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भास्कर दस्तक / पुलिस परिवार आजादी से पहले बने जर्जर मकानों में, मंत्री के पड़ोसी गांव में ही पानी नहीं, तीन किमी दूर से लाते हैं



शिवपुर में उस टैंकर से भी पानी नहीं मिल रहा, जिसे खुद पीएचई मंत्री ने दिया है। शिवपुर में उस टैंकर से भी पानी नहीं मिल रहा, जिसे खुद पीएचई मंत्री ने दिया है।
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शिवपुर में उस टैंकर से भी पानी नहीं मिल रहा, जिसे खुद पीएचई मंत्री ने दिया है।शिवपुर में उस टैंकर से भी पानी नहीं मिल रहा, जिसे खुद पीएचई मंत्री ने दिया है।
  • गृह, जेल व लोक स्वास्थ्य मंत्री रामसेवक पैकरा की विधानसभा प्रतापपुर और गांव चेंद्रा का हाल 
  • प्रतापपुर थाने में आधा ही स्टाफ, चौकी के आधे सुरक्षाकर्मी पैकरा के घर की सुरक्षा में लगाए गए 

 

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 12:25 PM IST

चंद्रकुमार दुबे

 

बिलासपुर. दस्तक में आज आपको लिए चलते हैं प्रतापपुर...। प्रदेश के गृह, जेल एवं लोक स्वास्थ्य मंत्री रामसेवक पैकरा का इलाका। जेल को छोड़ दें तो गृह और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सीधे पब्लिक से जुड़े विभाग। हमने इन दोनों विभागों के काम को पैकरा के गृहक्षेत्र में परखा। कुछ थाने तो चकाचक हैं, लेकिन थानेवाले बदहाल। पानी दिलाने के संसाधन तो हैं, लेकिन पानी नहीं। मंत्री के गांव चेंद्रा के पड़ाेसी लांजी में तीन किमी दूर से पानी लाना पड़ता है। प्रतापपुर नगर और आसपास भी तस्वीरें कुछ ऐसी ही दिखीं कि लोग पानी, बिजली, सड़क जैसी सुविधाओं के लिए आज भी जूझ रहे हैं। गृहमंत्री पैकरा 2013 में बलरामपुर जिले की प्रतापपुर विधानसभा सीट से ही विधायक चुने गए थे। उन्होंने कांग्रेस के प्रेमसाय सिंह को हराया था। पैकरा के गृह क्षेत्र प्रतापपुर में थानों व चौकियों की स्थिति दयनीय है। प्रतापपुर थाने में टीआई, एसआई, हैड कांस्टेबल व कांस्टेबल सहित कुल 21 का स्टाफ है, जबकि सेटअप 40 का है। टीआई ओमप्रकाश कुजूर का कहना है कि यहां की जनसंख्या को देखते हुए थाने में बल की संख्या काफी कम है। मांग पर सुनवाई नहीं होती। यही हाल चेंद्रा चौकी का है। यहां प्रभारी सहित 15 जवान पदस्थ हैं। एएसआई सुमंत पांडेय के अनुसार इस चौकी क्षेत्र में 17 गांव आते हैं। आधा से अधिक बल गृहमंत्री के घर की सुरक्षा में लग जाता है। 

4 बड़ी जरूरतें और समस्याएं

  1. हाथी बड़ी समस्या: अब तक डेढ़ दर्जन लोगों को हाथियों ने पटककर मार डाला। सैकड़ो मकान और खेतों की फसल नष्ट कर चुके हैं। मुआवजा कम है। 
    सड़कों का बुरा हाल: प्रतापपुर से करसी, राजपुर, धरमपुर तक की सड़कें उखड़ चुकी हैं। गांवों की अंदरूनी सड़कें भी खराब हैं। मेंटेनेंस नहीं है। 
    बिजली की समस्या: 40-50 मजरे-टोलों में अभी भी बिजली नहीं पहुंची है। पोल जर्जर हो चुके हैं। घरों का बिजली बिल अधिक आने की भी शिकायत है। 
    मोरन, इरिया, बरंग और बांकी नदी पर पुल-पुलिया बनाना जरूरी है। यहां के कई गांव बारिश के दिनों में शहर एवं बाजार से कट जाते हैं। 

     

    सीधी बात

     

  2. कच्चे-जर्जर मकानों में रह रहे पुलिसकर्मी व उनके परिवार

    पुलिस।

     

    पुलिसकर्मियों के परिवार आजादी से पहले बने जर्जर मकानों में रहते हैं। कुछ नए भवन जरूर बनाए गए हैं। 
    नए में कई भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए। छतों से पानी टपकता है। परिवारों को तिरपाल ढंककर रहना पड़ता है। 

  3. थाने का भवन अत्याधुनिक, रिसेप्शन खाली, लोग परेशान

    थाना

     

    प्रतापपुर थाने एवं चौकियों में रिसेप्शन पर बैठने वाला कोई नहीं। एफआईआर लिखवाने भटकती रही महिला। 
    महिलाओं के लिए न अलग सेल, न ही संवेदना केंद्र। कोई थाना ऑनलाइन नहीं। कागजों पर एफआईआर। 

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