मंडे पॉजिटिव / किशोरावस्था में चली गई थी रोशनी, परिवार की आंखों से देखा और संजय बन गए एसडीएम

अपनी बहन के साथ संजय अपनी बहन के साथ संजय
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अपनी बहन के साथ संजयअपनी बहन के साथ संजय

  • उम्र बढ़ने के साथ रोशनी गई पर हिम्मत नहीं, मां किताब पढ़कर सुनाती थीं, तब याद कर पाते 
  • तीन बार स्नातकोत्तर और तीन विषयों में नेट के साथ 14 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की संजय ने 

दैनिक भास्कर

Jan 20, 2020, 09:40 AM IST

बिलासपुर. लाख परेशानियां आएं अगर परिवार आपके साथ है तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। कुछ ऐसा ही बिलासपुर में यमुनानगर मंगला के संजय सोंधी के साथ हुआ। किशोरावस्था में ही आंखों की रोशनी खो देने वाले संजय ने न सिर्फ तीन बार स्नातकोत्तर की परीक्षा पास की, बल्कि तीन विषयों में नेट करने के साथ ही 14 प्रतियोगी परीक्षाओं को भी अपने नाम किया। उम्र बढ़ने के साथ उनकी आंखों की रोशनी गई, लेकिन उनकी हिम्मत नहीं गई और मां के सहारे वह एसडीएम की कुर्सी तक पहुंच गए। 

पीईटी में अच्छी रैंक होने के बावजूद दृष्टिहीन होेन के चलते कॉलेज में नहीं मिला दाखिला

दरअसल, संजय को बचपन से कम दिखाई देता था, पर जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, आंख की रोशनी घटती गई। 12वीं कक्षा में पहुंचे तो पूरी तरह आंखों की रोशनी जा चुकी थी। रोशनी के साथ भविष्य भी अंधकारमय होता नजर आया। संजय के मुताबिक उनके पिता वीएम सोंधी भी नहीं रहे। फिर भी लालबहादुर शास्त्री स्कूल बिलासपुर से 12वीं की परीक्षा अपनी मेहनत से पास की। इंजीनियरिंग करने की इच्छा थी। पीईटी में अच्छी रैंक भी मिली, लेकिन दृष्टिहीन होने के कारण किसी कॉलेज ने दाखिला नहीं दिया। उन्होंने बताया कि पहली बार महसूस हुआ कि वे दृष्टिहीन हैं। 

हौसला पूरी तरह टूट गया। संजय को इस स्थिति में देख मां संतोष सोंधी को कष्ट होता था। मां और बहन ने हौसला बढ़ाया। स्नातक की पढ़ाई के लिए चांपा के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में दाखिला मिला। मां प्रतिदिन कॉलेज लाने ले जाने और फिर सुबह-शाम किताबें पढ़कर सुनाने लगी। जिसे सुनकर संजय याद करते थे। इनका साथ संजय के भाई एसएम सोंधी ने भी दिया। मां, बहन और भाई की मदद से संजय ने पॉलिटिकल साइंस, एमबीए, एमएससी मैथ्स में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। यही नहीं इन तीनों विषयों में नेट क्वालिफाइ भी किया। इसके बाद शुरू हुआ कॅरियर के लिए संघर्ष। इसमें भी परिवार का ऐसा साथ मिला और 14 शासकीय नौकरियां कीं। 

दृष्टि बाधित होने के बाद भी संजय सोंधी ने लगातार 14 प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सामान्य लोगों को अपना लोहा मनवाया है। उनकी हिम्मत और लगन और हौसले के दम पर आज भी वे यूपीएससी की परीक्षा पास कर दिल्ली में राजस्व मुख्यालय में रेवेन्यू डिपार्टमेंट में एसडीएम के पद पर कार्यरत हैं। इसके पहले वे शिक्षाकर्मी परीक्षा, रेलवे की परीक्षा, बैंक पीओ की परीक्षा, केंद्रीय विद्यालय परीक्षा, 4 बार एसएससी की परीक्षा और 5 बार सीजी पीएससी की परीक्षा पास कर चुके हैं। वर्ष 2012 में सीजी पीएससी की परीक्षा परिणाम में टॉप टेन में रहे। 

दिव्यांग संजय के अनुसार जब वे शिक्षाकर्मी की नौकरी में थे तो, उन्हें पढ़ाने के लिए क्लास नहीं दी जाती थी। एनएसएसओ में आए तो सर्वे करने नहीं मिलता था। जब वे फिल्ड में गए तो सभी लोगों से पहले अपना सर्वे पूरा किया। दिव्यांग संजय अभी लॉ की पढ़ाई कर रहे हैं। पिछले महीने परीक्षा होनी थी, पर उन्हें राइटर नहीं मिला। कॉलेज में 10वीं के बच्चे को राइटर बनाने का नियम बताया। बड़े पद पर होने के बावजूद राइटर नहीं मिलने से उनका एक पेपर छूट गया। 

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