हवाई जहाज की तरह ट्रेनों में लगेंगे वैक्यूम बायो टॉयलेट

3 वर्ष पहले
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पानी की बचत और साफ-सफाई के लिए ट्रेनों में अब हवाई जहाज की तरह वैक्यूम बायो टॉयलेट लगाए जाएंगे। प्रयोग के तौर इसे उत्तर रेलवे की कुछ ट्रेनों में लगाया गया है। इससे साफ-सफाई में काफी सहूलियतें मिल रहीं है। पानी भी इसमें कम खर्च होने का अनुमान है। इस वर्ष 23 सौ नए वैक्यूम बायो टॉयलेट्स बनाए जाने हैं। ये टॉयलेट्स पूर्वी रेलवे के लिलुहा वर्कशाप में बन रहे हैं।

ट्रेनों में साफ-सफाई के लिए रेलवे ने बायाे टॉयलेट लगवाना शुरू किया है। जोन की ज्यादातर ट्रेनों में बायो टायलेट्स लग चुके हैं। इसमें बाथरूम के अंदर बदबू भरने से यात्री परेशान हो रहे थे। बिलासपुर जोन के कोचिंग यार्ड ने ट्रेनों के बाथरूम और बायो टॉयलेट टैंक में नया इनोवेशन कर बाथरूम के अंदर शुद्ध हवा के प्रवेश और बाहर निकालने के लिए वैक्यूम पाइप लगाए गए। इसका फायदा यह हुआ कि बाथरूम से बदबू की समस्या दूर हो गई। रेलवे बोर्ड ने इस इनोवेशन को देशभर में लागू कर सभी कोचिंग डिपो को बदलाव लाने के निर्देश दिए। इसके बाद भी सफाई और पानी के अधिक उपयोग पर कमी लाने के लिए नई तकनीक सोची गई। ट्रेनों में अब हवाई जहाज जैसे वैक्यूम बायो टायलेट्स लगाए जा रहे हैं। उत्तर रेलवे की राजधानी एक्सप्रेस व कुछ जनशताब्दी ट्रेनों में प्रयोग के तौर पर इसे लगाया गया है। इस टॉयलेट का सिस्टम कुछ ऐसा किया जा रहा है कि इसमें सफाई के लिए पानी बाथरूम का दरवाजा खोलने और बंद करने से संबंधित होगा। इसमें उतना ही पानी लगेगा जितना आवश्यक होगा। इससे सफाई में दिक्कत नहीं होगी। इसके अलावा बाहरी हिस्से की फ्लशिंग भी स्वयं ही हो जाएगी।

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