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कानन का मास्टर प्लान सीजेडए ने सौंपा तकनीकी समिति को, मापदंड देखेगी

Bilaspur News - कानन पेंडारी चिड़ियाघर में मास्टर प्लान को मंजूरी देने का जिम्मा सीजेडए की तकनीकी समिति को दे दिया गया है। तकनीकी...

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 03:15 AM IST
Bilaspur News - kanan39s master plan will see criteria for technical committee entrusted by cza
कानन पेंडारी चिड़ियाघर में मास्टर प्लान को मंजूरी देने का जिम्मा सीजेडए की तकनीकी समिति को दे दिया गया है। तकनीकी समिति देखेगी कि मिनी जू से मीडियम जू का दर्जा देने के लिए कानन पेंडारी चिड़ियाघर में मापदंड पूरे हुए है कि नहीं। वर्तमान में कानन पेंडारी मीडियम जू के लिए कानन में कई मापदंड अभी पूरे नहीं हो सके हैं।

कानन पेंंडारी में मीडियम जू का दर्ज मिलने की जल्द कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। फंड की कमी का हवाला दे रहे अधिकारियों ने अभी कानन में कई मापदंड पूरा नहीं किया है। इधर सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने मीडियम जू का दर्जा देने का जिम्मा फिलहाल तकनीकी समिति को सौंप दिया है। कानन के अफसरों ने केंद्रीय चिड़ियाघर को प्रस्ताव नौ माह पहले भेजा था लेकिन अब तक उसे मंजूरी नहीं मिल पाई है। मास्टर प्लान को भेजने के बाद मंजूरी कब मिलेगी यह बताने की स्थिति में भी अफसर भी नहीं है। फूड जोन तो बनाया जा चुका है लेकिन वन्य प्राणियों की केज शिफ्टिंग अब तक नहीं हो पाई है। मीडियम जू का दर्जा देने के लिए सीजेडए ने इसे प्राथमिकता के तौर पर रखा है। वन्य प्राणियों को उनकी श्रेणियों के हिसाब से केज बनाया जाना है। इधर अफसरों का कहना है कि मीडियम जू के लिए होने वाले मापदंड को पूरा करना मास्टर प्लान की मंजूरी के बाद ही हो पाएगा। कानन में वर्तमान में 65 प्रजाति के 600 से अधिक वन्य प्राणी रहते हैं। वन्य प्राणियों की संख्या भी मीडियम जू के मापदंडों के अनुसार हो गई है लेकिन उनके लिए सुविधाएं अभी भी दोयम दर्जे की हैं। कानन में अभी भी व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। लोग अंदर जाते हैं अपने साथ प्लास्टिक की बोतलें ले जाते हैं और उन्हें जांच करने वाले कर्मचारी देखते रह जाते हैं। बीच में यहां एक प्लास्टिक की बोतल के हिसाब से पांच रुपए जमा करने की व्यवस्था थी लेकिन अब वह भी नहीं हो पा रही है। इधर कानन पेंडारी के चिकित्सक डा. पीके चंदन का कहना है कि उन्‍होंने सीजेडए के अफसरों को फोन किया था जिसमें उन्हें तकनीकी समिति को जिम्मेदारी सौंपने की जानकारी मिली है।

सीजेडए की टीम ने इन बिंदुओं पर जताई थी आपत्ति

सीजेडए की टीम ने वर्ष 2016 में कानन पेंडारी चिड़ियाघर का निरीक्षण किया था तब उन्होंने वन्य प्राणियों के केज के सामने लगाए गए डिस्पले बोर्ड में लिखे गए शिकार शब्द पर आपत्ति की थी। टीम का मानना था कि इससे पर्यटकों को गलत मैसेज जाता है। इसकी जगह ऐसे शब्द लिखे जाएं जो पर्यटकों को वन्य प्राणियोंं के प्रति संरक्षा व सुरक्षा के लिए प्रेरित करे। इसके अलावा वन्य प्राणियों के ऐसे केज जिनकी जालियाें की ऊंचाई अधिक थी उन्हें कम करने का निर्देश दिया था ताकि बच्चों को देखने में परेशानी न हो।

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