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प्लास्टिक कचरा लाओ और भरपेट खाना खाओ, देश के पहले गार्बेज कैफे की शुरूआत

10 महीने पहले
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अंबिकापुर में खुला देश का पहला गार्बेज कैफे
  • शहर के प्रतीक्षा बस स्टैंड पर खोला गया कैफे, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव उद्घाटन करके भोजन किया
  • नगर निगम की शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने पहल, सफाई के मामले में इंदौर के बाद अंबिकापुर दूसरे नंबर पर

अंबिकापुर. प्लास्टिक कचरा लाओ और भरपेट भोजन खाओ। सुनने और पढ़ने में यह बात अजीब जरूर लग सकती है, लेकिन छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर के गार्बेज कैफे में इसकी शुरुआत हो गई है। यह अपने आप में देश का पहला ऐसा कैफे है, जो प्लास्टिक कचरे के बदले में लोगों को नाश्ता और खाना मुहैया कराएगए। नगर निगम की शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने की यह पहल है। सफाई के मामले में इंदौर के बाद दूसरे नंबर पर अंबिकापुर का नाम आता है।

1) पहले दिन पांच लोगों ने प्लास्टिक कचरा देकर किया भोजन

शहर के प्रतीक्षा बस स्टैंड पर खुले गार्बेज कैफे का प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने बुधवार को उद्घाटन किया। इस दौरान पहले ही दिन पांच लोग प्लास्टिक कचरा लेकर कैफे पहुंच गए। इन सभी ने स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव के साथ गार्बेज कैफे में भोजन भी किया। स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने कहा कि वह भोजन की क्वॉलिटी चेक करना चाहते थे, जो काफी अच्छी है। उन्होंने इसे नगर निगम की बेहद सराहनीय पहल बताया। साथ ही कहा कि इससे पूरे देश को एक संदेश जाएगा।

कैफै में 1 किलो प्लास्टिक लाने पर खाना दिया जाएगा। वहीं, आधा किलो प्लास्टिक लाने पर नाश्ता कराया जाएगा। नाश्ते में समोसा, आलू चाप, ब्रेड चाप, इडली मिलेगी। एक किलो प्लास्टिक के बदले में दो सब्जी, 4 रोटी, हाफ प्लेट चावल, दाल, सलाद, अचार, पापड़, मीठा दही दिया जाएगा।  

कम कीमत पर भी लोगों को भोजन

  • सादा थाली (40 रुपए) : सादा सब्जी, एक प्लेट चावल, दाल, अचार, सलाद।
  • सादा थाली (50 रुपए) : 2 सादा सब्जी, 4 रोटी, हाफ प्लेट चावल, दाल, सलाद, अचार, पापड़।
  • सादा थाली (70 रुपए) : पनीर की सब्जी, 2 सादा सब्जी, 4 रोटी, हाफ चावल, दाल, अचार, सलाद।
  • स्पेशल थाली (100 रुपए) 2 तरह की पनीर की सब्जी, एक सादा सब्जी, 4 घी लगी रोटी, हाफ जीरा राइस, दाल, फ्राई, सलाद, अचार, पापड़, मीठा दही।

नगर निगम शहर में भूखे पेट सोने वालों और गरीबों को मुफ्त भोजन कराने की योजना पर लंबे समय से काम कर रहा था। निगम के सदन में भी इस बात को उठाया गया। हालांकि फिर तय हुआ कि निशुल्क भोजन समस्या का समाधान नहीं हो सकता। अंबिकापुर देश में इंदौर के बाद स्वच्छता के मामले में दूसरे नंबर पर है। इसके बावजूद यहां प्लास्टकि कचरा की सबसे बड़ी समस्या है। पॉलिथीन और पॉली बैग्स हटाने को लेकर कवायद जारी है। ऐसे में प्लास्टिक कचरे को हटाने के लिए इस योजना को अमली जामा पहनाया गया। 

इससे पहले मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में इस तरह की ‘कचरा लाओ मुफ्त में भोजन पाओ’ योजना शुरू की गई है। इसमें सड़क पर बिखरा कचरा प्लास्टिक की थैली में नगर निगम में देने पर फूड कूपन दिया जाता है, जिसके जरिए लोग निगम द्वारा चलाई जा रही रसोई में मुफ्त भोजन कर सकते हैं।

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