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विधायक ने लगाया था ध्यानाकर्षण, जांच के पहले ही अकलतरा बीईओ के तीन बाबू सस्पेंड

एक वर्ष पहले
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विधानसभा में विधायक द्वारा विकास खंड शिक्षा कार्यालय में भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, मनमानी के संबंध में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा था। इस मामले की जांच करने के लिए गुरुवार को डीईओ से टीम आने की सुगबुगाहट दिन भर रही। किंतु कोई टीम जांच के लिए नहीं आई। बिना जांच किए तीन बाबूओं को सस्पेंड करने का आर्डर डीईओ द्वारा जारी कर दिया गया। इधर सस्पेंशन के बाद निलंबित बाबुओं ने इस कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए जांच की मांग की है।

विधानसभा सत्र के दौरान विधायक सौरभ सिंह ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से ब्लॉक कार्यालय में पदस्थ लिपिक भुवन सिदार, महेन्द्र हंसा एवं विकास मसीह के विरुद्ध अवैध वसूली एवं भ्रष्टाचार, खेलगढ़िया में बीईओ कार्यालय से मिले निर्देश के अनुसार सामग्री खरीदने का दबाव, शिक्षकों से एरियर्स एवं सातवें वेतनमान की राशि का भुगतान के बदले पैसा मांगने का आरोप लगाते हुए सवाल किया था। होली के अवकाश के बाद सत्र शुरू होने पर सरकार को इस मसले में जवाब देना है। इसलिए आनन फानन में डीईओ ने तीनों बाबूओं को सस्पेंड कर दिया है।सस्पेंड का आधार बीईओ की जांच रिपोर्ट के प्रतिवेदन को बनाया गया है।

विधायक बोले दिखावे की कार्रवाई, बड़े लोगों को बचा रहे


ध्यानाकर्षण लगाने वाले विधायक सौरभ सिंह का कहना है कि बीईओ ऑफिस के बड़े अधिकारी की भी भूमिका की जांच की जानी थी, इस मामले में सस्पेंशन की औपचारिक कार्रवाई की गई है। बीईओ सहित अन्य लोगों को भी जांच के दायरे में लेना था। बड़े लोगों को बचाने कार्रवाई की गई है।


यहां किया गया अटैच


लिपिक भुवन लाल सिदार को निलंबित करते हुए मुख्यालय ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय बलौदा, लिपिक महेन्द्र हंसा को मुख्यालय ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नवागढ़ एवं विकास मसीह को मुख्यालय ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय बम्हनीडीह में स्थानांतरित किया गया है।


यह भी जानिए, क्या कहते हैं निलंबित बाबू

भुवन लाल सिदार ने बताया कि वह स्थापना, मध्याह्न भोजन एवं एलबी शिक्षकों के वेतन को देखता है। उच्च अधिकारियों द्वारा बिना किसी सूचना के एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए निलंबन करना गलत है। किसी भी प्रकार की जांच एवं कार्रवाई के संबंध में उन्हें अवगत नहीं कराया गया। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने भी उनका बयान नहीं लिया है। लिपिक विकास मसीह ने बताया कि कार्यालय में वे लिपिक बी. रक्षित के साथ कार्य को देखते हैं।

कार्यालय प्रमुख से ही करा दी जांच की औपचारिकता

विधायक द्वारा लगाए गए ध्यानाकर्षण में पूरा बीईओ कार्यालय संदेह के दायरे में है। भले ही नाम स्पष्ट थे, लेकिन जो आरोप लगाए गए हैं वे विभाग के बड़े अधिकारी की शह के बिना संभव नहीं है, इसलिए इस मामले की जांच विभाग के किसी दूसरे बीईओ से कराने के बजाय, डीईओ ने वहीं के बीईओ से जांच करा दी। इस तरह बड़े लोग जांच के दायरे से ही बाहर हो गए। लिपिकों का बयान होता तो आरोप के दायरे में कुछ और लोग भी आ सकते थे।

दूसरे बीईओ से कराई जाती जांच तो और भी लोग आ सकते थे दायरे
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