों को छोड़कर अधिकतर लोगों के लिए बच्चों का पालन-पोषण बेहद मुश्किल होता जा रहा है। 28 राज्यों में छोटे बच्चे की देखभाल का एक साल का खर्च एक वर्ष की कॉलेज की फीस के बराबर है। चाइल्ड केयर संगठन के अनुसार बच्चों की देखभाल का राष्ट्रीय औसत खर्च 9000 से 9600 डॉलर प्रतिवर्ष है। कई माता-पिता इससे बहुत अधिक खर्च करते हैं। कई लोगों का यह खर्च आमदनी का एक तिहाई तक है। बोस्टन की 26 वर्षीय एमी डेवीयू इस साल अपने दो वर्ष के बच्चे की देखभाल पर 21000 डॉलर खर्च करेंगी। यह उनके वेतन का एक तिहाई है।

अमेरिका में चाइल्ड केयर का इंफ्रास्ट्रक्चर पेरेंट्स पर बहुत भारी पड़ता है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होता है। बिजनेस एक्जीक्यूटिव की संस्था रेडी नेशन के मुताबिक हर साल 57 अरब डॉलर की आय, उत्पादकता और राजस्व की हानि होती है। चाइल्ड केयर का बोझ अर्थव्यवस्था को दो मोर्चों पर प्रभावित करता है। नागरिकों की उत्पादकता कम होती है। ज्यादा से ज्यादा लोग सरकारी सहायता कार्यक्रमों की शरण में जाते हैं। अर्थव्यवस्था के अलावा भावी पीढ़ी भी प्रभावित हो रही है। युवा अमेरिकियों के बच्चे कम हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के लिए किए गए एक सर्वे में बताया गया कि 2018 में 32 वर्ष की आयु के लोगों के बीच जन्म दर सबसे कम रही।

अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग चाइल्ड केयर को लोगों के लिए ठीक मानता है यदि वह परिवार की आय से 7% से अधिक न हो। लेकिन, अधिकांश पेरेंट्स इस मापदंड की खिल्ली उड़ाते हैं। ब्रांडीस यूनिवर्सिटी चाइल्ड इंस्टीट्यूट की 2018 की रिपोर्ट बताती है, लगभग दो तिहाई माता-पिता बच्चे पर इससे अधिक खर्च करते हैं। केंद्र सरकार ने चाइल्ड केयर के लिए अधिक मदद देने का कार्यक्रम दो बार शुरू किया लेकिन इसे बंद करना पड़ा।

दूसरी तरफ चाइल्ड केयर होम के काम में बहुत आय नहीं है। टिपटॉन एडेप्टिव डे केयर सेंटर की डायरेक्टर डेबोराह वांडरगास्ट बताती हैं, सरकारी सब्सिडी के बिना यह बिजनेस मॉडल चलाना संभव नहीं है। वे तीन से चार वर्ष के बच्चे की देखभाल के लिए हर सप्ताह 160 डॉलर लेती हैं। फिर भी, उन्हें फायदा नहीं है।

(टाइम और टाइम लोगो टाइम के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क हैं। इनका उपयोग अनुबंध के तहत किया गया है।)

बीस लाख पेरेंट्स को नौकरी छोड़नी पड़ी

अमेरिकन प्रोग्रेस सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में करीब बीस लाख पेरेंट्स को बच्चे की जिम्मेदारी निभाने के लिए जॉब छोड़ना पड़ा, बदलना पड़ा या नौकरी के ऑफर से इनकार करना पड़ा। 2017 में देश में छह वर्ष से कम आयु के लगभग एक करोड़ 50 लाख बच्चे थे। इनके माता-पिता नौकरी कर रहे थे।

केटी रीली, बेलिंडा लुस्कॉम्ब

वर्तमान अमेरिकी जनजीवन का सबसे मुश्किल काम बच्चों की अच्छे तरह से देखभाल करना हो गया है। कुछ अमीर लोगों को छोड़कर अधिकतर लोगों के लिए बच्चों का पालन-पोषण बेहद मुश्किल होता जा रहा है। 28 राज्यों में छोटे बच्चे की देखभाल का एक साल का खर्च एक वर्ष की कॉलेज की फीस के बराबर है। चाइल्ड केयर संगठन के अनुसार बच्चों की देखभाल का राष्ट्रीय औसत खर्च 9000 से 9600 डॉलर प्रतिवर्ष है। कई माता-पिता इससे बहुत अधिक खर्च करते हैं। कई लोगों का यह खर्च आमदनी का एक तिहाई तक है। बोस्टन की 26 वर्षीय एमी डेवीयू इस साल अपने दो वर्ष के बच्चे की देखभाल पर 21000 डॉलर खर्च करेंगी। यह उनके वेतन का एक तिहाई है।

अमेरिका में चाइल्ड केयर का इंफ्रास्ट्रक्चर पेरेंट्स पर बहुत भारी पड़ता है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होता है। बिजनेस एक्जीक्यूटिव की संस्था रेडी नेशन के मुताबिक हर साल 57 अरब डॉलर की आय, उत्पादकता और राजस्व की हानि होती है। चाइल्ड केयर का बोझ अर्थव्यवस्था को दो मोर्चों पर प्रभावित करता है। नागरिकों की उत्पादकता कम होती है। ज्यादा से ज्यादा लोग सरकारी सहायता कार्यक्रमों की शरण में जाते हैं। अर्थव्यवस्था के अलावा भावी पीढ़ी भी प्रभावित हो रही है। युवा अमेरिकियों के बच्चे कम हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के लिए किए गए एक सर्वे में बताया गया कि 2018 में 32 वर्ष की आयु के लोगों के बीच जन्म दर सबसे कम रही।

अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग चाइल्ड केयर को लोगों के लिए ठीक मानता है यदि वह परिवार की आय से 7% से अधिक न हो। लेकिन, अधिकांश पेरेंट्स इस मापदंड की खिल्ली उड़ाते हैं। ब्रांडीस यूनिवर्सिटी चाइल्ड इंस्टीट्यूट की 2018 की रिपोर्ट बताती है, लगभग दो तिहाई माता-पिता बच्चे पर इससे अधिक खर्च करते हैं। केंद्र सरकार ने चाइल्ड केयर के लिए अधिक मदद देने का कार्यक्रम दो बार शुरू किया लेकिन इसे बंद करना पड़ा।

दूसरी तरफ चाइल्ड केयर होम के काम में बहुत आय नहीं है। टिपटॉन एडेप्टिव डे केयर सेंटर की डायरेक्टर डेबोराह वांडरगास्ट बताती हैं, सरकारी सब्सिडी के बिना यह बिजनेस मॉडल चलाना संभव नहीं है। वे तीन से चार वर्ष के बच्चे की देखभाल के लिए हर सप्ताह 160 डॉलर लेती हैं। फिर भी, उन्हें फायदा नहीं है।

(टाइम और टाइम लोगो टाइम के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क हैं। इनका उपयोग अनुबंध के तहत किया गया है।)

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