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सुप्रीम कोर्ट ने बिलासपुर में 3 बच्चों के हत्यारे की फांसी पर रोक लगाई, आजीवन कारावास की सजा सुनाई

9 महीने पहले
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सुप्रीम कोर्ट
  • 3 जजों की पीठ ने फैसला सुनाया, कोर्ट ने कहा- दोषी को कम से कम 25 साल जेल में रखा जाए
  • फरवरी 2011 में पत्नी के लापता होने पर पड़ोसी मनोज ने बच्चों की हत्या कर खेत में फेंके थे शव

रायपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए तिहरे हत्याकांड के दोषी को मिली मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने फैसले में मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है। कोर्ट ने कहा है कि दोषी को कम से कम 25 साल जेल में रखा जाना चाहिए। जस्टिस अरुण मिश्रा, विनीत सरन और एमआर शाह की तीन जजों की बेंच ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया। फरवरी 2011 में मनोज सूर्यवंशी ने पड़ोसी के 3 बच्चों की हत्या कर खेत में शव फेंक दिया था। 

पड़ोसी के छोटे भाई के साथ भाग गई थी पत्नी, इसके बाद से ही रंजिश हुई
रतनपुर निवासी मनोज सूर्यवंशी की पत्नी सुमिरत बाई पड़ोसी शिवलाल धीवर के छोटे भाई शिवनाथ के साथ भाग गई थी। इसके बाद से वह रंजिश रखने लगा। फरवरी 2011 में मनोज सूर्यवंशी ने दर्रीपारा स्थित स्वामी विवेकानंद स्कूल से लौट रहे शिवलाल के तीनों बच्चों विजय धीवर (8), अजय धीवर (6) और साक्षी धीवर (4) की हत्या कर दी। तीनों बच्चों के शव 11 फरवरी 2011 को एक खेत में पाए गए। बच्चों के गायब होने के संदेह पर मनोज के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। 

पुलिस ने मनोज को बेलतरा से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बताया कि स्कूल से लौट रहे बच्चों को लालच देकर खेत में ले गया था। वहां शाम 6 बजे तक रोके रहा और फिर बच्चों की गला दबाकर व पत्थर सिर पर पटक कर हत्या कर दी। इसके बाद फरार हो गया। इस मामले में स्थानीय अदालत ने 5 मई 2013 को मनोज सूर्यवंशी की हत्या करने और साक्ष्य छिपाने के मामले में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसे बाद में सुनवाई करते हुए 8 अगस्त 2013 को बिलासपुर हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था। 

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