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जल संकट / गांवों में जलस्तर 130 फीट नीचे पहुंचा, 400 हैंडपंप सूखे, पानी के लिए हाहाकार

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 11:05 AM IST


water crises in bilaspur water level below 130 feet
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water crises in bilaspur water level below 130 feet
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  • तापमान 43 डिग्री पहुंचा, जिले के 100 गांव संवेदनशील, तखतपुर और बिल्हा अति संवेदनशील 
  • पीएचईडी ने मोबाइल वाहन और हैंडपंप के स्पेयर पार्ट्स खरीदी के लिए दी मंजूरी

बिलासपुर. जिले में तापमान बढ़ने के साथ ही पानी की विकराल समस्या सामने आने लगी है। गांवों में जलस्तर 130 फीट नीचे पहुंच गया है। 400 हैंडपंप सूख गए हैं। 100 से ज्यादा गांव संवेदनशील हैं। सबसे बुरी हालत बिल्हा और तखतपुर की है। इनको अति संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है। पेयजल समस्या से निपटने के लिए पीएचई डिपार्टमेंट ने मोबाइल वाहन और हैंडपंप के स्पेयर पार्ट्स की खरीदी को लेकर मंजूरी दे दी है। 

जहां समस्या नहीं, वहां भी जलस्तर 80 फीट नीचे पहुंचा

  1. जिले में तापमान बढ़ने से जलस्तर भी लगातार नीचे जा रहा है। जहां पर पानी की अधिक समस्या नहीं है वहां भी यह 80 फीट नीचे जा चुका है। कई स्थानों पर जल स्तर नीचे जाने से हैंडपंप सूख चुके हैं। हैंडपंप सूखने के बाद गांवों में पानी की समस्या गंभीर हो गई है। दूसरी ओर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में स्पेयर पार्ट्स और मोबाइल वैन को लेकर पिछले दिनों सब इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियरों के एसोसिएशन ने चीफ इंजीनियर को पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया था। 

  2. मामले की छानबीन के बाद विभाग के चीफ इंजीनियर ने पीएचई ईई को तत्काल स्पेयर पार्ट्स खरीदने और मोबाइल वाहन चलाने के निर्देश दिए थे ताकि ग्रामीण इलाकों में पेयजल समस्या से निपटने काम शुरू किया जा सके। फिलहाल पीएचई ने 100 गांवों को संवेदनशील की श्रेणी में रखा है जहां पेयजल के लिए समस्या गंभीर होती है। वहीं गांवों में घटते जल स्तर के कारण हैंडपंपों ने जवाब देना शुरू कर दिया है। जहां पानी थोड़ा मिल भी रहा है, वो इतना गंदा है कि इस्तेमाल के लायक ही नहीं है। 

  3. जल स्तर घटते साथ हैंडपंप भी जवाब दे रहे 

    हैंडपंप की क्षमता 100 फीट तक होती है। इस वजह से इस गहराई तक जलस्तर रहने से हैंडपंप तो काम करता है लेकिन इसके नीचे जल स्तर जाने से केंसिंग पाइप डालकर पानी उपलब्ध कराया जाता है। 

    • गर्मी में धान की फसल इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। 
    • सबसे अधिक पंपों की संख्या तखतपुर व बिल्हा ब्लॉक में है। फिर भी समस्या गंभीर
    • जल संरक्षण के लिए कोई काम नहीं हो रहा है। 

  4. कृत्रिम कमी का माहौल बना रहे हैं कुछ लोग 

    हैंडपंपों के रखरखाव के लिए जिले में स्पेयर पार्ट्स की कोई कमी नहीं है। सभी ब्लॉकों में मोबाइल वैन की भी मंजूरी दे दी गई है। कुछ लोग कृत्रिम माहौल बना रहे हैं।

    प्रमोद कतलम, ईई, पीएचई 

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