हाईकोर्ट / दुष्कर्म पीड़ित को गर्भपात की अनुमति, महिला की निजता-गरिमा का सम्मान जरूरी



High court gave permission to rape victim to miscarriage
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High court gave permission to rape victim to miscarriage

  • दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज होने के कारण हाईकोर्ट ने भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए
  • पहाड़ी कोरवा युवती के साथ शादी का झांसा देकर युवक करता आ रहा था दुष्कर्म

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2019, 05:55 AM IST

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने दुष्कर्म की वजह से गर्भवती हुई युवती को गर्भपात की अनुमति दी है। युवती को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया था। मेडिकल बोर्ड ने जांच के बाद रिपोर्ट सौंपी थी, इसमें करीब 19 सप्ताह का भ्रूण होने की जानकारी दी गई थी। जस्टिस गौतम भादुरी की बेंच ने आदेश में कहा है कि महिला की निजता, गरिमा और गौरव का सम्मान होना चाहिए।

 

पहाड़ी कोरवा युवती के साथ शादी का झांसा देकर युवक दुष्कर्म करता रहा। युवती ने उसे गर्भ ठहरने की जानकारी दी, लेकिन उसने शादी से इनकार कर दिया। युवती ने आरोपी युवक के खिलाफ कोरबा में प्रकरण दर्ज करवाया है। युवती ने गर्भपात की अनुमति देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। जस्टिस गौतम भादुरी की बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य शासन को केस डायरी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। युवती को 2 सितंबर को जांच के लिए कोरबा के जिला अस्पताल में जिला मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया था। बोर्ड ने जांच के बाद रिपोर्ट सौंपी थी।

 

बोर्ड ने करीब 19 सप्ताह का भ्रूण होने की जानकारी देते हुए कहा गया था कि एबार्शन किया जा सकता है। हाईकोर्ट के निर्देश पर उपस्थित हुए युवती ने कहा था कि वह एबार्शन करवाना चाहती है। युवती की तरफ से पैरवी करते हुए एडवोकेट धर्मेश श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों का हवाला देते हुए कहा था कि पीड़ित के दुष्कर्म की वजह से गर्भवती होने के कारण उसे एबार्शन की अनुमति दी जानी चाहिए, नहीं तो यह मानसिक क्षति का कारण बन सकता है। हाईकोर्ट ने भ्रूण के करीब 19 माह के होने, एबार्शन करने में किसी तरह का जोखिम नहीं होने के आधार पर उसे अनुमति दे दी है। उसे कोरबा के जिला अस्पताल में भर्ती कर उसकी सहमति लेने के बाद दो विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा एबार्शन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया है। दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज होने के कारण हाईकोर्ट ने भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।

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