छत्तीसगढ़ / कश्मीर की टेरर फंडिंग के चार आरोपियों को नहीं मिली जमानत



Four accused of Terror funding in Kashmir did not get bail
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Four accused of Terror funding in Kashmir did not get bail

  • मुखबिर की सूचना के आधार पर गिरफ्तार किए गए थे आरोपी

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 01:11 AM IST

बिलासपुर . जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों तक टेरर फंडिंग के जरिए रकम पहुंचाने के चार आरोपियों की जमानत अर्जी हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। बिलासपुर के एक हॉस्पिटल में काम करने वाले दो युवकों के खाते में लाखों रुपए का ट्रांजेक्शन होता था और राशि दिल्ली व कश्मीर के एटीएम से निकाली जाती थी। पुलिस ने इस मामले में बिलासपुर के साथ ही जांजगीर-चांपा और कश्मीर से आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

 

चार आरोपियों ने जमानत अर्जी लगाई थी, यह खारिज कर दी गई है। आरोपी अभी सेंट्रल जेल में हैं। सिविल लाइन पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बिलासपुर के एक निजी हॉस्पिटल में काम करने वाले जांजगीर निवासी मनेंद्र यादव व संजय देवांगन के कई बैंक खाते खोले हैं, इसमें लाखों रुपए का ट्रांजेक्शन होता है, लेकिन राशि दिल्ली और कश्मीर के एटीएम से निकाली जाती है। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्हें इसके लिए कमीशन मिलता है। 


पता चला कि छत्तीसगढ़ से पाकिस्तान के आतंकवादी के लिए टेरर फंडिंग चल रही है। बाद में जांजगीर-चांपा से अवधेश दुबे, मनिन्द्र यादव, संजय देवांगन को पकड़ा गया। पुलिस को पूछताछ के दौरान पता चला कि संजय देवांगन का पाकिस्तान को भारतीय सेना की गोपनीय जानकारी देने वाले सतविंदर सिंह से संपर्क है। सतविंदर सिंह को जम्मू कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। सेंट्रल जेल में बंद मनींद्र यादव, संजय देवांगन, अवधेश दुबे व सतविंदर सिंह उर्फ बिट्‌टू ने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी प्रस्तुत की थी।  जस्टिस प्रशांत मिश्रा व जस्टिस गौतम चौरड़िया की बेंच ने शुक्रवार को मामले की गंभीरता के आधार पर इसे खारिज कर दिया है।

 

हाईकोर्ट ने मांगी पुिलस सुधार व रिक्त पदों पर भर्ती की जानकारी : सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाश सिंह के साथ ही 2013 में एक मामले में सुनवाई करते हुए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पुलिस सुधार, रिक्त पदों पर भर्ती, कार्य अवधि तय करने सहित अन्य दिशा-निर्देश दिए थे, लेकिन इसका अधिकांश राज्यों में पालन नहीं किया जा सका है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सभी हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की है।

 

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी सुनवाई करते हुए राज्य शासन को कई बिंदुओं पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पालन की स्थिति पर जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा है।  पुलिस के पास कानून का पालन कराने के साथ ही नागरिकों और सार्वजनिक और निजी संपत्तियों की सुरक्षा समेत कई महत्वपूर्ण दायित्व होते हैं, इसके लिए पुलिस का अधिकार दिए जाते हैं। कई बार इस अधिकार का दुरुपयोग करने की भी शिकायत मिलती है, लेकिन पुलिस के खिलाफ शिकायतों और उसके निराकरण की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं होती।
 

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