बिलासपुर / कानन पेंडारी में सफेद हिरण ने तोड़ा दम, प्रबंधन बोला- मौत नेचुरल, लेकिन बिसरा उच्च परीक्षण के जबलपुर भेजेंगे

पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग के अफसरों की मौजूदगी में हिरण के शव का अंतिम संस्कार किया गया। पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग के अफसरों की मौजूदगी में हिरण के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
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पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग के अफसरों की मौजूदगी में हिरण के शव का अंतिम संस्कार किया गया।पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग के अफसरों की मौजूदगी में हिरण के शव का अंतिम संस्कार किया गया।

  • सुबह जब जू कीपर पहुंचा तो हिरण की मौत का पता चला, पोस्टमार्टम के बाद किया अंतिम संस्कार
  • 51 दिन में चार वन्यजीव तोड़ चुके हैं दम, बेहतर इलाज नहीं मिलने और बीमारी के कारण हो रही मौतें

दैनिक भास्कर

Dec 13, 2019, 10:33 AM IST

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी चिड़ियाघर में वन्यजीवों की मौत का सिलसिला जारी है। एक बार फिर गुरुवार को एक सफेद हिरण की मौत हो गई। सुबह जब जू कीपर मौके पर पहुंचा तो बाड़े में हिरण चित पड़ा था। जिसके बाद उसकी मौत का पता चला। इसके बाद प्रबंधन ने पोस्टमार्टम कर शव को जलवा दिया। जू प्रबंधन ने हिरण की मौत को नेचुरल बताया है। हालांकि प्रबंधन उच्च परीक्षण के लिए हिरण का बिसरा पशु अनुसंधान संस्थान जबलपुर भेजने की बात कर रहा है। 

प्रबंधन ने कहा- हिरण की आयु 12 वर्ष पूरी हो चुकी थी

रोज की तरह जू कीपर कौशिक गुरुवार सुबह आठ बजे कानन पहुंचा और उसने बाड़े की ओर देखा तो उसे एक नर हिरण चित पड़ा दिखा। इसकी जानकारी जू कीपर ने शाकाहारी वन्यप्राणी प्रभारी रमेश टांडे को दी। सूचना मिलते ही दोपहर 1 बजे अधीक्षक विवेक चौरसिया चिड़ियाघर पहुंचे और जांच पड़ताल कर मामले को समझा। इसके बाद चिड़ियाघर की डॉक्टर स्मिता साहू ने पोस्टमार्टम किया और हिरण की मौत नेचुरल होना बताया। 12 साल के हिरण की उम्र पूरी हो जाने के कारण उसकी मौत हो गई। 

इन मौतें का दोषी कौन? 

  • 16 जून को मादा हिप्पो सजनी की मौत निमोनिया के कारण हुई थी। 
  • 15 जनवरी 2014 को यहां 22 चीतलों की संदिग्ध मौत हुई थी। 
  • 17 मई 2018 को नर तेंदुआ के हमले से मादा तेंदुआ की मौत हुई थी। 
  • 22 दिसंबर 2018 को सफेद बाघ विजय की मौत हुई थी। 
  • 21 जुलाई 2018 को शुतुरमुर्ग की मौत हुई थी। 
  • 2011 में बंगाल टाइगर लावा की मौत 21 वर्ष की आयु में हुई थी। 

सीजेडए ने अचानकमार के जंगल में 20, गुरु घासीदास में 16 और तैमोर पिंगला के जंगल में 14 चीतलों को शिफ्ट करने की अनुमति दी है। इनमें 22 नर, 26 मादा और दो शावक भी हैं। 20 महीने पहले ही यानी फरवरी 2018 को सीजेडए ने इन चीतलों को जंगल भेजने की अनुमति दे दी थी लेकिन अभी तक नहीं भेजा गया। इस बारे में कानन प्रबंधन का कहना है कि हमारे पास एक्सपर्ट डॉक्टर और फंड नहीं है इसलिए हम अभी तक चीतलों को जंगल शिफ्ट नहीं कर पाए हैं। 

कानन में वन्यजीवों की मौतें लगातार हो रही हैं। 51 दिन में तीन चीतल और एक कोटरी की मौत हो चुकी है। हाल ही में 24 नंवबर को एक कोटरी की मौत बेहतर इलाज के अभाव में हुई थी। इससे पहले अक्टूबर महीने में दो चीतल ने भी बेहतर इलाज के अभाव में ही दम तोड़ दिया था। 12 अक्टूबर को आपसी झगड़े में एक चीतल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। दूसरे घायल का 8 दिनों तक इलाज चला लेकिन कानन के डॉक्टर उसकी जान नहीं बचा पाए। 20 अक्टूबर को दूसरे नर चीतल की भी जान चली गई। एक नर बंदर भी लकवा की बीमारी से लड़ रहा है। चिड़ियाघर में एक्सपर्ट डॉक्टर के नहीं होने के कारण भी वन्यजीवों की मौत हो रही है। 

कानन में 12 सफेद हिरण थे। इनमें 7 मादा और 5 नर थे। गुरुवार की एक नर की मौत के बाद अब सिर्फ 11 हिरण ही बचे हैं। सफेद चीतल के अलावा कानन में चीतलों की संख्या अधिक है। एक बाड़े में जरूरत से ज्यादा चीतलों को रखा है इसलिए चीतलों की मौतें हो रही हैं। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण का नियम है कि जू में 50 से अधिक चीतल नहीं रखना है। इससे अधिक संख्या होने पर उसकी शिफ्टिंग का आदेश है, लेकिन जू में सालों से शिफ्टिंग नहीं हुई है। 2003 में बनाए गए इस बाड़े में 125 चीतल हैं। अफसर भी पहले हुई दोनों चीतलों की मौतों की वजह बाड़े में जरूरत से ज्यादा चीतल होना मान रहे हैं।  

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