आप जो पानी पी रहे वह साफ है या नहीं, मुफ्त में करा सकेंगे सीएमडी कॉलेज में जांच

Bilaspur News - एजुकेशन रिपोर्टर | बिलासपुर आप जो पानी पी रहे हैं, उसकी जांच कर लें कि वह पीने योग्य है भी या नहीं, वरना यही...

Nov 18, 2019, 06:51 AM IST
एजुकेशन रिपोर्टर | बिलासपुर

आप जो पानी पी रहे हैं, उसकी जांच कर लें कि वह पीने योग्य है भी या नहीं, वरना यही बीमारियों का कारण बन रहे हैं। यह तथ्य वैज्ञानिक रूप से सत्यापित है कि 80 प्रतिशत बीमारियां प्रदूषित पेयजल के उपयोग से हो रही हैं। इसे ध्यान में रखते हुए सीएमडी कॉलेज ने लोगों के लिए एक सुविधा की शुरुआत की है। काॅलेज ने पेयजल की नि:शुल्क जांच करने का जिम्मा उठाया है। सीएमडी कॉलेज में जो भी अपने घर के पानी का सैंपल लाएगा, उसकी वहां मुफ्त जांच होगी। इससे आप पानी के वजह से हो रही बीमारियों बच सकेंगे। जिसे भी अपने घर में जो पेयजल का उपयोग कर रहे हैं, वह अगर उसकी जांच करवाना चाहते हैं, तो कॉलेज में सुबह 11 से शाम 4 बजे तक सैंपल जमा कर सकते हैं।

सीएमडी कॉलेज की लैब में पानी की जांच करते छात्र।

रसायन विभाग के छात्र करेंगे जांच

सीएमडी कॉलेज के चेयरमैन पं. संजय दुबे और प्राचार्य डॉ. संजय सिंह ने बताया कि पानी की वजह से ज्यादा लोगों की तबीयत खराब होने की जानकारी मिल रही है। इसके मद्देनजर यह सुविधा लोगों को दी जा रही है। रसायन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. हर्षा शर्मा ने बताया कि पानी की जांच रसायन विभाग में की जाएगी। पानी की जांच के लिए सभी केमिकल और इंस्टूमेंट कॉलेज में उपलब्ध है। सैंपल जमा करने के तीन दिन के अंदर रिपोर्ट मिल जाएगी। लोग चाहें तो नगर निगम द्वारा जनता को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता, अपने आस-पास के नलकूप, नगर पालिका की सप्लाई, हैंडपंप, सबमर्सिबल आदि से सप्लाई होने वाला पानी पीने योग्य है या नहीं ? अथवा उसमें कौन से तत्व मानक के अनुरूप हैं या नहीं? इसकी जांच करा सकते हैं।

आयरन की वजह से लीवर को नुकसान

डॉ. शर्मा ने बताया कि भूगर्भ जल का प्रदूषण लोगों को बीमार बना रहा है। वहीं घरों के हैंडपंप से निकलने वाले पानी की मात्रा में आयरन की मात्रा ज्यादा पाई जा रही है। लिहाजा ज्यादा आयरन की वजह से लोगों में लीवर के साथ ही जोड़ों के दर्द की बीमारी हो रही है। पानी में मिले हुए कीटनाशक हमारे शरीर पर दूरगामी प्रभाव डालते हैं। दूषित पेयजल से नर्वस सिस्टम तो प्रभावित होता ही है, इसके अलावा प्रजनन क्षमता तक प्रभावित हो सकती है। भूमिगत संक्रमित जल में लेड की मात्रा भी पाई जाती है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों और महिलाओं पर पड़ता है। पीने योग्य पानी में कभी-कभी नाइट्रेट भी मिले होते हैं। यह फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशु के लिए तो प्राणघातक सिद्ध हो सकता है।

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