पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Janjgeer News Chhattisgarh News If Even 1 Student Of The School Fails In Reading The School Will Not Win

स्कूल का 1 भी छात्र पढ़ने में फेल हुआ तो स्कूल जीत नहीं पाएगा

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले स्कूलों का होगा चयन, सीएम के सामने करेंगे पेश


प्राथमिक कक्षाओं के शत प्रतिशत बच्चों को किताब पढ़ना आना चाहिए। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए राज्य व्यापी पठन कौशल कार्यक्रम का आयोजन 1 अप्रैल से आरंभ होने जा रहा है। आयोजन को लेकर सभी 9 विकासखंडांे में बैठकों का दौर चल रहा है। इसमें बीईओ, बीआरसीसी व एबीईओ द्वारा सभी शैक्षिक समन्वयकों की क्लास ली जा रही है। अभी 23 मार्च से पांचवीं आठवीं सहित लोकल कक्षाओं के परीक्षाएं होनी है। जिसके तुरंत बाद पेपर जांच कर नंबर को मोबाइल के टीम्स एप्प में दर्ज करते हुए अंकसूची व परीक्षाफल तैयार करना है इस पूरे प्रक्रिया के साथ ही 1 अप्रैल से राज्यव्यापी पठन कौशल कार्यक्रम भी आरंभ हो जाएगा।

श्रेष्ठ वाचन करने वाले स्कूलों का होगा चयन, मुख्यमंत्री के सामने होगा प्रदर्शन- अभियान के अंत में वाचन प्रतियोगिता होगी जिसमें जिस स्कूल के शत प्रतिशत बच्चे पढ़ पायेंगे उन्हें विजेता घोषित किया जायेगा। इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि या तो एक स्कूल जीतेगा या वह पीछे होगा बीच का मामला नही है। स्कूल के जीतने का मतलब है कि इस स्कूल के सभी बच्चों को पढ़ना ठीक से आ गया, यदि एक भी बच्चा ठीक से नही पढ़ पा रहा है तो इसका मतलब यह हुआ कि वह जीत नही पाया। जीतने के लिए जरूरी है कि स्कूल के सभी बच्चों को अच्छे से पढ़ना आना चाहिए। सफल स्कूलों का चयन ब्लाक व जिला स्तर पर होगा और अंतिम प्रदर्शन मुख्यमंत्री के समक्ष कराये जाने की बात कही जा रही है।

टेक्नोलाजी से जूझ रहे पुराने शिक्षकों को कामकाज में आ रही दिक्कतें- इस पूरी गतिविधि को शिक्षा विभाग के वेबसाइट में अपलोड करने के भी निर्देश है। जिसमें मुस्कान पुस्तकालय से उपलब्ध पुस्तकों के अलावा शिक्षकों द्वारा बनायी गई गतिविधियां, टीचर लर्निंग मटेरियल और पठन सामग्री के विडियो तैयार कर अपलोड किया जाना है। ऐसे में शिक्षकों को टेक्नालाजी से जूझना पड़ रहा है।

जिले भर के सभी संकुल समन्वयकों को अपने-अपने संकुल क्षेत्र के सभी स्कूलों में उपलब्ध पुस्तकों की सूची बनाकर वेबसाईट में अपलोड करने के निर्देश दिए गये है जिसे अधिकांश शैक्षिक समन्वयक नहीं कर पा रहे है। कार्यक्रम आरंभ होने के
साथ ही पूरे अभियान की
मानिटरिंग मोबाइल एप्प और वेब पोर्टल
द्वारा करने की बात कही जा रही है।

माताओं को सक्रिय कर सफल बनाने की योजना


अप्रैल माह में सभी बच्चों की शाला में शत प्रतिशत उपस्थिति बनाये रखने के लिए समुदाय से सहभागिता लेने विभाग की योजना है। प्रत्येक प्राथमिक स्कूलों के लिए मिडिल स्कूल से एक शिक्षक मेंटर की भूमिका में होंगे जिनकी देखरेख में यह कार्यक्रम होगा। इस अभियान में जन प्रतिनिधियों को भी जोड़ते हुए माताओं का उन्नमुखीकरण करते हुए उनका समूह बनाकर इस अभियान को उत्सव के रूप में मनाए जाने की बात कही जा रही है।


ट्रेन से अप डाउन करते हैं जिले के नोडल अधिकारी

जिले में शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित करने व शिक्षकों को समय-समय पर प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी डाइट की होती है। डाइट के यूके रस्तोगी को जिला नोडल बनाया गया है। ये नोडल अधिकारी स्वयं ट्रेन से अप डाउन करते हैं। जिससे मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है। समन्वय नहीं होने के कारण पिछले दिनों कलेक्टर द्वारा ली गई बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारी को खून सुनना पड़ा था।

कहीं कागजी कार्यवाही तक ही न रह जाए योजना

किसी भी सरकारी प्राथमिक कक्षाओं में अधिकांश बच्चों को ठीक से हिंदी पढ़ना व लिखना ही नहीं आता है। कक्षा में कुछ गिने चुने बच्चे ही जवाब देते हैं, बाकी बच्चे शांत रहते हैं फिर भी साल के अंत में उन्हे कक्षा उन्नति देते हुए मिडिल से हाईस्कूल तक भेज दिया जाता है। ऐसे में इस समस्या को प्राथमिक कक्षा में ही समाप्त करने इस तरह की योजना तैयार की गयी है। यदि योजना का सही ढंग से क्रियान्वयन होता है तो निश्चित रूप से इसके बेहतर परिणाम सामने आयेंगे लेकिन यदि हर बार की तरह यह अभियान कागजी कार्यवाही बनकर रह गया तो फिर सरकारी संसाधन का दुरूपयोग मात्र ही होगा।

यह भी जानिए इस दौरान कब क्या होगा

प्रत्येक स्कूल में 18 से 20 अप्रेल तक पठन कौशल की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इस प्रतियोगिता के निर्णायक की भूमिका स्थानीय माताओं, जनप्रतिनिधियों को दी जाएगी। यह प्रतियोगिता संकुल स्तर पर 21 अप्रेल से 24 अप्रेल तक, खंड स्तर पर 25 अप्रेल से 27 अप्रेल, जिला स्तर पर 28 से 30 अप्रेल तथा राज्य स्तर पर मई में आयोजित की जाएगी।
खबरें और भी हैं...