जिंदगी है तो हंसकर जियो साथियों सहित अन्य कविताएं भी सुनाईं

Jan 19, 2020, 07:06 AM IST
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भास्कर संवाददाता | जांजगीर

जांजगीर के वरिष्ठ गीतकार स्व. नरेंद्र बहादुर श्रीवास्तव की प्रथम पुण्यतिथि पर शील साहित्य परिषद में “ स्मरण- गीत कवि नरेंद्र श्रीवास्तव “ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम कवि रामेश्वर गोपाल उर्फ भरभंड वीर के मुख्य आतिथ्य, शील साहित्य परिषद के अध्यक्ष विजय दुबे की अध्यक्षता तथा चंद्रशेखर तिवारी एवं अरुण सोनी के विशिष्ट आतिथ्य में हुआ ।

कवि नरेंद्र श्रीवास्तव को याद करते हुए विजय दुबे ने कहा कि नरेंद्र श्रीवास्तव एक ऐसे रचनाकार थे, जो सबको सुनते और मुक्त कंठ से प्रोत्साहित किया करते थे। वे नवोदित रचनाकारों को खूब स्नेह और आशीर्वाद देते एवं किसी की कोई भी पंक्ति अच्छी लगती तो वे उसका अक्सर जिक्र किया करते थे। वे एक अच्छे गीतकार के साथ सहृदय इंसान थे। जांजगीर के 92 वर्षीय हास्य कवि रामेश्वर गोपाल ने कहा कि नरेंद्र गीतकार के साथ साथ कानून के अच्छे जानकार थे । वे अपनी इस जानकारी का उपयोग गरीबों की कानूनी सहायता कर किया करते थे । इस कारण से सरकारी महकमे में उनकी बहुत पूछ परख थी।

उन्होंने स्व. नरेंद्र दादा की पंक्ति जिन अंधेरों ने हमको पुकारा, हम उन्हीं के लिए अब जलेंगे। लग रहा है चमन जो उजड़ता, बस वहीं फूल बनकर खिलेंगे। “जिंदगी है तो हंसकर जियो साथियों, रो पड़े तो किसी को बताना नहीं। छीन लेते हैं काजल यहाँ आँख से, आंसुओं का रहा ये जमाना नहीं। चंद्रशेखर तिवारी और अरुण सोनी ने भी उन पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के संचालक कवि सतीश कुमार सिंह ने कहा कि - दादा नरेंद्र श्रीवास्तव व्यक्ति नहीं एक पाठशाला थे जिन्होंने हमारी पीढ़ी को तैयार करने तथा उन्हें तराशने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की ।

कार्यक्रम में नरेंद्र श्रीवास्तव द्वारा लिखे चुनिंदा गीतों का पाठ भी किया गया । कवयित्री संतोषी महंत ‘’श्रध्दा’’ तथा वरिष्ठ कवि भैयालाल नागवंशी द्वारा सुमधुर कंठों से उनकी रचनाओं का गायन किया गया। उसके बाद वरिष्ठ कवि ईश्वरी यादव, विजय राठौर , कवि सुरेश पैगवार ने भी उनसे जुड़ी अनेक यादों को साझा किया। इस मौके पर उनके पुत्र प्रकाश श्रीवास्तव और भतीजे प्रेमचंद श्रीवास्तव ने उनकी जिंदगी के अनेक अनछुए पहलुओं तथा उनके पारिवारिक जीवन पर प्रकाश डाला । कार्यक्रम में श्याम सुन्दर गौराहा , रामशरण तंबोली , सचिव विजय राठौर, रोशन केशरवानी, घनश्याम शर्मा चाम्पा, भैया लाल नागवंशी, संतोष कश्यप, दिनेश ‘’रोहित’’ चतुर्वेदी, दयानंद गोपाल, सुरेश पैगवार, उमाकांत टैगोर, पुनीता दरियाना, रामगोपाल राठौर, निडर, गौरव राठौर, महेश राठौर ‘’मलय’’ सहित नगर के साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

आयोजन
दादा के बारे में जानकारी देते अतिथि

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