रेलवे / ट्रेनों में यात्रियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़; पेंट्रीकार में पटरियों के किनारे लगी हाइड्रेन लाइन के पानी से बनाया जा रहा भोजन

ट्रेनों में भरने वाले पानी से पेट्रीकार में भरा जा रहा पानी। ट्रेनों में भरने वाले पानी से पेट्रीकार में भरा जा रहा पानी।
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ट्रेनों में भरने वाले पानी से पेट्रीकार में भरा जा रहा पानी।ट्रेनों में भरने वाले पानी से पेट्रीकार में भरा जा रहा पानी।

  • लंबी दूरी की ट्रेनों में पेंट्रीकार संचालक हाइड्रेन लाइन के पानी से बर्तन धुलवाते हैं और उसी से बना रहे भोजन और नाश्ता
  • आजाद हिंद एक्सप्रेस में कचरे के पास रखे थे कटे हुए टमाटर, खाली पड़े थे पानी के जार, लोकल ब्रांड का मिला पानी

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2020, 01:05 PM IST

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार शाम 5 बजे पुणे से हावड़ा जा रही आजाद हिंद एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर एक पर रुकी। उसके बाद एक कर्मचारी ट्रेन से प्लेटफॉर्म की दूसरी तरफ हाइड्रेन लाइन की तरफ उतरा और एक पाइप से पेंट्रीकार के अंदर रखे पानी की टंकी भरी गई। पेंट्रीकार संचालक उसी गंदे पानी से भोजन पकवाते हैं और बर्तन की भी धुलाई करवाते हैं। लंबी दूरी की ट्रेनों परिचालन सहित अन्य दिशाओं को जाने वाली ट्रेनों की पेंट्रीकार में हाइड्रेन लाइन का ही पानी भरा जाता है। यह कभी-कभी नहीं, बल्कि हर दिन का मामला है। 

दरअसल, बिलासपुर रेलवे स्टेशन से लंबी दूरी यानी मुंबई- हावड़ा- मुंबई, हावड़ा-अहमदाबाद-हावड़ा, पुरी-हरिद्वार-पुरी उत्कल एक्सप्रेस सहित 50 से अधिक निकलती हैं। इन सभी ट्रेनों में लगे पेंट्रीकार किचन की स्थिति सही नहीं है। आजाद हिंद एक्सप्रेस ट्रेन की पेंट्रीकार को चेक किया गया तो उसमें जगह-जगह गंदगी पसरी हुई थी। कचरे के पास ही कटे हुए टमाटर रखे थे। साथ ही बेसन का घोल तैयार करके रखा गया था। इससे नाश्ता बनाने की तैयारी की जा रही थी। कढ़ाई पर कुछ पक रहा था उसका तेल भी खराब था।

पेंट्रीकार के अंदर 20 लीटर पानी के सिर्फ दो ही जार नजर आए उसमें से भी एक में पानी भरा हुआ था दूसरा जार खाली था। जो नाश्ता तैयार किया जा रहा था उसकी सामग्री और क्वालिटी भी सही नहीं नजर आई। लोकल ब्रांड के पानी के पैकेट भी पेंट्रीकार में रखे थे। ऐसा हर दिन हो रहा है लेकिन आईआरसीटीसी और रेलवे के अफसर इसकी अनदेखी करते रहते हैं। इसका बड़ा कारण ट्रेन के अलग-अलग जोन का होना भी है। अधिकारी अपने जोन की ट्रेन नहीं कहकर कई बार पल्ला भी झाड़ लेते हैं। 

हमारी नहीं है कहकर टालते हैं
लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में पेंट्रीकार होती है, लेकिन बिलासपुर के अफसर सिर्फ यहीं से छूटने वाली ट्रेनों की पेंट्रीकार ही जांच करते हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस और उसके बाद राजधानी एक्सप्रेस की जांच की थी। उन्हें दोनों में खामी मिली थी। दूसरे जोन की ट्रेनों की जांच करने में वे कतराते हैं। अफसर पूछने पर कहते हैं ये दूसरे जोन की ट्रेन हैं हमारे जांच करने से कुछ नहीं होगा। हालांकि पूर्व में उत्कल एक्सप्रेस के पेंट्रीकार संचालक पर जुर्माने की कार्रवाई की जा चुकी है।

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