बाघों की गणना 17 से, 816 कैमरे लगेंगे
अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की गणना 17 मार्च से शुरू होगी। दो दिन में यानी 19 मार्च तक पूरे जंगल में 816 ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरे लगने के बाद 25 दिनों तक गणना चलेगी। कितने बाघों की तस्वीरें कैद हुईं इसकी रिपोर्ट आने में करीब तीन महीने लगेंगे। बाघों के साथ अन्य वन्यजीवों की तस्वीरें भी कैद होंगी। बता दें कि 2018 के बाद यह एनटीसीए के निर्देश पर पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ यह गणना कर रहे हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (विश्व प्रकृति निधि) एटीआर प्रबंधन का सहयोग कर रहा है। 816 में 250 ट्रैप कैमरे डब्ल्यूडब्ल्यूएफ लगा रहा है। साथ ही चार लोग लगातार मॉनिटरिंग भी करेंगे। 2020 में हो रही इस गणना की तैयारी एटीआर प्रबंधन ने कर ली है।
इस बार ऐसे होगी गणना : कैमरे लगाने से पहले तीन दिन अप्रत्यक्ष चिन्ह का सर्वेक्षण होता है। वन रक्षक पता लगाते हैं कि किस रूट में वन्यजीवों के आने-जाने की ज्यादा संभावना होती हैं। फिर उस ग्रीड का चयन करते हैं। नदी-नाले पगडंडी के आसपास ही कैमरे लगाए जाते हैं। एक कैमरे से दूसरे कैमरों की दूरी करीब 15 फीट होती है। कैमरे दोनों तरफ लगाए जाते हैं ताकि बाघ का राइट और लेफ्ट दोनों साइड दिखाई दे।
कैसे करते हैं बाघों की पहचान : हर बाघ के शरीर की धारियां अलग होती हैं। इसलिए दोनों तरफ कैमरे लगाए जाते हैं ताकि दोनों ओर की तस्वीरें दिखाई दें। फिर मिलान करते हैं, अगर धारियां नहीं मिलती हैं तो बाघ भी अलग होते हैं। एक ही धारियां मिलने पर एक ही बाघ गिना जाता है। दूसरा कारण ये भी है कि अगर बाघ ज्यादा क्षेत्र में भ्रमण कर रहा है तो इससे ये अनुमान लगाया जाता है कि जंगल में खाने-पीने की भी कमी है।
शिवतराई में दी गई ट्रेनिंग
शुक्रवार को शिवतराई में सभी रेंजर, वन रक्षक और अन्य कर्मचारियों को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञों ने ट्रेनिंग दी और सावधानी के तरीके बताए। बैठक में फील्ड डॉयरेक्टर संजीता गुप्ता, डिप्टी डॉयरेक्टर विजया रात्रे, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी उपेंद्र दुबे, एसडीओ सुनील बच्चन, कोर क्षेत्र के एसडीओ डीएन त्रिपाठी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। सभी को गणना के बारे में पूरी जानकारी दी गई। डिप्टी डॉयरेक्टर विजया रात्रे ने बताया कि हमारे पास कैमरे हैं इस बार सिर्फ 50 कैमरे खरीद रहे हैं, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ भी हमारी मदद कर रहा है। 17 मार्च से गणना शुरू होगी।