नान घोटाला / हाईकोर्ट ने एसीबी से मांगी जांच की स्टेटस रिपोर्ट



High Court inquires status report from ACB
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High Court inquires status report from ACB

  • ईओडब्लू के अफसरों ने कोर्ट को भी बाकायदा सूचना दी है कि डीएसपी के खिलाफ किसी तरह की काेई कार्रवाई नहीं की

Dainik Bhaskar

Feb 12, 2019, 01:21 AM IST

बिलासपुर. नागरिक आपूर्ति निगम (नान) में कथित रूप से 36 हजार करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाते हुए लगाई गई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने एसीबी से जांच की स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब मामलों पर 22 फरवरी को सुनवाई होगी। सोमवार को एक याचिकाकर्ता वशिष्ठ नारायण मिश्रा की तरफ से अपनी याचिका वापस लेने की मांग की गई है। 

 

नान के रायपुर स्थित मुख्यालय समेत आसपास के जिलों में पदस्थ करीब डेढ़ दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों के दफ्तरों और आवास पर एसीबी और ईओडब्ल्यू ने 12 फरवरी 2015 को एक साथ छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान कुल 3 करोड़ 43 लाख 96 हजार 965 रुपए नगद बरामद हुए। करीब सभी से लाखों रुपए नगद, संपत्ति, एफडी, बीमा समेत अन्य दस्तावेज भी जब्त किए गए। मामले में एफआईआर दर्ज करते हुए 27 लोगों को आरोपी बनाया गया था। जांच के बाद इसमें से 16 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट प्रस्तुत की गई।

 

दो आईएएस डॉ. आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा के खिलाफ तो सरकार ने खुद ही अभियोजन की मंजूरी दी है। कार्रवाई के दौरान शुक्ला विभाग के सचिव और टुटेजा नान के एमडी थे। वहीं, 12 अधिकारियों और कर्मचारियों को आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज करते हुए गिरफ्तार भी किया गया। इस मामले में संस्था हमर संगवारी, सुदीप श्रीवास्तव, वीरेंद्र पाण्डेय व भीष्म नारायण मिश्रा ने जनहित याचिकाएं लगाई हैं। वहीं, आईएएस टुटेजा ने सिंगल बेंच से याचिका खारिज होने के बाद अपील की थी।

 

सभी पर एक साथ सुनवाई हो रही है। सोमवार को चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस पीपी साहू की बेंच में सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता वशिष्ठ नारायण मिश्रा की तरफ से अपनी याचिका वापस लेने के लिए अनुमति देने का आग्रह किया गया। वहीं, एक याचिकाकर्ता एडवोकेट सुदीप श्रीवास्तव ने वर्तमान में हो रही जांच की हाईकोर्ट द्वारा मॉनिटरिंग करने की मांग की गई। हाईकोर्ट ने वर्तमान में मामले की जांच कर रही एसीबी की एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब इस पर 22फरवरी को सुनवाई होगी।

 

शपथपत्र देने वाले डीएसपी पर रुकी कार्रवाई : नान घोटाला फोन टेपिंगकांड में ईओडब्लू के डीएसपी आरके दुबे पर कार्रवाई अटक गई है। शनिवार को ईओडब्लू के अफसरों ने दुबे निलंबन की तैयारी कर ली थी। बाद में अचानक कानूनी पेंच आने के कारण कार्रवाई रोक दी गई। हालांकि उनके निलंबन का पूरा प्लॉट तैयार कर लिया गया था। 

 

विभाग की अनुमति के बिना कोर्ट में हलफनामा देने का हवाला देते हुए निलंबन के आदेश जारी किए जाने थे। इसी में अड़चन आ गई। कोर्ट में अर्जी देना मात्र ही निलंबन का कारण नहीं बन सकता। इस बारे में कानूनी राय लेने के बाद अफसरों ने कार्रवाई रोकी। 


ईओडब्लू के अफसरों ने कोर्ट को भी बाकायदा सूचना दी है कि डीएसपी के खिलाफ किसी तरह की काेई कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि दुबे ने जिस दिन से हाईकोर्ट में ईओडब्लू के आईजी एसआरपी कल्लूरी और बाकी अफसरों का नाम लेकर जबरिया बयान लेने का आरोप लगाया है, उसी दिन से वे ऑफिस नहीं आ रहे हैं। उन्होंने किसी अफसरों से भी चर्चा नहीं की है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी तक उनके अचानक गायब होने से हैरान हैं। उन्होंने जिस दिन कोर्ट में हलफनामा देकर अफसरों पर झूठे केस में फंसाने का आरोप लगाया था, उसके अगले ही दिन उन्हें निलंबित किए जाने की चर्चा शुरू हो गई थी। 


आरोपियों की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी लगाने का हल्ला : टेपिंगकांड में नया पेंच आने के साथ जिन अफसरों के नाम सामने आए हैं, उन्हें लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही है। रविवार और साेमवार को जमकर चर्चा थी कि अफसरों की ओर से अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई गई है। इसी तरह टेपिंग कांड में नाम सामने आने के बाद आला अफसरों की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय है।

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