कार्रवाई / कानन पेंडारी चिड़ियाघर में गर्भवती मादा हिप्पो की मौत, एसडीओ निलंबित

टीआर जायसवाल, एसडीओ बिलासपुर और संजय लूथरा, एसडीओ एटीआर व मानस राय, एसडीओ एटीआर टीआर जायसवाल, एसडीओ बिलासपुर और संजय लूथरा, एसडीओ एटीआर व मानस राय, एसडीओ एटीआर
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टीआर जायसवाल, एसडीओ बिलासपुर और संजय लूथरा, एसडीओ एटीआर व मानस राय, एसडीओ एटीआरटीआर जायसवाल, एसडीओ बिलासपुर और संजय लूथरा, एसडीओ एटीआर व मानस राय, एसडीओ एटीआर

  • कानन पेंडारी चिड़ियाघर के एसडीओ भी सस्पेंड, मादा दरियाई घोड़े की छह महीने पहले हुई थी मौत
  • कानन में 8 साल में 32 वन्यजीवों की मौत, इनमें सफेद बाघ, बंगाल टाइगर और तेंदुआ भी शामिल 
  • इससे पहले विधानसभा में एटीआर में तेंदुआ की मौत के जिम्मेदार दो एसडीओ किए गए थे निलंबित 

दैनिक भास्कर

Nov 28, 2019, 12:37 PM IST

बिलासपुर. कानन पेंडारी चिड़ियाघर में साढ़े छह महीने की गर्भवती मादा दरियाई घोड़े की मौत के 164 दिन बाद पूर्व अधीक्षक और तत्कालीन एसडीओ बिलासपुर टीआर जायसवाल को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया है। दरियाई घोड़े की मौत के मामले में टीआर जायसवाल को पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने पांच बार चिट्ठी लिखी, लेकिन एसडीओ ने उन्हें जवाब देना उचित नहीं समझा। जवाब नहीं देने के कारण उन्हें दोषी मानकर पीसीसीएफ ने 25 नवंबर को सस्पेंड आर्डर जारी किया था। 

अचानकमार टाइगर रिजर्व में शिकार मामला विधानसभा में उठाया

दरअसल, अचानकमार टाइगर रिजर्व में अवैध कटाई और वन्यजीवों के शिकार के मामले में बुधवार को विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया गया था। जिसके बाद कार्रवाई करते हुए वन वभाग के एसडीओ संजय लूथर और मानस राव को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद कानन पेेंडारी जू मामले में भी कार्रवाई की गई। वहीं एसडीओ संजय लूथर का कहना है कि उनके एरिया में कोई भी शिकार नहीं हुआ है। तेंदुए का शिकार भी बफर क्षेत्र में हुआ था। मुझे किस आधार पर निलंबित किया है, खुद यह नहीं समझ पा रहा हूं। 

डीएफओ बिलासपुर सत्यदेव शर्मा का कहना है कि टीआर जायसवाल को पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने पांच बार चिट्ठी लिखकर दरियाई घोड़े की मौत के मामले में जवाब मांगा। उन्होंने जवाब नहीं दिया। इस कारण एसडीओ बिलासपुर को सस्पेंड किया गया है। 25 नवंबर को निलंबित आदेश जारी किया गया था। 

16 जून 2019 की रात दो बजे मादा दरियाई घोड़ा सजनी की मौत हुई थी। मौत की जानकारी सुबह 9 बजे कानन के स्टॉफ ने वन विभाग के अफसरों को दी। सूचना मिलने के बाद सुबह 11 बजे पूर्व डीएफओ संदीप बल्गा और कानन के पूर्व अधीक्षक टीआर जायसवाल चिड़ियाघर पहुंचे। वेटनरी डॉक्टर अनूप चटर्जी व डॉक्टर एसपी सिन्हा ने पोस्टमार्टम के बाद बताया कि दरियाई घोड़े की मौत कार्डियो रेस्पिरेटरी कोलेप्स यानी हृदय श्वसन तंत्र में तकलीफ के कारण हुई है। मादा साढ़े छह महीने की गर्भवती थी। 

मादा के गर्भवती होने की बात कानन के अफसर छिपाते रहे। दरियाई घोड़े का बिसरा उच्च परीक्षण के लिए आईवीआरआई बरेली और जबलपुर भेजा गया। मौत के 106 दिन बाद दैनिक भास्कर ने 30 सितंबर के अंक में आईवीआरआई बरेली से आई फॉरेंसिक बिसरा जांच रिपोर्ट में खुलासा किया था कि सजनी की मौत निमोनिया के कारण हुई है। समय पर इलाज नहीं मिला इसलिए उनकी और उसके बच्चे की मौत हो गई। जानकार बता रहे हैं कि तत्कालीन डिप्टी रेंजर अजय शर्मा पर भी गाज गिर सकती है। 

अचानकमार टाइगर रिजर्व में शिकारियों के लगाए जाल में फंसकर तेंदुए की मौत 21 अक्टूबर को हुई थी। एटीआर प्रबंधन ने मामले को छिपाया। सिर्फ दैनिक भास्कर ने तेंदुए के शिकार की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित की। वन विभाग ने इस मामले में मध्यप्रदेश बार्डर से लगे गांव के 17 लोगों को गिरफ्तार किया था। पकड़े गए शिकारियों ने बताया था कि सुअर के लिए फंदा लगाया था पर इसमें तेंदुआ फंस गया। लोरमी बफर के कक्ष क्रमांक 404 आरएफ में तेंदुए का शव मिला था। शिकारी इसे छोड़कर भाग निकले थे। 

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