खराब यातायात व्यवस्था के कारण सड़क पर रोजाना लग रहा जाम, शहरवासी हो रहे परेशान

Champa News - शहर की सड़कों से कब्जा हटाने के लिए जिम्मेदार मौन सड़क तो बनाई मगर बीच में छोड़ दिए बिजली के खंभे वार्ड नंबर 6...

Dec 04, 2019, 08:07 AM IST
शहर की सड़कों से कब्जा हटाने के लिए जिम्मेदार मौन

सड़क तो बनाई मगर बीच में छोड़ दिए बिजली के खंभे

वार्ड नंबर 6 डॉ. द्विवेदी के क्लीनिक के बाजू से नहर की ओर जाने वाली गली इतनी संकरी है कि दो बाइक एक साथ नहीं चल पाती, लोगों को पैदल चलने में भी दिक्कत होती है। इस गली में सड़क के बीच में खंभा को ही छोड़ दिया गया है।

ऐसी स्थिति के लिए जितने जिम्मेदार नगर पालिका के अधिकारी हैं, उतने ही जनप्रतिनिधि भी दोषी हैं, लेकिन सबसे अधिक दोषी वे लोग हैं जिन्होंने अपनी व्यवस्था के लिए भी इस बात का ध्यान नहीं रखा की थाेड़ी सी अपनी जमीन भी छोड़ दें ताकि घर चढऩे के लिए सीढ़ी भी निकालें तो लोगों को परेशानी न हो।

जिम्मेदार

टाउन कंट्री प्लानिंग के अनुसार ही व्यवस्थित बसाहट के लिए लोगों को जागरूक हाेना होगा।

समाधान

बायपास नहीं होने से यातायात का दबाव

बलौदा | बुड़गहन चौक कोरबा से बिलासपुर, अकलतरा, जांजगीर, दीपका हरदीबाजार को जोड़ने वाला जंक्शन है। यह क्षेत्र का डेंजर चौक है, क्योंकि कोयला लेकर ट्रेलर बिलासपुर, अकलतरा, नैला, गतौरा की ओर जाते हैं। बड़े वाहनो का दबाव दुर्घटना का कारण बनता है।

जिम्मेदार

दो बाइपास रोड के निर्माण का कार्य वर्षों से अधूरा पड़ा है| लोकनिर्माण विभाग विभाग ध्यान नहीं दे रहा है।

जांजगीर। जिला मुख्यालय सहित जिले के कुछ बड़े नगरों की सड़क, फुटपाथ पर कब्जा है। सरकारी तंत्र इन कब्जों से मुक्त कराने में असफल है। यही कारण है कि हमारे जिले के शहर हर दिन उन्हीं परेशानियों से जूझ रहे हैं। प्रशासन की थोड़ी सी इच्छाशक्ति से पूरा शहर में होने वाली समस्याएं बदल सकती है। मगर जिम्मेदार इसपर ध्यान नहीं देते है। जांजगीर, सक्ती, शिवरीनारायण बलौदा जैसे शहर में हमने ऐसी समस्याओं को जानने की कोशिश की । इनमें से ज्यादातर दिक्कतें ऐसी हैं, जो सरकारी तंत्र की गलत प्लानिंग या सोच का नतीजा है।

समाधान

बाइपास का निर्माण शुरू करा दिए जाएं तो वाहनों का नगर के अंदर से आना जाना कम होगा, इससे लोगों को राहत मिल जायेगी।

पार्किंग की व्यवस्था नहीं, बॉम्बे मार्केट में जाम

शिवरीनारायण | बॉम्बे मार्केट मेन रोड में जाम की समस्या से लोगों को हमेशा जूझना पड़ता है। नटराज चौक से थाना रोड जाने वाले मोड़ तक जाम नजर आता है। व्यवसायिक केंद्र है। मेन रोड में दुकानदारों के पास ग्राहकों के लिए पार्किग की व्यवस्था नहीं है।

जिम्मेदार

पार्किंग व्यवस्था नहीं करने के लिए नगर पंचायत जिम्मेदार हैं, वे न दुकान की अनुमति देने से पहले पार्किंग की जांच ही नहीं करते।

समाधान

ग्राहकों के लिए पार्किंग व्यवस्था कराएं। दुकानदार सामान व बोर्ड बाहर रोड पर न निकालें तो जाम की समस्या नहीं होगी।

गौरव पथ में बदहाल है पार्किंग व्यवस्था

सक्ती | नगर का कचहरी बाजार रोड जो इन दिनों बेतरतीब और बदहाल पार्किंग की वजह से जाना जाता है। हास्पिटल चौक के आसपास लोगों के द्वारा बीच सड़क में वाहन खड़े किये जाते हैं। दुकानदार भी पार्किंग सुव्यवस्थित कराने की दिशा में कोई प्रयास नहीं करते हैं।

जिम्मेदार

पालिका के अधिकारी जिन्होंने निर्माण कार्य से पहले यह नहीं देखा कि दुकान के सामने पार्किंग की व्यवस्था है कि नहीं।

समाधान

पुलिस पेट्रोलिंग कर कार्यवाही करेंे। दुकानदारों को भी चेतावनी दें कि वे पार्किंग सुधरवाने में मदद नहीं करते हैं तो कार्रवाई होगी।

लोगों को होती है परेशानी

फुटपाथ पर कब्जे, संकरी सड़कों पर सामान, रोड पर खंभे बिगाड़ रहे ट्रैफिक व्यवस्था

हाट बाजार के सामने गुमटियों का कब्जा

बलौदा | नगरपंचायत में कोरबा, बिलासपुर मुख्य मार्ग में बनाए गए हैं। हाट बाजार में जाम लगता है, इस मार्ग में कोरबा व बिलासपुर की ओर सैकड़ों वाहनों का आवागमन लगा रहता है। जाम लगने की मुख्य वजह सड़क के किनारे तक ठेले गुमटियों वालो का बेजा कब्जा है।

जिम्मेदार

अव्यवस्था के लिये नगर पंचायत प्रशासन जिम्मेदार है। नगर पंचायत द्वारा इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया जाता।

कचहरी चौक है डेंजर जोन

सक्ती | सबसे प्रमुख चौक है। एसडीएम कार्यालय, जनपद कार्यालय, तहसील तथा न्यायालय जैसे प्रमुख कार्यालय एक ही परिसर में हैं। इसलिएं यहां लोगों का तांता लगा रहता है। पुलिस विभाग ने एक यातायात आरक्षक की ड्यूटी लगाई है मगर व नाकाफी साबित हो रही।

जिम्मेदार

जिम्मेदारों से भास्कर नहीं करेगा बात क्योंकि अधिकारी हमेशा बदल जाते हैं, जनप्रतिनिधि अधिकारियों पर दोष मढ़ते हैं।

समाधान

सड़क के किनारे अवैध कब्जा कर ठेले लगाए हैं। उन्हें वहां से हटाकर हाटबाजार में खाली पड़े दर्जनों चबूतरे में शिफ्ट कराएं।

समाधान

यहां न तो ट्रैफिक सिग्नल या फिर यातायात पुलिस बल की संख्या बढ़ानी होगी। एक पुलिस आरक्षक ट्रैफिक का दबाव झेल नहीं पाता।

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