बिलासपुर / कानन पेंडारी चिड़ियाघर में मादा भालू की मौत, 4 दिन पहले ही लेकर आए थे

कानन पेंडारी चिड़ियाघर कानन पेंडारी चिड़ियाघर
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कानन पेंडारी चिड़ियाघरकानन पेंडारी चिड़ियाघर

  • वन्य प्राणियों पर संकट : पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया स्ट्रेस के कारण हुई मौत, खाना भी नहीं खा रही थी
  • खरसिया के देवगांव से रेस्क्यू कर लाए थे,  75 दिन में चिड़ियाघर के अंदर छठवीं मौत, फिर सैंपल भेजा

दैनिक भास्कर

Dec 27, 2019, 09:48 AM IST

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी चिड़ियाघर में वन्यजीवों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक-एक कर वन्यजीव दम तोड़ रहे हैं। अब गुरुवार को एक मादा भालू की मौत हो गई। 75 दिन में चिड़ियाघर के अंदर यह छठवीं मौत है। हर बार वन्यजीवों की मौत के पीछे स्ट्रेस या फिर अन्य कोई बीमारी बता दी जाती है। इसके बाद पाेस्टमार्टम कर उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाता है और सैंपल भेज देते हैं। यह अलग बात है कि पिछले डेढ़ साल से एक की भी रिपोर्ट नहीं आई है। 

सुबह कर्मचारी पहुंचा तो मृत देखा, दोपहर में हुअा पोस्टमार्टम

मादा भालू को 4 दिन पहले 22 दिसंबर को खरसिया के देवगांव से रेस्क्यू कर लाया गया था। सुबह शिफ्ट में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों ने उसे मृत देखा और इसकी जानकारी अधीक्षक को दी। तड़के 3.45 बजे मादा भालू ने दम तोड़ दिया था। दोपहर 12 बजे अधीक्षक और सीसीएफ पीके केशर चिड़ियाघर पहुंचे और आगे की प्रक्रिया शुरू करवाई। चिड़ियाघर की डॉक्टर स्मिता सिन्हा और पशु चिकित्सक पीयूष दुबे ने मादा भालू का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद शव को जलाकर अंतिम संस्कार किया गया। पोस्टमार्टम में मौत का कारण शॉक लगना बताया गया है।

चिड़ियाघर के अधीक्षक विवेक चौरसिया ने कहा कि भालू को हाई लेवल का स्ट्रेस था। पिंजरे के अंदर वह उत्पात मचा रही थी और खाना भी सही ढंग से नहीं खा रही थी। शरीर में खाना और पानी की कमी के साथ-साथ वह तनाव में थी। इसी कारण उसकी मौत हुई है। बुधवार को भालू के चेकअप के लिए पशु चिकित्सक पियूष को बुलाया था। उन्होंने उसे ड्रिप भी चढ़ाई। लेकिन आज उसने दम तोड़ दिया। उच्च परीक्षण के लिए सैंपल आईवीआरआई बरेली भेजा जाएगा। 

इस हिंसक मादा भालू को खरसिया के देवगांव से कानन की टीम रेस्क्यू कर 22 दिसंबर को दोपहर 12 बजे लाई थी। अधीक्षक विवेक चौरसिया ने बताया कि रायगढ़ लाना और अचानक से पिंजरे में बंद कर देना के कारण वह स्ट्रेस में चली गई उसने खाना-पीना भी बंद कर दिया। खूंखार थी इसलिए हमने उसे अन्य भालुओं के साथ केज में नहीं रखा। नहीं तो वह दूसरे भालुओं के साथ झगड़ा करती और उनकी भी जान ले सकती थी इसलिए हमने उसे रेस्क्यू सेंटर में पिंजरे में बंद कर रखा था। 

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